आठ महीने से अटका अलुआबाड़ी रोड-ठाकुरगंज रेल दोहरीकरण, जमीन के अभिलेख नहीं मिलने से नहीं बढ़ी प्रक्रिया

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सांकेतिक तस्वीर

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अलुआबाड़ी रोड-ठाकुरगंज रेल लाइन के दोहरीकरण परियोजना में आठ महीने की देरी हो गई है. जमीन अधिग्रहण के लिए आवश्यक राजस्व अभिलेखों की अनुपलब्धता के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है. इस देरी से सीमांचल के विकास पर सवाल उठ रहे हैं.

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किशनगंज : सीमांचल की बहुप्रतीक्षित अलुआबाड़ी रोड-ठाकुरगंज रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना प्रशासनिक स्तर पर हो रही देरी के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है. आधिकारिक दस्तावेजों से पता चला है कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया नवंबर 2025 में शुरू कर दी गई थी, लेकिन करीब आठ महीने बाद भी राजस्व अभिलेख उपलब्ध नहीं होने से अधिग्रहण की कार्रवाई लंबित है.

नवंबर 2025 में रेलवे ने मांगे थे अभिलेख

दस्तावेजों के अनुसार, 26 नवंबर 2025 को पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (एनएफ रेलवे) के निर्माण संगठन, न्यू जलपाईगुड़ी के कार्यपालक अभियंता ने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, किशनगंज को पत्र भेजकर अलुआबाड़ी रोड-ठाकुरगंज ब्रॉडगेज रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए चिन्हित भूमि का खतियान, स्वामित्व संबंधी विवरण और अन्य राजस्व अभिलेख उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था. रेलवे ने स्पष्ट किया था कि भूमि अधिग्रहण की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए इन दस्तावेजों का उपलब्ध होना जरूरी है.

भू-अर्जन कार्यालय ने भी जारी किया था निर्देश

रेलवे के पत्र के बाद जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने उसी दिन ठाकुरगंज और पोठिया के अंचल अधिकारियों को संबंधित मौजों के खतियान एवं अन्य अभिलेख उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था. इसके बावजूद निर्धारित समय में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके.

आठ महीने बाद फिर भेजा गया अनुस्मारक

8 जुलाई 2026 को जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने दोबारा 'अतिआवश्यक' श्रेणी का अनुस्मारक जारी किया. पत्र में कहा गया कि पूर्व में निर्देश दिए जाने के बावजूद खतियान और खेसरा पंजी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिसके कारण भूमि अधिग्रहण की आगे की कार्रवाई शुरू नहीं हो पा रही है. संबंधित अंचल अधिकारियों को अभिलेख तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.

करीब 37.81 एकड़ भूमि का होना है अधिग्रहण

रेलवे के भूमि अधिग्रहण प्रस्ताव के अनुसार कनकपुर, उद्रागोरी, पटेशरी, लुंनधारा, शेखपुरा, सारोगोड़ा, पातिलाभाषा, घियादगांव, धनतोला, उदगड़ा, मोलानापाड़ा और हलदा सहित कई मौजों के सैकड़ों प्लॉट इस परियोजना में शामिल हैं. इस चरण में कुल 1,52,998.328 वर्गमीटर (लगभग 37.81 एकड़) भूमि अधिग्रहित की जानी है.

परियोजना से सीमांचल को होगा बड़ा लाभ

रेल दोहरीकरण परियोजना पूरी होने के बाद इस रेलखंड पर ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी. ट्रेनों की क्रॉसिंग में लगने वाला समय कम होगा, मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु होगा तथा भविष्य में बढ़ते रेल यातायात को संभालना आसान हो जाएगा.

उठ रहे हैं सवाल

अब सवाल यह है कि जब रेलवे ने नवंबर 2025 में ही आवश्यक दस्तावेज मांग लिए थे, तो संबंधित कार्यालयों से उन्हें उपलब्ध कराने में आठ महीने से अधिक का समय क्यों लग गया. यदि अभिलेख समय पर उपलब्ध हो जाते तो भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अब तक काफी आगे बढ़ चुकी होती. अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिला प्रशासन के नए निर्देश के बाद आवश्यक राजस्व अभिलेख कब तक उपलब्ध कराए जाते हैं और परियोजना की प्रक्रिया कब रफ्तार पकड़ती है.

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बच्छराज

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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