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ध्यान के बिना ज्ञान संभव नहीं है: मुनिश्री आनंद

Updated at : 04 Jan 2025 8:03 PM (IST)
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ध्यान के बिना ज्ञान संभव नहीं है: मुनिश्री आनंद

तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम महावर्चस्वी,महातेजस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुसिष्य मुनिश्री आनंद कुमार जी (कालू) एवं सहवर्ती मुनिश्री विकास कुमार जी (ठाणा 2) के पावन सानिध्य में, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (टीपीएफ) एवं तेरापंथ महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन, किशनगंज में प्रेक्षा ध्यान कार्यशाला का आयोजन किया गया.

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प्रेक्षा ध्यान कार्यशाला का आयोजन.

किशनगंज.तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम महावर्चस्वी,महातेजस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुसिष्य मुनिश्री आनंद कुमार जी (कालू) एवं सहवर्ती मुनिश्री विकास कुमार जी (ठाणा 2) के पावन सानिध्य में, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (टीपीएफ) एवं तेरापंथ महिला मंडल के संयुक्त तत्वावधान में तेरापंथ सभा भवन, किशनगंज में प्रेक्षा ध्यान कार्यशाला का आयोजन किया गया.

कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री आनंद कुमार जी (कालू) के महामंत्र उच्चारण के साथ हुआ। तत्पश्चात टीपीएफ टीम की ओर से मंगलाचरण के रूप में टीपीएफ गीत प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर टीपीएफ के सदस्यों एवं तेरापंथ महिला मंडल की बहनों द्वारा सामूहिक प्रेक्षा ध्यान गीत प्रस्तुत किया गया. टीपीएफ के अध्यक्ष विनीत दफ्तरी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई. महिला मंडल की सेक्रेटरी ममता जी डुगर ने प्रेक्षा ध्यान के विषय पर सबको संबोधितकिया.

मुनि श्री आनंद कुमार जी कालू ने कहा कि बदले जीवन धारा

मुनि श्री ने बताया कि जैन धर्मावलंबियों के लिए प्रेक्षा ध्यान एक पद्धति है.गणपतिधि गुरुदेव आचार्य श्री तुलसी की आज्ञा को सिरोधारी करते हुए आज से 50 वर्ष पूर्व आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी ने ध्यान का नवीनीकरण करते हुए प्रेक्षाध्यान जैसे अवदान को देकर जन जन की आध्यात्मिक चेतना को और अधिक प्राकृतिक करने का प्रयाश किया. मानसिक संतुलन बनाये रखने में सहायक करता है प्रेक्षा ध्यान मानसिक , शांति,शारीरिक,स्वास्थ्य और तनाव मुक्ति के उद्देश्य से उद्देश्य से प्रेक्षा -ध्यान का प्रयोग करना चाहिए. वर्तमान समय में व्यक्ति को भावनात्मक मानसिक तनाव आदि से बचाने के लिए प्रेक्षा ध्यान एक सफल समाधान के रूप में सबके सामने आया है.

सहनशीलता और धैर्यशीलता की कमी बात बात पर गुस्सा आ जाना इन सब का बस एक ही निवारण है प्रेक्षाध्यान.

आज संपूर्ण विश्व में प्रेक्षा ध्यान का डंका बजा हुआ है.मुनि श्री ने प्रेरणा देते हुए कहा कि ध्यान अंदर की यात्रा है,मनुष्य बाहरी जगत में तो घूम लेता है.लेकिन अंदर की यात्रा के लिए ध्यान आवश्यक है.ध्यान के बिना ज्ञान भी संभव नहीं है.

विशेष अतिथि योग गुरु रवि राज ने दैनिक जीवन में योग, व्यायाम और ध्यान के समावेश पर विस्तृत रूप से चर्चा की. कार्यक्रम में ज्ञानशाला के छात्रों द्वारा प्रस्तुत तुलसी अष्टकम का प्रदर्शन मुनि श्री जी ने सराहा.इस अवसर पर

भिक्षु सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष राजकरण दफ्तरी,तेरापंथ सभा उपाध्यक्ष मोहन लाल लूनिया, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष रोहित दफ्तरी, तेरापंथ महिला मंडल मंत्री ममता देवी दुगर, पूर्व अभातेयुप महामंत्री मनीष दफ्तरी,उपासिका सुश्री सारीका कोठारी, ज्ञानशाला की मुख्य प्रशिक्षिका ममता बैद, इस कार्यक्रम में उपस्थित थी. इस कार्यशाला काफ़ी संख्या में श्रावक,श्राविका एवं ज्ञानशाला के बच्चे उपस्थित थे. कार्यशाला का संचालन प्रियंका दफ्तरी ने किया.वहीं टीपीएफ की सदस्य दिव्या बोथरा ने सभी का आभार व्यक्त किया.

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