हैवतगंज में प्राथमिक विद्यालय तक नहीं
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Sep 2015 3:20 AM
प्रतिनिधि :मेदनीचौकी शुक्रवार की दोपहर 12:30 बजे मेदनीचौकी थाना क्षेत्र के किरणपुर पंचायत के हैवतगंज गांव स्थित पुरानी मसजिद में नमाज अदा की जा रही थी कि जबकि एक पेड़ के नीचे चार-पांच युवक यूं ही चुनावी चर्चा कर रहे थे. कैसा हो विधायक प्रश्न करते ही वे भड़क उठे. समीप खड़े शिवबालक पासवान बोले […]
प्रतिनिधि :मेदनीचौकी शुक्रवार की दोपहर 12:30 बजे मेदनीचौकी थाना क्षेत्र के किरणपुर पंचायत के हैवतगंज गांव स्थित पुरानी मसजिद में नमाज अदा की जा रही थी कि जबकि एक पेड़ के नीचे चार-पांच युवक यूं ही चुनावी चर्चा कर रहे थे.
कैसा हो विधायक प्रश्न करते ही वे भड़क उठे. समीप खड़े शिवबालक पासवान बोले बीते 10 वर्षों में एक बार भी विधायक या सांसद हमलोगों का हाल जानने नहीं आये.
पूर्व विधायक भी सिर्फ मुसलिम टोला तक आते रहे हैं. गांव में विधायक निधि से कुछ भी काम नहीं हुआ. पंचायत ने सड़क बनायी, शौचालय दिया.
माया देवी बोली इस गांव की आबादी करीब एक हजार की है. इस फिर भी गांव में प्राथमिक विद्यालय या मकतब नहीं है, जबकि अल्पसंख्यकों की आबादी करीब 200 है. बच्चे दूसरे गांव के स्कूल में पढ़ने जाते हैं.
मिथुन प्रसाद बोले पूरे गांव में न तो सामुदायिक भवन है न किसान भवन है, न आंगनबाड़ी केंद्र भवन है न चबूतरा है. शादी विवाह में बरात ठहराने की जगह नहीं होने से काफी परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत दर्जनों परिवार राशन कार्ड से वंचित रह गये हैं. गांव से तीन किलोमीटर दूर किरणपुर गांव जाकर राशन-केरोसिन लेना पड़ता है. गांव में एक कब्रिस्तान है जिसकी घेराबंदी नहीं की गयी है. गांव में एनएच 80 से जुड़ा एक संपर्क पथ है जो जगह-जगह कट-फट गया है. नरेश पासवान बोले कि हमें रहने के लिए मकान तक नहीं है.
फूस की झोंपड़ी में रहते हैं. उनके अलावा शिवबालक पासवान, चौधरी पासवान, जितेंद्र पासवान, मिथुन पासवान, नगीना पासवान, रामबालक पासवान जैसे जरूरतमंद बीपीएल परिवार के गरीब दलित परिवार इंदिरा आवास से आज तक वंचित है.
जनप्रतिनिधियों ने नहीं ली गांव की सुधि
विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच नेताओं की गूंज उन इलाकों में पहुंचने लगी है जहां जाने से वे परहेज करते रहे. राजनीतिक दावों प्रति दावों के बीच में हकीकत है कि गांव का वो विकास नहीं हो सका है जिसकी बात की जाती है. टूटी सड़कें, गंदगी जैसे तैसे कटता जीवन अभी भी यहां की पहचान बनी हुई है.
शौचालय की बात हो या चापाकल का मामला सब में गांव के इलाके अभी पिछड़े हुए हैं. सड़क व नाला बनने में समय लगता है लेकिन टूटने में नहीं.
इन सब का मलाल गांव के लोगों को है. प्रभात खबर ने सूर्यगढ़ा विधानसभा क्षेत्र के उन गांव का रुख किया जो विकास से अब तक वंचित रह गये. इन गांव में विकास की बात करना शायद बेमानी होगी. शौचालय व चापाकल की समस्या है. दूषित पानी से लोग बीमार हो रहे हैं. इन गांवों को देखने वाला कोई नहीं है.
सड़कें व ईंट खरंजे बने लेकिन वह कुछ ही दिनों में टूट गये. आज भी इस गांव की आबादी झुग्गी झोपड़ी में दिन गुजारने को मजबूर हैं. गांव में अब सड़क की जगह पगदंडी दिखती है. खड़ेजे में उबड़ खाबड़ ईंट यही यहां का विकास है और सच्चाई भी. इन गांव के लोग विकास के मामले में खुद को ठगा महसूस करते हैं.
हालांकि नेताओं एवं उनके समर्थकों के पहुंचने से यहां भी चुनावी फिजां बनने लगी है. इन इलाकों के लोगों को बिजली, पानी, स्वास्थ्य जैसे सुविधा अब तक नसीब नहीं हो पायी है. यहां घर की बहू बेटियां शौच के लिए अहले सुबह व देर शाम होने का इंतजार करती है. ऐसे में गांव के विकास की बात क्या करें.
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