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15 मरीजों को एमएमडीपी किट और यूडीआईडी सर्टिफिकेट वितरित

Updated at : 17 Jan 2025 8:11 PM (IST)
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15 मरीजों को एमएमडीपी किट और यूडीआईडी सर्टिफिकेट वितरित

सिविल सर्जन डॉ. राजेश कुमार के निर्देशन में टेढ़ागाछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 15 फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को मोरबिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रीवेंशन (एमएमडीपी) किट प्रदान की गई.

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फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को एमएमडीपी किट वितरण, किया जागरूकफाइलेरिया उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान तेजस्वास्थ्य विभाग की नियमित देखभाल व प्रबंधन पर विशेष जोरकिशनगंज.फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में किशनगंज जिले में स्वास्थ्य विभाग पूरी तत्परता से कार्यरत है. सिविल सर्जन डॉ. राजेश कुमार के निर्देशन में टेढ़ागाछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 15 फाइलेरिया ग्रसित मरीजों को मोरबिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी प्रीवेंशन (एमएमडीपी) किट प्रदान की गई. इन किटों के साथ मरीजों को यूडीआईडी सर्टिफिकेट भी सौंपे गए.

स्वास्थ्य विभाग की पहल और जागरूकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान मरीजों को ग्रसित अंगों की देखभाल के लिए डेटॉल साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, टब, मग, तौलिया और अन्य आवश्यक सामग्री किट के रूप में दी गई. सिविल सर्जन ने बताया कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए मरीजों को न केवल बेहतर देखभाल बल्कि जागरूकता फैलाने का भी दायित्व निभाना होगा.

फाइलेरिया प्रबंधन और देखभाल पर विशेषज्ञों की राय

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने बताया कि फाइलेरिया का संपूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन इसकी जटिलताओं को नियंत्रित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि फाइलेरिया के लक्षण जैसे पैरों की सूजन (हाथीपांव), हाइड्रोसील या महिलाओं के स्तनों में सूजन को समय रहते पहचानना और उचित देखभाल जरूरी है. मरीजों को अंगों की सफाई, एंटीसेप्टिक क्रीम के उपयोग, और चिकित्सकीय सलाह पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

जागरूकता से ही बचाव संभव

सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि फाइलेरिया एक परजीवी रोग है, जो मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है. इस बीमारी के लक्षण शुरुआती दौर में दिखते नहीं हैं और संक्रमण के पांच से दस साल बाद लक्षण प्रकट होते हैं. उन्होंने कहा कि फाइलेरिया मरीज को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित करता है, लेकिन जागरूकता और सही प्रबंधन से इसे नियंत्रित किया जा सकता है.

फाइलेरिया के लक्षण और बचाव पर सलाह

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार अविनाश रॉय ने बताया कि फाइलेरिया का मुख्य कारण मादा क्यूलेक्स मच्छर है. फाइलेरिया के लक्षणों में बुखार, खुजली, अंगों की सूजन और हाथीपांव जैसी समस्याएं शामिल हैं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर मरीजों को एमएमडीपी किट वितरित कर उनकी देखभाल सुनिश्चित कर रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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