बारिश आई तो कट गया गांव का रिश्ता, सड़क टूटी... महादलित बस्ती हुई दुनिया से लगभग अलग

Author Gourav kumar|Edited by Janardan Pandey
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बारिश आई तो कट गया गांव का रिश्ता, सड़क टूटी... महादलित बस्ती हुई दुनिया से लगभग अलग

कच्ची सड़क पर बरसात का पानी | Prabhat Khabar Network

किशनगंज के कोठीटोला देवरी में भारी बारिश के कारण सड़क टूटने से महादलित बस्ती का संपर्क टूट गया है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं।

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प्रतिनिधि, किशनगंज बरसात की हर बूंद कोठीटोला देवरी के महादलित परिवारों के लिए आफत बनकर बरस रही है. चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या-11 स्थित इस गांव को घनीफुलसरा चैनपुर से जोड़ने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क बाढ़ में दो स्थानों पर कटकर ध्वस्त हो चुकी है. कटे हुए हिस्सों में जलभराव होने से गांव का संपर्क लगभग टूट गया है और सैकड़ों ग्रामीण रोज जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को विवश हैं.कीचड़ और पानी से लथपथ सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. बुजुर्ग, महिलाएं और मरीज सबसे अधिक परेशानी झेल रहे हैं. किसी के बीमार पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचना चुनौती बन जाता है, जबकि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए गांव से बाहर निकलना भी जोखिम भरा सफर बन गया है.ग्रामीण भगल पासवान, योगेंद्र पासवान, राजेंद्र पासवान, दशरथ मांझी, श्यामलाल मांझी, रमेश मांझी, रोहित मांझी, शंभू झा, रोहित पासवान, संतोष झा, महेश पासवान, भीम चौधरी, संतोष पासवान, बैद्यनाथ झा, लाल झा और तारिणी प्रसाद झा सहित अन्य लोगों ने बताया कि वर्षों से यह सड़क कच्ची है. हर बरसात में इसकी हालत बदतर हो जाती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में आज तक कोई पहल नहीं हुई. बाढ़ में कटे दोनों स्थानों पर न पुल बना और न ही सड़क की मरम्मत हुई. ग्रामीणों का कहना है कि सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को कई बार आवेदन दिया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला. उनका आरोप है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच कोठीटोला देवरी की महादलित बस्ती आज भी बुनियादी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रही है. ग्रामीणों ने नवपदस्थापित जिलाधिकारी से मांग की है कि कोठीटोला देवरी से घनीफुलसरा चैनपुर तक सड़क का शीघ्र पक्कीकरण कराया जाए तथा बाढ़ में कटे दोनों स्थानों पर आरसीसी पुल का निर्माण कराया जाए. उनका कहना है कि इससे न केवल महादलित परिवारों को राहत मिलेगी, बल्कि बच्चों की शिक्षा, किसानों की आवाजाही और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी आसान होगी. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन छेड़ने को बाध्य होंगे. उनका कहना है कि अब उन्हें वादे नहीं, सड़क और पुल चाहिए.

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