एक शौचालय पर ताला, दूसरे में गंदगी का अंबार : खुले में पेशाब करने को मजबूर यात्री
शौचालय रहते भी उसके बाहर सड़क का इस्तेमाल करते है लोग
ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी झेलनी पड़ रही है. स्टेशन पर शौचालयों की बदहाल स्थिति के कारण यात्रियों को खुले में शौच करने जैसी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.
किशनगंज : ठाकुरगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्टेशन परिसर में शौचालय होने के बावजूद उनकी बदहाल स्थिति के कारण यात्री खुले में पेशाब करने को मजबूर हैं. इससे रेलवे की स्वच्छता व्यवस्था और यात्री सुविधाओं पर सवाल उठने लगे हैं.
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यात्रियों का कहना है कि स्टेशन परिसर में बने शौचालयों में से एक पर हमेशा ताला लटका रहता है, जबकि अन्य दो शौचालयों में गंदगी, दुर्गंध और नियमित सफाई के अभाव के कारण उनका उपयोग करना मुश्किल हो गया है. ऐसे में कई लोग स्टेशन के बाहर दीवारों और खाली स्थानों का इस्तेमाल करने को विवश हैं.
महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी
स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों के सामने सबसे बड़ी समस्या शौचालय की है. महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यात्रियों का कहना है कि उपयोग योग्य शौचालय नहीं होने से उन्हें काफी असुविधा होती है.
स्वच्छता व्यवस्था पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इस समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला. उनका आरोप है कि नियमित सफाई और निगरानी के अभाव में स्टेशन परिसर की स्वच्छता व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है.
यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से की मांग
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से बंद पड़े शौचालय को तत्काल चालू कराने, सभी शौचालयों की नियमित सफाई, पानी की उपलब्धता और रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि ठाकुरगंज जैसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को स्वच्छ और सम्मानजनक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.
प्रमुख बातें
- स्टेशन परिसर का एक शौचालय लंबे समय से बंद होने का आरोप.
- अन्य दो शौचालयों में गंदगी और दुर्गंध से यात्रियों को परेशानी.
- कई यात्री खुले में पेशाब करने को मजबूर.
- महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक दिक्कत.
- स्थानीय लोगों ने नियमित सफाई और रखरखाव की मांग की.
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