महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान

Updated at :15 Nov 2015 6:43 PM
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महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान

महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान प्रतिनिधि, लखीसराय पहला दिन दूसरा दिन तीसरा दिन चौथा दिन 15 नवंबर 16 नवंबर 17 नवंबर 18 नवंबर *नहाय-खाय के साथ अनुष्ठान शुरू * खरना या लोहंडा * प्रथम अर्घ्य * अंतिम दिन *व्रती नदियों में स्नान कर घर की साफ सफाई इस दिन व्रती पूरे दिन * इस […]

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महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान प्रतिनिधि, लखीसराय पहला दिन दूसरा दिन तीसरा दिन चौथा दिन 15 नवंबर 16 नवंबर 17 नवंबर 18 नवंबर *नहाय-खाय के साथ अनुष्ठान शुरू * खरना या लोहंडा * प्रथम अर्घ्य * अंतिम दिन *व्रती नदियों में स्नान कर घर की साफ सफाई इस दिन व्रती पूरे दिन * इस दिन व्रती व श्रद्धालु अनुष्ठान के चौथे और अंतिम के उपरांत अरबा चावल चावल चने की दाल निर्जला व्रत रख कर उपवास रख कर अस्ताचलगामी दिन श्रद्धालु तड़के से ही नदी व कददू की सब्जी का भोजन करते हैं शाम को गुड़ और चावल भगवान भास्कर को अर्घ्य देगी तट पर इकठठा होकर उदयीमान से बनी खीर और रोटी भगवान भास्कर को अर्घ्य देगी विधिपूर्वक पूजन कर प्रसाद व घाट पर प्रसाद ग्रहण करेंगी स्वरूप ग्रहण करेंगी. नहाय-खाय के साथ महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू प्रतिनिधि, लखीसरायरविवार को नहाय-खाय के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू हुआ. तड़के से ही पवित्र नदियों व तालाबों में स्नान के लिए व्रती महिलाओं व श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गयी. नदी स्नान के साथ ही घरों की साफ सफाई कर उसे धोकर अच्छी तरह पवित्र किया गया. बाद में व्रती व घर की अन्य महिलाएं पूरे नियम निष्ठा से नदी से लाये पवित्र जल से अरबा-अरबायन भोजन तैयार की. जिसमें अरबा चावल के अलावे चने की दाल व कद्दू की सब्जी तैयार कर विधिपूर्वक पूजनोपरांत सबसे पहले व्रती इस प्रसाद स्वरूप भोजन को ग्रहण की बाद में परिवार के अन्य लोगों व इष्टमित्रों को अरबा-अरबायन भोजन प्रसाद स्वरूप दिया गया. इस महापर्व में पवित्रता का विशेष ख्याल रखा जाता है. चार दिनों तक व्रती व श्रद्धालु शुद्धता व नियमों का पूरी निष्ठा के साथ पालन करते हैं. कोशिश होती है इसके निर्वहन में कहीं चूक न हो जाय. नहाय-खाय को लेकर जिले भर के नदी घाटों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. सूर्यगढ़ा प्रतिनिधि के मुताबिक लोक आस्था के महापर्व को लेकर रविवार को सुबह से ही किऊल नदी के सूर्यपुरा बाजार, जगदीशपुर घाट, पटेलपुर घाट, रूइया पटटी घाट, कटेहर घाट, हुसैना घाट, ऋषि घाट, अमरपुर घाट,रसुलपूर घाट आदि जगहों पर नदी स्नान के लिए व्रती व अन्य लोगों का तांता लगा रहा. लोगों ने अनुष्ठान के पहले दिन नदी स्नान कर अरबा-अरबायन व्यंजन बना कर प्रसाद ग्रहण किया. दूसरे दिन व्रती रखेगी खरना का व्रत अनुष्ठान के दूसरे दिन सोमवार को व्रती पूरे दिन निर्जला व्रत रखेगी. इसी दिन व्रती व घर की अन्य महिलाएं स्नादि कर पूरी पवित्रता के साथ गेहूं आदि धो-कर सुखाती है. अधिकतर व्रती व श्रद्धालु इसी दिन प्रसाद की तैयारी के लिए सामान की खरीदारी भी करते हैं. दिन भर व्रत के बाद शाम में व्रती गुड़ व चावल से बनी खीर व रोटी तैयार करेगी. छठ मइया की पूजन के बाद खरना का प्रसाद सबसे पहले व्रती खुद बंद कमरे में ग्रहण करती है बाद में प्रसाद अन्य परिवार के अन्य लोगों व इष्ठ मित्रों को दिया जाता है. खरना का प्रसाद मिट्टी के बनाये गये नये चूल्हे में आम की लकड़ी से बनाया जाता है. हालांकि अब लोहे के चूल्हे का भी चलन बढ़ गया है. डबते सूर्य को दिया जायेगा अर्घ्य अनुष्ठान के तीसरा दिन प्रथम अर्घ्य के रूप में जाना जाता है. इस दिन अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है. खरना के दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती प्रथम अर्घ्य के पूर्व दिन व्रत रखती है. व्रती व श्रद्धालु पूरी पवित्रता के साथ स्नान के पश्चात भगवान भास्कर के अर्घ्य के लिए प्रसाद तैयार करने में जुट जाते हैं. प्रसाद में गेहूं के आटे का पकवान, चावल का लड्डू आदि तैयार किया जाता है. छठ का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी से तैयार किया जाता है. प्रसाद तैयार होने के उपरांत छठ का डाला सजाया जाता है. इसमें फल, नारियल, पूजन सामग्री, ठेकुआ, लड्डू, चीनी का सांचा, डाभ आदि रख कर सूर्यास्त होने के पूर्व व्रती व श्रद्धालु नदी घाट, तालाब या पोखर पहुंच जाते हैं और जल में खड़ा होकर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेगी. उगते सूर्य के अर्घ्य के साथ अनुष्ठान पूर्ण छठ पर्व के चार दिवसीय अनुष्ठान के अंतिम दिन बुधवार को श्रद्धालु उदयीमान भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करेंगे. इस दिन पौ फटने से काफी पूर्व ही व्रती व श्रद्धालु नदी तालाबों के किनारे इकट्ठा होते हैं. भगवान सूर्य के उदय होते ही उन्हें अर्घ्य अर्पित करने का सिलसिला शुरू हो जाता है. अर्घ्य के पश्चात घाट पर प्रसाद ग्रहण करने का विशेष महत्व है. छठ घाट पर प्रसाद ग्रहण करना विशेष फलदायी माना जाता है. इन चीजों का करें पालन *यातायात नियमों का करें पालन *लावारिस व संदिग्ध वस्तु मिलने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दें *अफवाहों से बचें *निर्धारित स्थलों पर ही अपने वाहन की पार्किंग करें

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