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कुपोषित बच्चों में टीबी का खतरा ज्यादा

Updated at : 27 Aug 2025 7:43 PM (IST)
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कुपोषित बच्चों में टीबी का खतरा ज्यादा

जन्म से छह माह के भीतर लगवाएं बीसीजी का टीका, टीबी और मेनिन्जाइटिस से करता है बचाव

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– जन्म से छह माह के भीतर लगवाएं बीसीजी का टीका, टीबी और मेनिन्जाइटिस से करता है बचाव किशनगंज टीबी एक संक्रामक रोग है जो खांसने-छींकने से फैलता है. खासतौर से ऐसे बच्चे जो कुपोषण से ग्रसित हैं या जिनका इम्युनिटी लेवल कमजोर है, उनमें टीबी संक्रमण का खतरा कई गुना अधिक हो जाता है. संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. मंजर आलम ने बताया कि टीबी माइक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु के कारण होता है. आमतौर पर यह रोग फेफड़ों को प्रभावित करता है और बच्चों में करीब 60 फीसदी मामले फेफड़ों से जुड़े मिलते हैं. उन्होंने कहा कि स्वस्थ बच्चों की तुलना में कुपोषित बच्चों में टीबी का खतरा अधिक होता है. कम उम्र के बच्चों में बलगम नहीं बनता, जिससे जांच में कठिनाई आती है. डॉ. आलम ने कहा कि बच्चों में हमेशा बनी रहने वाली खांसी, वजन कम होना, भूख की कमी, थकान, कमजोरी, बुखार और रात में पसीना आना इसके प्रमुख संकेत हैं.उन्होंने कहा, “अगर बच्चे को दो हफ्तों से अधिक समय तक खांसी रहती है तो जांच कराना जरूरी है. कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों, कैंसर या एचआईवी से ग्रसित बच्चों में टीबी का खतरा और बढ़ जाता है. शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ मंजर आलम ने बताया कि शिशुओं को टीबी से बचाने के लिए बीसीजी का टीका लगाया जाता है. यह टीका न केवल टीबी बल्कि मेनिन्जाइटिस से भी सुरक्षा प्रदान करता है. सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि टीबी की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता सबसे अहम है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AWADHESH KUMAR

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