सुखदेव जी के प्राकट्य प्रसंग से भक्तिमय हुआ माहौल

Updated at : 16 Mar 2026 6:55 PM (IST)
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सुखदेव जी के प्राकट्य प्रसंग से भक्तिमय हुआ माहौल

सुखदेव जी के प्राकट्य प्रसंग से भक्तिमय हुआ माहौल

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दूसरे दिन जगन्नाथ मंदिर में गूंजी श्रीमद्भागवत कथा

ठाकुरगंज. नगर के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. कथा के दूसरे सत्र में श्रद्धेय कथावाचक रामठाकुर जी महाराज ने सुखदेव जी महाराज के प्राकट्य प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण व जीवंत वर्णन किया. उन्होंने कहा कि सुखदेव जी महाराज ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के साक्षात प्रतीक थे, जिन्होंने संपूर्ण मानव जाति को अध्यात्म व मुक्ति का मार्ग दिखाया.

मोह-माया से विरक्ति व अटूट भक्ति का संदेश

कथावाचक ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि महर्षि वेदव्यास के पुत्र सुखदेव जी महाराज जन्म से ही तेजस्वी व विरक्त संत थे. वे बचपन से ही सांसारिक मोह-माया के बंधनों से दूर रहकर प्रभु भक्ति के मार्ग पर अग्रसर रहे. उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि केवल भौतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि सच्चे ज्ञान व अटूट भक्ति से ही मानव जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है. कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण दिव्य हो उठा व श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर नजर आए.

परीक्षित के मोक्ष व भागवत महात्म्य पर चर्चा

रामठाकुर जी महाराज ने राजा परीक्षित के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि जब राजा को सात दिनों के भीतर मृत्यु का श्राप मिला, तब उन्होंने अंतिम समय में विचलित होने के बजाय भक्ति का मार्ग चुना. उसी समय सुखदेव जी महाराज ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया. उन्होंने जोर देकर कहा कि भागवत कथा का श्रवण मनुष्य के हृदय को पवित्र बनाता है और उसे सदाचार की ओर प्रेरित करता है. कथा के अंत में भगवान के जयकारों से पंडाल गूंज उठा और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया.

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AWADHESH KUMAR

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