जब मंत्री बने गुरु. विद्यार्थियों को दिया जीवन में सफलता का मंत्र

मोतीबाग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर सैनिक स्कूल में विद्यार्थियों को संबोधित करते राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल.
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने एक स्कूल के शुभारंभ समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित किया. उन्होंने सफलता के लिए अंकों से अधिक चरित्र, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण को महत्वपूर्ण बताया.
किशनगंज से गौरव कुमार की रिपोर्ट
किशनगंज : मंच पर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल थे, लेकिन उनके शब्दों में एक शिक्षक की गंभीरता, एक मार्गदर्शक की संवेदना और एक अभिभावक की चिंता साफ झलक रही थी. शहर के मोतीबाग स्थित सरस्वती विद्या मंदिर सैनिक स्कूल के प्रथम शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और लक्ष्य प्राप्ति का ऐसा संदेश दिया, जिसने पूरे सभागार को प्रेरणा से भर दिया.
विद्यार्थियों को सफलता का मूल मंत्र दिया
डॉ. जायसवाल ने कहा कि जीवन में सफलता केवल अच्छे अंक प्राप्त करने से नहीं मिलती, बल्कि अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, चरित्र और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना से मिलती है. उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जो समय का सम्मान करता है, माता-पिता और गुरुजनों का आदर करता है तथा अपने लक्ष्य के लिए निरंतर प्रयास करता है, सफलता उसी के कदम चूमती है.
शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी नहीं
उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का सैनिक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, प्रशासक, शिक्षक और देश का नेतृत्व करने वाला नागरिक बनेगा. इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देना होना चाहिए. देश को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है, जिनमें ज्ञान के साथ संस्कार, साहस और सेवा की भावना भी हो.
मोबाइल से दूरी, पुस्तकों से दोस्ती की अपील
मंत्री ने विद्यार्थियों से मोबाइल और अनावश्यक भटकाव से दूर रहने तथा पुस्तकों को अपना सच्चा मित्र बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि हर दिन स्वयं को पहले से बेहतर बनाने का संकल्प लें और कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से पीछे न हटें.
शिक्षकों को भी दी अहम जिम्मेदारी
डॉ. जायसवाल ने शिक्षकों से कहा कि वे केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता, चरित्र, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी के संस्कार भी विकसित करें. उन्होंने कहा कि जब विद्यालय शिक्षा और संस्कार का केंद्र बनता है, तभी मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव होता है.
आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार पर जोर
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि सरस्वती विद्या मंदिर सैनिक स्कूल में आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्य, शारीरिक दक्षता, नेतृत्व क्षमता और सैन्य अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को हर क्षेत्र में उत्कृष्ट बनने के लिए तैयार करना है.
तालियों की गूंज के बीच हुआ सम्मान
मंत्री के प्रेरक संबोधन का विद्यार्थियों और अभिभावकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया. कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल को सम्मानित किया. समारोह में विद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
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By Shruti Kumari
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