500 किसानों को मशरूम खेती से जोड़ने का लक्ष्य

Published at :07 Oct 2016 4:05 AM (IST)
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500 किसानों को मशरूम खेती से जोड़ने का लक्ष्य

किशनगंज : नाबार्ड के उत्पादक समूह विकास निधि के अंतर्गत किशनगंज जिला में आरडीएमओ एवं संपूर्ण क्रांति सेवा संस्थान के द्वारा जिले के ठाकुरगंज, पोठिया, बहादुरगंज, दिघलबैंक प्रखंड में कुल चार किसान उत्पादक समूह का गठन किया गया है़ इनमें से आरडीएमओ संस्था द्वारा ठाकुरगंज प्रखंड में मशरूम आधारित उर्मिला मशरूम उत्पादन कंपनी लिमिटेड एवं […]

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किशनगंज : नाबार्ड के उत्पादक समूह विकास निधि के अंतर्गत किशनगंज जिला में आरडीएमओ एवं संपूर्ण क्रांति सेवा संस्थान के द्वारा जिले के ठाकुरगंज, पोठिया, बहादुरगंज, दिघलबैंक प्रखंड में कुल चार किसान उत्पादक समूह का गठन किया गया है़ इनमें से आरडीएमओ संस्था द्वारा ठाकुरगंज प्रखंड में मशरूम आधारित उर्मिला मशरूम उत्पादन कंपनी लिमिटेड एवं पोठिया में बकरी पालन पर उर्मिला गोट रियरिंग कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया है़

जबकि संपूर्ण क्रांति सेवा संस्थान द्वारा कोशी सब्जी उत्पादक कंपनी लिमिटेड, दिघलबैंक एवं सक्षम बकरी पालन कंपनी लिमिटेड का गठन किया गया है. इन चारों उत्पादक कंपनी लिमिटेड में अगले तीन वर्षों में 500 उत्पादकों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है़ इन उत्पादक समूहों को भारत सरकार के कंपनी एक्ट 1956 के अंतर्गत पंजीकृत किया गया है़ जिससे ये उत्पादक उक्त अधिनियम के अंतर्गत कंपनी को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे़ डीडीएम सावन प्रकाश ने बताया कि भूजाेतों के छोटे छोटे टुकड़ों में विभाजित होने तथा संगठन के अभाव में भारतीय उत्पादक अपनी पैदावार का अधिकमत मूल्य प्राप्त करने तथा प्रगति करने में असमर्थ है़ं

भारत में तकरीबन 12.5 करोड़ से अधिक कृषक परिवार है़ं जिसमें से 85 प्रतिशत लघु मूल्य, सीमांत कृषक है़ं जिनकी भूजोत का आकार दो हेक्टेयर से कम है़ भूजोतों के छोटे छोटे टुकड़ों में होने तथा असंगठित होने के कारण कृषकों के लिए नवीनवत प्रौद्योगिकी को अपनाना ही नहीं अपितु बीजों तथा उर्वरक की उच्च उपज वाली किस्मों का प्रयास करना भी आर्थिक दृष्टि से व्यवहारिक नहीं है़ व्यक्तिगत स्तर पर अपनी उपज बेचने के कारण वे बेचने योग्य अतिरिक्त उपज का अच्छा भाव वसूल करने में भी असमर्थ रहते है़ं ऐसे में उत्पादक संघ किसानों की इन समस्याओं का निराकरण की दिशा में एक संभव प्रयास हो सकता है़ जहां मजबूत संगठन एवं बेहतर प्रबंधन के आधार पर कृषकों के आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में कार्य किया जा सकता है़ इस पूरे कार्यक्रम के प्रभारी मूल्यांकन हेतु जिला स्तर पर डीडीएम नाबार्ड की अध्यक्षता में एक परियोजना मूल्यांकन समिति का गठन किया गया है़ जिसमें जिला कृषि पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक एवं एलडीएम इसके सम्मानित सदस्य होंगे जबकि कार्यकारी संस्था के सचिव, मुख्य कार्यपालक अधिकारी इसके सदस्य सचिव होते है़ं

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