जिले में जलसंकट से निबटने की कारगार तैयारी नहीं

Published at :20 Mar 2016 6:13 AM (IST)
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जिले में जलसंकट से निबटने की कारगार तैयारी नहीं

2922 चापाकल फेल लखीसराय : गरमी बढ़ने के साथ ही जलसंकट गहराने लगा है. खासकर पहाड़ी इलाके कजरा क्षेत्र के बुधौली बुनकर, उरैन, चानन के कुंदर, भलुई, जानकीडीह, मलिया, रामसीर, जगुआजोर कोड़ासी, गजियागढ़ी महादलित टोला, गोबरधोबा कोड़ासी, सतघरबा, महजनमा कोड़ासी, कछुआ, चेहरोन कोड़ासी, पीरीबाजार क्षेत्र के बरियारपुर, घोसैठ, महेशपुर, लोशघानी, कसबा आदि पंचायतों में गरमी […]

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2922 चापाकल फेल

लखीसराय : गरमी बढ़ने के साथ ही जलसंकट गहराने लगा है. खासकर पहाड़ी इलाके कजरा क्षेत्र के बुधौली बुनकर, उरैन, चानन के कुंदर, भलुई, जानकीडीह, मलिया, रामसीर, जगुआजोर कोड़ासी, गजियागढ़ी महादलित टोला, गोबरधोबा कोड़ासी, सतघरबा, महजनमा कोड़ासी, कछुआ, चेहरोन कोड़ासी, पीरीबाजार क्षेत्र के बरियारपुर, घोसैठ, महेशपुर, लोशघानी, कसबा आदि पंचायतों में गरमी बढ़ने के साथ लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है.
इन इलाकों में जलसंकट से निबटने के लिए पीएचइडी विभाग द्वारा कारगर तैयारी नहीं की गयी है. जिले में कुल 11372 चापाकल में से 2922 फेल हो चुके हैं. 8450 चापाकल 10.5 लाख की आबादी के पेयजल की जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी नहीं है.
ग्रामीण जलापूर्ति योजना का बुरा हाल
जिले भर में ग्रामीण जलापूर्ति योजना का बुरा हाल है. पुरानी योजनाओं में सूर्यगढ़ा थाना परिसर, कांकड़ सलेमपुर, रामगढ़ चौक, घोंघसा, अशोक धाम, कजरा, पोखरमा, मेदनीचौकी, नोनगढ़, नंदनामा चानन के बन्नू बगीचा व बालगुदर सहित 16 योजना फिलहाल चालू है. लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है. भूमिगत पाइप क्षतिग्रस्त होने से सूर्यगढ़ा थाना परिसर स्थित जलापूर्ति योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है. कांकड़ सलेमपुर में भी पाइप क्षतिग्रस्त होने से गंदा पानी की सप्लाई हो रही है. कमोबेश यही स्थिति अन्य जगहों की भी है.
मेदनीचौकी क्षेत्र के खाबा में विद्युत दोष की वजह से अक्सर जलापूर्ति बाधित रहा. जनवरी 2015 में ली गयी कुल आठ योजनाओं में से किसी भी योजना से जलापूर्ति का कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है. मननपुर में 252.83 लाख कर प्राक्कलन राशि से निर्माणाधीन योजना का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है. चानन प्रखंड में 176.61 लाख की लागत से तिलकपुर ग्रामीण जलापूर्ति योजना में तीन किलोमीटर पाइप लाइन का कार्य पुरा हो पाया है,
शेष कार्य प्रगति पर है. पिपरिया प्रखंड के सैदपुरा में 170.3 लाख प्राक्कलन की ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना का कार्य पूर्ण कर इसे चालू किया गया है. हलसी के नोमा में 146.3 लाख प्राक्कलन की योजना का कार्य जलश्रोत नहीं मिलने की वजह से स्थगित हो गया. हलसी के सिरखिंडी में 177.79 लाख की प्राक्कलन राशि से शुरू किये गये ग्रामीण जलापूर्ति योजना का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है.
इसी प्रखंड के गरसंडा में 138.75 लाख के प्राक्कलन से ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना में सीधी जलापूर्ति कर इसे चालू किया गया है. रामगढ़ चौक प्रखंड के औरे में 211.43 लाख की प्राक्कलन राशि से ग्रामीण जलापूर्ति योजना का कार्य अधूरा पड़ा है. सूर्यगढ़ा प्रखंड के रामपुर में 222.09 लाख की प्राक्कलन राशि से ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत पाइप लाइन का कार्य पूरा किया गया लेकिन योजना अभी चालू नहीं हुआ है.
पहाड़ी इलाके में नहीं है कारगर तैयारी
चानन व सूर्यगढ़ा प्रखंड के पहाड़ी गांव में भूमिगत जलस्तर में लगातार गिरावट आ रही है. चापानल पानी देना कम करने लगा है. कुआं के जल स्तर में भी तेजी से गिरावट आ रही है. चानन व कजरा के कई पहाड़ी गांव के लोगों को गरमी के दिनों में डेढ़-दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है. तीन वर्ष पूर्व इन इलाकों में पीएचइडी विभाग ने टंकी बनाकर बोरिंग से जलापूर्ति की योजना बनायी थी जो सफल नहीं हो सका. बुधौली बुनकर, उरैन आदि इलाकों में विभाग पानी का टैंकर भेज कर जलापूर्ति करता रहा है लेकिन यह लोगों की जरूरतों से काफी कम है.
क्या कहते हैं अधिकारी
सहायक अभियंता पवन कुमार ने बताया कि समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष में विभिन्न मद का कुल 889 चापाकल गाड़ा गया. इनमें पुराने चापाकल की जगह 320 नया चापाकल, विभिन्न स्कूलों में 98 चापाकल शामिल हैं. पिछले वित्तीय वर्ष का विधायक मद का 335 चापाकल नहीं गाड़ा जा सका.
समाप्त हो रहे वित्तीय वर्ष में विधायक की अनुशंसा से प्रत्येक पंचायत में पांच-पांच चापानल के अलावे खराब चापानल की जगह चार-चार नया चापानल गाड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. उन्होंने बताया कि पहाड़ी इलाके में कुछ पंचायत बुधौली बुनकर, उरैन, चानन के कुंदर, भलुई आदि जगहों पर भूमिगत जलस्तर में गिरावट आने पर जल संकट होता है. यहां चापाकल, बोरिंग आदि फेल हो जाता है. ऐसे इलाके में जल संकट से निबटने की तैयारी की जा रही है.
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