गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए तेज हुआ भूमि अधिग्रहण

Updated at : 25 Mar 2026 6:38 PM (IST)
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गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए तेज हुआ भूमि अधिग्रहण

गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए तेज हुआ भूमि अधिग्रहण

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कुंजी मारी व करुआमनी समेत दर्जनों मौजों में शुरू हुई प्रक्रिया, उत्तर प्रदेश से बंगाल तक का सफर होगा सुगम, व्यापारिक हब बनेगा जिला

ठाकुरगंज. वर्षों से बेहतर सड़क संपर्क व तेज आवागमन की उम्मीद लगाए सीमांचल के लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आयी है. महत्वाकांक्षी ”गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे” परियोजना को लेकर अब धरातल पर काम शुरू हो गया है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के निर्देश पर जिले में सैकड़ों हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गयी है, जिसे इस पिछड़े क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है.

कनेक्टिविटी का नया युग, समय व दूरी में आएगी कमी

यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश को बिहार के सीमांचल के रास्ते पश्चिम बंगाल व उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ेगा. इसके निर्माण से हाई-स्पीड कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, जिससे घंटों का सफर मिनटों में तय हो सकेगा. इससे न केवल आम यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि अंतरराज्यीय व्यापारिक आवाजाही भी पहले से कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित हो जाएगी.

व्यापारिक हब के रूप में उभरेगा किशनगंज

विशेषज्ञों का मानना है कि इस एक्सप्रेस-वे के चालू होने के बाद किशनगंज जिला एक प्रमुख ”लॉजिस्टिक्स हब” के रूप में विकसित हो सकता है. यहां ट्रांसपोर्ट, वेयरहाउसिंग व कोल्ड स्टोरेज सेक्टर में बड़े निवेश की संभावनाएं हैं. परियोजना के निर्माण के दौरान स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा. साथ ही, एक्सप्रेस-वे के किनारे होटल, पेट्रोल पंप और सर्विस सेंटर जैसे नए व्यवसायों के अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

इन गांवों में शुरू हुई अधिग्रहण की प्रक्रिया

प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई तेज कर दी गयी है. कुंजी मारी, बेसरबाटी, कठारो, खारुदाह, भोगडाबर, जीरनगाछ, करुआमनी व बरचोंदी आदि गांवों में काम तेजी से हो रहा है. इन ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को उम्मीद है कि बेहतर सड़क संपर्क से स्वास्थ्य सेवाओं व शिक्षा तक उनकी पहुंच आसान हो जाएगी.

मुआवजा व पारदर्शिता पर प्रशासन का जोर

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया अत्यंत पारदर्शी होगी. भूमि अधिग्रहण ”राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956” के तहत किया जा रहा है. प्रशासन ने धारा 3ए (प्रारंभिक अधिसूचना) व 3डी (अधिग्रहण की घोषणा) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है. रैयतों को निर्धारित नियमों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा. कई विशेषज्ञ इसे किसानों के लिए एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं, जहाँ प्राप्त राशि का उपयोग वे नए व्यवसाय या शिक्षा के लिए कर सकेंगे.

सीमांचल के भविष्य की मजबूत नींव

यह एक्सप्रेस-वे केवल एक सड़क मात्र नहीं है, बल्कि यह सीमांचल के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है. बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से आने वाले वर्षों में निवेश व उद्योगों का रास्ता साफ होगा, जिससे यह इलाका विकास की नयी ऊंचाइयों को छू सकेगा.

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