न शक्षिक न छात्र, फिर भी चल रहा संस्कृत उच्च वद्यिालय

Published at :19 Dec 2015 9:01 PM (IST)
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न शक्षिक न छात्र, फिर भी चल रहा संस्कृत उच्च वद्यिालय

न शिक्षक न छात्र, फिर भी चल रहा संस्कृत उच्च विद्यालय वर्ष 2011 से अबतक एक भी छात्र का नहीं हुआ नामांकन, मार्च 2015 से शिक्षकों का भी सभी पद है रिक्तफोटो संख्या : 3,4फोटो कैप्सन : खंडहर में तब्दील संस्कृत उच्च विद्यालय व बेंच-डेस्क पर जमा धूल का परत प्रतिनिधि, मुंगेर ————शहर के बड़ी […]

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न शिक्षक न छात्र, फिर भी चल रहा संस्कृत उच्च विद्यालय वर्ष 2011 से अबतक एक भी छात्र का नहीं हुआ नामांकन, मार्च 2015 से शिक्षकों का भी सभी पद है रिक्तफोटो संख्या : 3,4फोटो कैप्सन : खंडहर में तब्दील संस्कृत उच्च विद्यालय व बेंच-डेस्क पर जमा धूल का परत प्रतिनिधि, मुंगेर ————शहर के बड़ी बाजार स्थित राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय कभी मुंगेर प्रमंडल का प्रसिद्ध विद्यालयों में से एक हुआ करता था. किंतु विभागीय उदासीनता के कारण आज यह विद्यालय अपने बदहाली पर आंसू बहा रहा है. बिना शिक्षक व छात्र के ही यह विद्यालय वर्तमान समय में सिर्फ कागजों पर ही चल रहा है. विद्यालय का भवन भी अब अपनी अंतिम सांसें गिन रही है. वर्ष 1955 में हुई थी स्थापनाराजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय की स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी. यहां शिक्षकों का कुल स्वीकृत पद 9 है. किंतु एक के बाद एक सभी शिक्षक यहां से सेवानिवृत्त होते गये और शिक्षकों का पद खाली होते चला गया. किंतु विभाग द्वारा विद्यालय में शिक्षकों के पद को फिर से नहीं भरा गया. अब हाल यह है कि वर्ष 2011 से इस विद्यालय में छात्रों का नामांकन होना भी बंद हो गया. शौचालय व पेयजल की नहीं है व्यवस्थाविद्यालय में छात्रों का नामांकन नहीं होने का कारण सिर्फ शिक्षकों का ही अभाव नहीं, बल्कि यहां कई मूलभूत सुविधाओं का भी घोर अभाव है. यहां पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है. जबकि पेयजल के बिना पढ़ाई तो दूर की बात जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है. वहीं यदि शौचालय की बात की जाय तो यहां इसका सदा से अभाव रहा है. जिसके कारण यहां छात्र अपना नामांकन करवाने से कतराते रहे हैं. जर्जर है विद्यालय का भवनविद्यालय का भवन छह दशक पुराना होने के साथ- साथ काफी जर्जर हो चुका है. छत का लगभग प्लास्टर झर कर नीचे गिर चुका है. पूरा विद्यालय भवन अब खंडहर में तब्दील हो चुका है. जिसमें रहना अब खतरे को खुला निमंत्रण देने के बराबर है. लगभग दरवाजे खिड़की भी भवन से गायब हो चुके हैं.लिपिक के हाथों में विद्यालय का बागडोरविद्यालय के सभी शिक्षक सेवानिवृत्त हो जाने के बाद अब विद्यालय का बागडोर यहां के लिपिक मनीष कुमार के हाथों में आ गया है. वे कार्य दिवस के समय पर विद्यालय में मौजूद रहते हैं. यहां एक आदेश पाल की भी नियुक्ति है. जिसे उपनिदेशक शिक्षा कार्यालय में प्रतिनियोजित कर दिया गया है. जिसके कारण विद्यालय में अब सफाई तक नहीं होती है.कहते हैं जिला शिक्षा पदाधिकारीजिला शिक्षा पदाधिकारी केके शर्मा ने बताया कि इस विद्यालय में शिक्षकों का नियोजन जिला से नहीं होता है. इसके लिए विभाग को लिखा गया है.

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