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सिलीगु़ड़ी-अलुआबाड़ी की ट्रेनों में टीटी नहीं, बेटिकट यात्रा कर रहे लोग

Updated at : 04 Jun 2025 11:04 PM (IST)
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सिलीगु़ड़ी-अलुआबाड़ी की ट्रेनों में टीटी नहीं, बेटिकट यात्रा कर रहे लोग

ट्रेनों में टीटी नहीं, बेटिकट यात्रा कर रहे लोग

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ठाकुरगंज. कटिहार रेल मंडल के अधिकारियों की मेहरबानी से सिलीगुड़ी-अलुआबाड़ी रेलखंड के बीच चलने वाली ट्रेनों में बिना टिकट सफर करने वाले यात्रियों की मौज है. इस रूट पर चलने वाली लोकल ट्रेनों में कोई भी टीटी नहीं रहने से बड़े पैमाने पर बेटिकट यात्री सफ़र करते है. इन बेटिकट यात्रियों के कारण टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्री तो परेशान है ही रेलवे को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है. बिना टिकट यात्रा करने वालों में अधिकांश महिलाएं ही शामिल है. पिछले कई महीनो से इस रूट पर कोई भी चेकिंग अभियान नहीं होने से बिना टिकट यात्रा करने वालों का मनोबल भी बढ़ा हुआ दीखता है. जानकार बताते है ठाकुरगंज से गुजरने वाली एक्सप्रेस व पसैंजर ट्रेनों में सैकड़ो यात्री प्रतिदिन बेटिकट यात्रा कर रही हैं. इसे रोकने के लिये रेल प्रशासन के पास समुचित व्यवस्था नहीं है. टिकट चैकिंग स्टाफ की कमी का असर रेलवे के कटिहार मंडल में भी देखने को मिल रहा है. इससे बिना टिकट यात्रा करने वालों की संख्या बढ़ने से रेलवे को राजस्व का नुकसान हो रहा है. वहीं यात्रियों को भी सफर के दौरान परेशानी से जूझना पड़ रहा है. दरअसल ट्रेनों में यात्री भार में लगातार वृद्धि हो रही है. दूसरी ओर टीसी व टीटीई स्टाफ कम होता जा रहा है.

यहां एक भी स्टाफ कार्यरत नहीं

रेलमंडल के कुछ बड़े स्टेशन यथा कटिहार, न्यूजलपाईगुडी, सिलीगुड़ी जेसे स्टेशनों पर तो चेकिंग स्टाफ कार्यरत है लेकिन छोटे स्टेशन जेसे ठाकुरगंज, बागडोगरा, अलुआबाड़ीरोड, नक्सलबाड़ी जेसे रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के लिए एक भी स्टाफ कार्यरत नहीं है, जबकि सिलीगुड़ी, न्युजलपाई गुडी कटिहार जैसे बड़े जंक्शन पर गेट पर 24 घंटे टीटीई स्टाफ तैनात रहता है, इनसे बचने के लिए बिना टिकट यात्रा करने वाले छोटे स्टेशनों पर ही उतर जाते हैं.

रूटीन ट्रेनों में भी कम जा रहे स्टाफ

टीटीई स्टाफ की संख्या कम होने से मंडल होकर आने जाने वाली ट्रेनों में भी स्टाफ कम रहता है. जिन रूटीन ट्रेनों में पांच टीटीई की जरूरत है उनमें दो, तीन या चार ही भेजे जा रहे हैं. इससे दूसरे स्टाफ पर भी काम का बोझ बढ़ रहा है. स्पेशल व वीकली ट्रेनों में भी ऐसा ही हाल है. ट्रेनों में भीड़ बढ़ने और सीट नहीं मिलने की स्थिति में यात्री टीटीई को खोजते हैं. बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या बढऩे पर बाकी यात्रियों को दिक्कत होती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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AWADHESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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