कागजों में जंगल, जमीन पर बस्ती, रिकॉर्ड की गड़बड़ी से ग्रामीण परेशान

Updated at : 14 Mar 2026 6:34 PM (IST)
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कागजों में जंगल, जमीन पर बस्ती, रिकॉर्ड की गड़बड़ी से ग्रामीण परेशान

कागजों में जंगल, जमीन पर बस्ती, रिकॉर्ड की गड़बड़ी से ग्रामीण परेशान

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लोधाबाड़ी गांव में 35 एकड़ जमीन वन क्षेत्र दर्ज, वर्षों से बसे गरीब परिवारों को नहीं मिल रहा जमीन व आवास योजना का लाभ

ठाकुरगंज. चूरली पंचायत के लोधाबाड़ी गांव में सरकारी रिकॉर्ड की एक प्रविष्टि ने गरीब परिवारों का जीवन मुश्किल बना दिया है. खाता संख्या 550 की करीब 35 एकड़ जमीन को खतियान में जंगल दर्ज कर दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि उस इलाके में वर्षों से लोगों की बस्ती बस चुकी है व कई परिवार वहां घर बनाकर रह रहे हैं. सबसे हैरानी की बात यह है कि जहां जमीन पर जंगल का नामोनिशान तक नहीं है, वहीं सरकारी कागजों में आज भी उसे वन क्षेत्र माना जा रहा है. इसी वजह से वहां रहने वाले गरीब व भूमिहीन परिवारों को न तो जमीन का बंदोबस्त मिल पा रहा है, न ही सरकार की आवास योजना का लाभ मिल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन पर जंगल नहीं है तो उसे आज भी जंगल दिखाकर गरीबों के हक को क्यों रोका जा रहा है. उनका आरोप है कि वर्षों से इस समस्या को लेकर अंचल कार्यालय का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. वन नियमों के अनुसार जिस क्षेत्र का दायरा कम से कम एक हेक्टेयर हो और जहां वृक्षों की कैनपी घनत्व 10 प्रतिशत से अधिक हो, उसे फॉरेस्ट कवर माना जाता है. लेकिन कई मामलों में पुराने रिकॉर्ड के आधार पर जमीन को आज भी वन क्षेत्र में गिना जा रहा है, भले ही वहां पेड़-पौधे लगभग खत्म हो चुके हों. चूरली पंचायत के लोधाबाड़ी गांव के ग्रामीणों का कहना है कि कागजों का यह जंगल अब गरीबों के अधिकार पर भारी पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि जो जमीन राजस्व रिकॉर्ड में झील के रूप में दर्ज है, उसी जमीन की रजिस्ट्री कर दी गई है. वहीं जिस भूमि को कागजात में जंगल बताया जा रहा है, उसका बंदोबस्त नहीं किया जा रहा है. इस विरोधाभासी स्थिति से स्थानीय लोगों में भ्रम व नाराजगी पैदा हो गयी है. लोगों का कहना है कि प्रशासन को रिकॉर्ड की सही जांच कर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए, ताकि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनी रहे. इस मामले में प्रभावित लोगों ने मांग की है कि जमीन का तत्काल सर्वे कराकर रिकॉर्ड में संशोधन किया जाए और वर्षों से बसे परिवारों को जमीन का अधिकार दिया जाए.

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AWADHESH KUMAR

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