मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त ने रेलवे ट्रेक का किया निरीक्षण

Updated at : 30 Apr 2024 7:42 PM (IST)
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मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त ने रेलवे ट्रेक का किया निरीक्षण

मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग ने लगातार दूसरे दिन गलगलिया - अररिया रेल परियोजना पर ठाकुरगंज - पौआखाली ट्रैक का ट्रॉली से निरीक्षण किया.

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ठाकुरगंज(किशनगंज).मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग ने लगातार दूसरे दिन गलगलिया – अररिया रेल परियोजना पर ठाकुरगंज – पौआखाली ट्रैक का ट्रॉली से निरीक्षण किया. आयुक्त ने मंगलवार को मेची पुल से पौआखाली तक करीब नौ किमी लंबे ट्रैक का ट्रॉली निरीक्षण किया. इस दौरान कई जगहों पर ट्रॉली से उतर कर सुरक्षा जांच करते हुए अधिकारियों को निर्देश भी दिए. इसके अलावा उन्होंने कादोगाेव और पौआखाली रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा प्रंबधों जांच की.

उन्होंने ट्रैक, लेवल, अंडरब्रिज, पुलिया, स्टेशन भवन, कंट्रोल पैनल सिग्नल समेत तमाम चीजों का बारीकी से निरीक्षण किया गया. पौआखाली तक निरीक्षण के बाद मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त जनक कुमार गर्ग विशेष निरीक्षण रेल में सवार होकर स्पीड ट्रायल के लिए ठाकुरगंज के लिए रवाना हुए. पहली बार स्पीड ट्रायल के दौरान यह विशेष ट्रेन 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक दौड़ी, वही पहली सफलता के बाद पुनः दूसरी बार ट्रेन का स्पीड ट्रायल किया गया , रेल सूत्रों ने बताया की दूसरी बार स्पीड 90 किमी प्रति घंटे की रही. बताया जाता है कि निरीक्षण के दौरान सीआरएस को कोई बड़ी खामी नहीं मिली है. जल्द ही इस रुत पर ट्रेन परिचालन को अप्रूवल मिलने की उम्मीद है.

सेफ्टी क्लीयरेंस मिलते ही दौड़ेगी ट्रेन

सुरक्षा जांच होने के बाद सेफ्टी क्लियरेंस मिलने के साथ ही आगामी कुछ ही दिनों में ठाकुरगंज से पौआखाली तक रेल संचालन शुरू होने की भी संभावना है. जिसके बाद यह पिछड़ा इलाका राष्ट्र की मुख्य धारा से सीधा जुड़ जाएगा. सूत्रों का कहना है कि सीआरएस के द्वारा एक-दो दिन में में ही सेफ्टी क्लियरेंस जारी कर दिया जाएगा और रेलवे लोकसभा चुनावों की आचार संहिता के बाद नियमित रेल संचालन शुरू कर देगा.

18 साल बाद पूर्ण हुआ प्रोजेक्ट का एक हिस्सा

पूर्वोत्तर भारत को सीमांचल-मिथिलांचल के रास्ते दिल्ली और अन्य राज्यों से जोड़ने वाली इस परियोजना को तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने वित्त वर्ष 2006-07 के बजट में स्वीकृति दी थी. 24 वर्ष पूर्व घोषित इस प्रोजेक्ट का काम इतना धीमा रहा कि 18 साल में भी संतोषजनक काम नहीं किया जा सका. इस प्रोजेक्ट को मार्च 2011 तक इसे पूरा कर लिया जाना था. जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट की लागत पूर्व में 530 करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर 2145 करोड़ रुपये हो गई है.

क्या फायदा होगा इस रेल लाइन का

किसी आपदा के समय यदि बरोनी – कटिहार – एन जी पी रेल रूट बंद रहता है तो देश के शेष भाग से पूर्वोतर का संपर्क बना रहे इसके लिए अररिया – गलगलिया रेल लाइन का निर्माण काफी महत्व पूर्ण है. हाल के दिनों में अब तक दर्जनों बार विभिन्न कारणों से बाधित हुई रेल सेवा के दौरान लोगो के जेहन में तो यह सवाल गूंजता है की सरकार क्यों नहीं विकल्प के रूप में गलगलिया अररिया नई रेल लाइनको प्राथमिकता देते हुए पूरा करती है.परन्तु रेल अधिकारियों और विभिन्न सम्बंधित अधिकारियों के जेहन में क्यों नहीं यह बात आती है. बताते चले लगभग 101 किमी लंबी इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह मार्ग सिलीगुड़ी – ठाकुरगंज होते हुए अररिया – फारबिसगंज – मुज्जफरपुर , दरभंगा, लखनऊ , मुरादाबाद होते हुए दिल्ली से जुड़ जाएगा. और तो और यह मार्ग वर्तमान के एन जी पी – कटिहार – बरोनी – पटना – मुगलसराय – लखनऊ – मुरादाबाद के बनिस्पत 50 किमो तक कम हो जाएगी. और तो और देश को पूर्वोतर से जुड़ने का एक वैकल्पिक रास्ता भी मिलेगा. परन्तु रेलवे इस परियोजना में कोई रूचि लेता नहीं दिख रहा. शिलान्यास के दस साल बीतने के बाबजूद अब तक इस परियोजना के लिए जमीन तक रेलवे अधिग्रहण नहीं कर सका. अब जब लगातार सीमा पर हालात तनाव पूर्ण हो और पूर्वोतर का रेल संपर्क हमेशा बाधित हो जाता हो तब इस परियोजना का महत्व रेलवे को समझना चाहिए.

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