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30 वर्ष के बाद एनसीडी का जोखिम अधिक : डॉ उर्मिला

Updated at : 30 Aug 2025 6:44 PM (IST)
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30 वर्ष के बाद एनसीडी का जोखिम अधिक : डॉ उर्मिला

पीएचसी व सभी सीएचसी में आयोजित हुई समीक्षा बैठक, उपलब्ध कराई गई विशेष मेडिकल किट

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-पीएचसी व सभी सीएचसी में आयोजित हुई समीक्षा बैठक, उपलब्ध कराई गई विशेष मेडिकल किट

किशनगंज

गैर संचारी रोग (एनसीडी) जैसे कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, अल्ज़ाइमर और मोतियाबिंद आज के समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक हैं. ये बीमारियां संक्रामक नहीं होती, लेकिन समय पर उचित इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती हैं. राष्ट्रीय असंचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीडी) के अंतर्गत जिलेभर में क्लीनिक स्थापित किए गए हैं, जहां रोगियों की जांच और इलाज की मुफ्त सुविधा उपलब्ध है.

गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उर्मिला कुमारी ने समीक्षा बैठक के दौरान बताया कि इन रोगों का एक बड़ा कारण लोगों द्वारा शरीर में होने वाले शुरुआती लक्षणों की अनदेखी करना है. उन्होंने कहा कि गैर संचारी रोग अक्सर शुरुआती दौर में सामान्य प्रतीत होते हैं, लेकिन धीरे-धीरे ये गंभीर रूप धारण कर लेते हैं.

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने जानकारी दी कि 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में एनसीडी का जोखिम अधिक रहता है. उन्होंने कहा कि इस आयु वर्ग के लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए. स्वास्थ्य विभाग ने सभी संस्थानों में ब्लड प्रेशर मशीन, ग्लूकोमीटर और अन्य उपकरणों से युक्त विशेष मेडिकल किट उपलब्ध कराई हैं. रोग की पुष्टि होने पर मरीजों को दवाएं भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं.

शनिवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र किशनगंज में एनसीडीओ की अध्यक्षता में सीएचओ के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई. इसी क्रम में जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों की अध्यक्षता में विशेष समीक्षा बैठकें आहूत की गईं. इन बैठकों में एनसीडी कार्यक्रम पर विशेष फोकस करते हुए रोगों की रोकथाम, जांच और उपचार की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई. अधिकारियों ने लक्ष्य रखा कि जिले के सभी पात्र लोगों तक एनसीडी जांच व इलाज की सुविधा पहुंचाई जाए.

जागरूकता और समय पर जांच से ही संभव है बचाव

डॉ. उर्मिला कुमारी ने कहा कि एनसीडी क्लीनिकों का मुख्य उद्देश्य रोगों की समय पर पहचान और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी सेहत के प्रति सजग रहना चाहिए और समय-समय पर जांच करानी चाहिए. जागरूकता, सिविल सर्जन ने भी निर्देश दिया है कि सभी स्वास्थ्य केंद्र मरीजों को सर्वोत्तम चिकित्सा सेवाएं प्रदान करें और किसी तरह की लापरवाही से बचें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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