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हड्डियों में दर्द को हल्के में न लें, यह हो सकता है हड्डी का टीबी

Updated at : 05 Jan 2025 7:25 PM (IST)
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हड्डियों में दर्द को हल्के में न लें, यह हो सकता है हड्डी का टीबी

हड्डियों में लगातार दर्द, सूजन, या प्रभावित स्थान का गर्म या ठंडा महसूस होना गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है.

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किशनगंज. हड्डियों में लगातार दर्द, सूजन, या प्रभावित स्थान का गर्म या ठंडा महसूस होना गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण अक्सर हड्डी के टीबी (ट्यूबरकुलस बोन डिजीज) की ओर इशारा करते हैं. यक्ष्मा नियंत्रण पदाधिकारी, डॉ. मंजर आलम ने बताया कि टीबी एक खतरनाक लेकिन उपचार योग्य बीमारी है. अगर किसी मरीज को हड्डियों में असामान्य दर्द, जोड़ों में कठोरता, या फोड़े का अनुभव हो, तो यह बोन टीबी हो सकता है. यह बीमारी कूल्हे, घुटने, रीढ़, और अन्य बड़े जोड़ों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है.

हड्डी का टीबी: कारण और लक्षण

सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि हड्डी का टीबी मुख्य रूप से एम. ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है. यह संक्रमण रीढ़, कूल्हों, और घुटनों के जोड़ों में अधिक पाया जाता है, क्योंकि इन स्थानों में रक्त प्रवाह अधिक होता है.

हड्डी के टीबी के प्रमुख लक्षण

जोड़ों में असहनीय दर्द, रीढ़ की हड्डी में कूबड़, वक्षीय क्षेत्र में बेचैनी, हड्डी की विकृति और कमजोरी, पीठ दर्द और मांसपेशियों की जकड़न, हड्डियों और जोड़ों का असामान्य आकार, डॉ आलम के अनुसार, हड्डी का टीबी प्रारंभिक अवस्था में दवाओं से ठीक किया जा सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में सर्जरी आवश्यक हो सकती है.

उपचार व रोकथाम के उपाय

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ मंजर आलम ने बताया कि अगर शुरुआती चरण में हड्डी के टीबी की पहचान हो जाए, तो एंटी-टीबी दवाओं से 99 प्रतिशत तक मामलों में सफल उपचार संभव है. सर्जरी की जरूरत केवल गंभीर और उन्नत चरणों में पड़ती है. सरवाइकल पेन और बैक पेन के लिए नियमित व्यायाम और फिजियोथेरेपी फायदेमंद हैं. रिकेट्स जैसी समस्याओं में विटामिन की खुराक उपयोगी साबित होती है.

निक्षय पोषण योजना से मरीजों को राहत

सिविल सर्जन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि टीबी के मरीजों के लिए “निक्षय पोषण योजना” बहुत कारगर साबित हुई है. इसके तहत, प्रत्येक मरीज को इलाज के दौरान प्रतिमाह 1000 रुपये पोषण भत्ता दिया जाता है. यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में जमा की जाती है. योजना के तहत, मरीज के नोटिफिकेशन पर निजी चिकित्सकों को 500 रुपये और मरीज के पूरी तरह ठीक होने पर अतिरिक्त 500 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है. यहां तक कि अगर कोई आम व्यक्ति संभावित टीबी मरीज को अस्पताल लाता है, और उसमें टीबी की पुष्टि होती है, तो उसे भी 500 रुपये का इनाम दिया जाता है.

टीबी उन्मूलन का लक्ष्य 2025

भारत सरकार ने 2025 तक देश से टीबी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है. इस दिशा में निक्षय पोषण योजना जैसी योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि टीबी की रोकथाम के लिए आम लोगों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है. बीमारी के शुरुआती लक्षणों को पहचान कर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना और दवाओं का पूरा कोर्स लेना बेहद जरूरी है.जनसहयोग और जागरूकता के बिना टीबी मुक्त भारत का सपना पूरा करना मुश्किल होगा. आइए, इस मिशन में मिलकर सहयोग करें और देश से टीबी को जड़ से खत्म करने में योगदान दें.

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