कम बच्चे होने माताएं दे पाती है अधिक ध्यान

Published by :AWADHESH KUMAR
Published at :01 Dec 2025 9:16 PM (IST)
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कम बच्चे होने माताएं दे पाती है अधिक ध्यान

तेजी से बदलते भारत में जनसंख्या संतुलन, मातृ–शिशु स्वास्थ्य और सामाजिक,आर्थिक स्थिरता एक विकसित राष्ट्र की बुनियाद माने जाते हैं

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किशनगंज

तेजी से बदलते भारत में जनसंख्या संतुलन, मातृ–शिशु स्वास्थ्य और सामाजिक,आर्थिक स्थिरता एक विकसित राष्ट्र की बुनियाद माने जाते हैं. इसी दृष्टि से जिले में चल रहा परिवार नियोजन अभियान सोमवार को केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि विकसित भारत की दिशा में उठाया गया दूरदर्शी कदम बन चुका है. ग्रामीण क्षेत्रों में आशा दीदियों का घर–घर पहुंचकर सारथी रथ के साथ जागरूकता फैलाना इस प्रयास को और अधिक प्रभावी बना रहा है. उनका संवाद, समझाइश और अस्थायी साधनों का सीधे घरों तक वितरण एक जिम्मेदार समाज के निर्माण की बुनियाद रख रहा है. आशा दीदियों के द्वारा सारथी रथ के साथ चलाया जा रहा यह घर-घर अभियान परिवार नियोजन की पुरानी अवधारणा “छोटा परिवार, सुखी परिवार” को नए संदर्भ में फिर जीवंत कर रहा है.अब माताएं खुलकर कह रही हैं कि कम बच्चे होने से वे स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दे पाती हैं, शिक्षा पर बेहतर खर्च कर पाती हैं और पूरे परिवार की जीवन गुणवत्ता में सुधार आता है.सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि विकसित भारत का आधार स्वस्थ परिवार हैं, और स्वस्थ परिवार वही हैं जो सोच–समझकर परिवार नियोजन को अपनाते हैं. आशा दीदियों का यह अभियान सामाजिक विकास की दिशा में बड़ा परिवर्तन ला रहा है.”

विकसित समाज वही जो अपनी अगली पीढ़ी के प्रति जिम्मेदार हो

जिलाधिकारी विशाल राज ने स्पष्ट कहा कि परिवार नियोजन को सिर्फ स्वास्थ्य कार्यक्रम मानना भूल होगी. यह अभियान सामाजिक प्रगति, आर्थिक स्थिरता और आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य का आधार तैयार करता है.उन्होंने कहा कि हर परिवार को यह समझना होगा कि सुविचारित परिवार नियोजन ही मजबूत समाज की नींव है. आशा कार्यकर्ताओं के प्रयास से गांवों में जागरूकता सकारात्मक बदलाव ला रही है, और यही विकसित भारत की राह है.

ठाकुरगंज में आशा दिवस, परिवार नियोजन को सर्वोच्च प्राथमिकता का निर्देश

ठाकुरगंज प्रखंड में आयोजित आशा दिवस में परिवार नियोजन को जिले की शीर्ष प्राथमिकता बताते हुए निर्देश जारी किए गए. बैठक में आशाओं से कहा गया कि वे नए विवाहित जोड़ों, दो बच्चों वाले परिवारों और उच्च जोखिम वाली महिलाओं के बीच लगातार जागरूकता संवाद जारी रखें.

कार्यक्रम के दौरान यह संदेश सामने आया कि अनियोजित गर्भधारण के चलते महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे आते हैं, वहीं बड़े परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है.प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी अखलाकुर रहमान ने कहा कि आशा दीदियों की मेहनत से गांव में यह समझ विकसित हो रही है कि छोटा परिवार केवल व्यक्तिगत विकल्प नहीं, बल्कि समाज के भविष्य की सुरक्षा है. यह अभियान लंबे समय में बड़े परिवर्तन की नींव रखेगा.

सारथी रथ के माध्यम से गांव–गांव जागरूकता -परिवारों का बढ़ता सहभागिता

सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि जिले के कई ग्रामीण इलाकों में सारथी रथ पहुंचा, जहाँ आशा दीदियों ने महिलाओं और पुरुषों दोनों से बातचीत की. इस संवाद में परिवारों की भागीदारी पहले की तुलना में अधिक दिखी.कई परिवारों ने यह स्वीकार किया कि योजनाबद्ध ढंग से परिवार बढ़ाने से बच्चों की शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है.अस्थायी साधनों का वितरण बढ़ा है और लोग खुले मन से सवाल पूछ रहे हैं. यह बदलाव बताता है कि परिवार नियोजन अब हिचक का विषय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का विषय बन रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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