जनगणना में छिपाई जा रही हकीकत, संयुक्त परिवार अलग, कमरे कम और वाहन तक गायब दिखा रहे लोग

Published by :AWADHESH KUMAR
Published at :06 May 2026 6:15 PM (IST)
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जनगणना में छिपाई जा रही हकीकत, संयुक्त परिवार अलग, कमरे कम और वाहन तक गायब दिखा रहे लोग

कई लोग अपने घरों की वास्तविक स्थिति, कमरों की संख्या और यहां तक कि घर में मौजूद वाहनों की जानकारी भी छिपा रहे हैं.

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ठाकुरगंज जनगणना प्रक्रिया के दौरान एक के बाद एक चौंकाने वाली प्रवृत्तियां सामने आ रही हैं. कई घरों में संयुक्त परिवार होने के बावजूद सदस्यों को अलग-अलग परिवार के रूप में दर्ज कराने की कोशिश की जा रही है. वहीं कई लोग अपने घरों की वास्तविक स्थिति, कमरों की संख्या और यहां तक कि घर में मौजूद वाहनों की जानकारी भी छिपा रहे हैं. इससे जनगणना के आंकड़ों और जमीनी सच्चाई के बीच बड़ा अंतर पैदा होने की आशंका बढ़ गई है. मैदानी स्तर पर कार्य कर रहे प्रगणकों के अनुसार एक ही घर में रहने वाले परिवार खुद को अलग-अलग यूनिट बता कर जानकारी दे रहे हैं. कई जगहों पर एक ही रसोई, साझा संसाधन और संयुक्त रहन-सहन होने के बावजूद परिवार अलग-अलग दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं कुछ घरों में अतिरिक्त कमरे, मंजिल की जानकारी भी छिपाई जा रही है. स्थिति यहीं तक सीमित नहीं है. कई परिवार घर में बाइक, स्कूटी, कार या अन्य वाहन होने के बावजूद खुद को बिना वाहन वाला परिवार बता रहे हैं. प्रगणकों का कहना है कि कई बार घर के बाहर वाहन खड़े मिलने के बावजूद जानकारी देते समय उसे दूसरे सदस्य या रिश्तेदार के नाम का बताकर विवरण से बाहर रखा जा रहा है. फिल्ड में काम कर रहे प्रगणक के अनुसार कई मामलों में वास्तविक स्थिति और दी जा रही जानकारी में स्पष्ट अंतर देखने को मिल रहा है. कहीं बड़े घर को छोटे आवास के रूप में दर्ज कराने की कोशिश हो रही है. इससे परिवार संरचना, आवासीय स्थिति और आर्थिक संसाधनों से जुड़े सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं. जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. कुछ लोग भविष्य की सरकारी योजनाओं, राशन, आवास या अन्य लाभों को ध्यान में रखकर परिवार अलग दिखा रहे हैं, जबकि कुछ लोग टैक्स, सरकारी जांच या प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डर से संपत्ति और संसाधनों की जानकारी छिपा रहे हैं. कई परिवार अपनी वास्तविक आर्थिक स्थिति सार्वजनिक करने से भी बच रहे हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि जनगणना कैवल आबादी गिनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विकास योजनाओं की बुनियाद होती है. परिवार की संरचना, घर के कमरों की संख्या, मकान की स्थिति, वाहन, बिजली-पानी जैसी सुविधाओं और आर्थिक संसाधनों के आधार पर ही भविष्य की योजनाएं तैयार की जाती हैं. यदि बड़ी संख्या में लोग गलत जानकारी देंगे तो आवास, सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं का वास्तविक आकलन प्रभावित हो सकता है. अधिकारियों ने लोगों से सही और तथ्यात्मक जानकारी देने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि जनगणना में दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सरकारी आंकड़ों व विकास योजनाओं के लिए किया जाता है. गलत या अधूरी जानकारी से पूरे क्षेत्र की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक तस्वीर धुंधली हो सकती है, जिसका असर भविष्य में संसाधनों और योजनाओं के वितरण पर पड़ सकता है.

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