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ठंड बढ़ी, खतरे बढ़े: बच्चों की सेहत को लेकर रहे सावधान: सीएस

Updated at : 30 Nov 2025 9:05 PM (IST)
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ठंड बढ़ी, खतरे बढ़े:  बच्चों की सेहत को लेकर रहे सावधान: सीएस

सही पोषण, गर्म कपड़े, स्वच्छता व सतर्कता ही बचाव का आधार

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-सही पोषण, गर्म कपड़े, स्वच्छता व सतर्कता ही बचाव का आधार

किशनगंज

सर्दियों की दस्तक के साथ ही जिले में तापमान गिरने लगा है और बर्फीली हवाओं का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. चिकित्सकों का कहना है कि ठंड के मौसम में बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है, जिसके कारण सर्दी-जुकाम, वायरल फ्लू, निमोनिया, हाइपोथर्मिया, अस्थमा, ब्रोन्काइटिस, डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में माता-पिता को अपने बच्चों की देखभाल में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, ताकि मौसम के प्रभाव से होने वाली संभावित बीमारियों को रोका जा सके. सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि सर्दियों में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए सबसे पहली और महत्वपूर्ण चीज है सही पोषण जो कि अत्यधिक आवश्यक है. बच्चों की स्वास्थय को लेकर विशेष सावधानी रखने की जरूरत है. ठंड के मौसम में शरीर की ऊर्जा खपत बढ़ जाती है, जिससे बच्चों को गर्म और पोषक आहार देना अत्यंत आवश्यक हो जाता है. उन्होंने कहा कि हल्का गर्म और घर पर पका ताजा भोजन बच्चों के शरीर को गर्म रखता है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है. ठंडी चीजों जैसे आइसक्रीम, बर्फ वाले पेय या रेफ्रिजरेटेड खाद्य पदार्थों से परहेज करने की सलाह दी. डॉ. चौधरी के अनुसार सर्दियों में कई बच्चे पर्याप्त पानी नहीं पीते, जिससे डिहाइड्रेशन और कमजोरी हो सकती है इसलिए बच्चों को दूध, सूप, दाल का पानी, नारियल पानी और सामान्य पानी नियमित अंतराल पर दें. उन्होंने बताया कि बच्चे के आहार में दलिया, दाल-चावल, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडा, मौसमी फल, खट्टे फल, गुड़, मछली और सूखे मेवे शामिल करने से उनकी प्रतिरक्षा क्षमता मजबूत होती है. यह पोषण उन्हें ठंड से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा प्रदान करता है.

गर्म कपड़े पहनाने में बरतें समझदारी

सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने माता-पिता को सलाह दी कि ठंड से बचाव के लिए बच्चों को सिर से पैर तक ढककर रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूरे बाजू के कपड़ों के ऊपर स्वेटर, टोपी, कान की पट्टी, दस्ताने और गर्म मोजे पहनाना जरूरी है, क्योंकि सिर, कान और पैर से ही शरीर में ठंड सबसे तेजी से प्रवेश करती है. उन्होंने बताया कि छोटे बच्चों को पहले सूती कपड़े पहनाएं और उसके बाद ऊनी कपड़े, ताकि उन्हें किसी प्रकार की एलर्जी या खुजली न हो. गीले कपड़ों को तुरंत बदलें, क्योंकि नमी बच्चों में सर्दी और निमोनिया का प्रमुख कारण बनती है. साथ ही, सर्दियों में त्वचा पर होने वाले रैशेज और रूखापन से बचाने के लिए मॉइश्चराइजर का उपयोग करें और छोटे बच्चों को सुबह की धूप में कुछ देर जरूर रखें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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