राशन कार्ड कटा तो खुला खेल, भूमिहीनों को रिकॉर्ड में बना दिया कई एकड़ जमीन का मालिक

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राशन कार्ड कटा तो खुला खेल, भूमिहीनों को रिकॉर्ड में बना दिया कई एकड़ जमीन का मालिक

ठाकुरगंज(किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट. Ration Card News: किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड में सरकारी रिकॉर्ड की कथित गड़बड़ी ने कई गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. भूमिहीन होने का दावा करने वाले ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी अभिलेख में उनके नाम पर कई एकड़ कृषि भूमि दर्ज दिखा दी गई. इसी आधार […]

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ठाकुरगंज(किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट.

Ration Card News: किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड में सरकारी रिकॉर्ड की कथित गड़बड़ी ने कई गरीब परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. भूमिहीन होने का दावा करने वाले ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी अभिलेख में उनके नाम पर कई एकड़ कृषि भूमि दर्ज दिखा दी गई. इसी आधार पर उनका राशन कार्ड भी काट दिया गया. अब ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और राशन कार्ड बहाल करने की मांग उठाई है.
सोमवार को मुखिया प्रतिनिधि दिलशाद के नेतृत्व में प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) से मिले. उन्होंने शिकायत की कि वे वर्षों से बिहार सरकार की जमीन पर रहकर जीवन-यापन कर रहे हैं और उनके पास अपनी कोई कृषि योग्य भूमि नहीं है. इसके बावजूद ऑनलाइन भूमि अभिलेख में उनके नाम पर कई एकड़ जमीन दर्ज दिखाई जा रही है.

Ration Card News: भूमिहीन थे, लेकिन रिकॉर्ड में बन गए भू-स्वामी

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में गलत भूमि विवरण दर्ज होने के कारण उन्हें अपात्र मान लिया गया और राशन कार्ड से उनका नाम हटा दिया गया. इससे कई गरीब परिवारों के सामने खाद्यान्न का संकट खड़ा हो गया है.

उनका सवाल है कि जब उनके पास खेती योग्य जमीन है ही नहीं, तो सरकारी रिकॉर्ड में कई एकड़ भूमि उनके नाम कैसे दर्ज हो गई.

किसान सलाहकार की भूमिका पर भी उठे सवाल

मुखिया प्रतिनिधि दिलशाद ने मामले में किसान सलाहकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि यदि पात्रता सत्यापन के दौरान गलत भूमि विवरण या त्रुटिपूर्ण रिपोर्ट के आधार पर लाभुकों का नाम हटाया गया है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

उन्होंने मांग की कि जिनकी रिपोर्ट के आधार पर भूमिहीन परिवारों का राशन कार्ड काटा गया, उनकी जिम्मेदारी भी तय की जाए.

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ग्रामीणों ने की रिकॉर्ड सुधारने और राशन कार्ड बहाल करने की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड की गलती का खामियाजा गरीब परिवारों को नहीं भुगतना चाहिए. उन्होंने प्रशासन से भूमि अभिलेखों की जांच कर गलत प्रविष्टियों को ठीक करने और वास्तविक पात्र लाभुकों का राशन कार्ड जल्द बहाल करने की मांग की.

बीडीओ ने दिया जांच का भरोसा

प्रखंड विकास पदाधिकारी ने ग्रामीणों की शिकायत सुनने के बाद मामले की जांच कराने और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है. अब प्रभावित परिवारों की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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