मृत व्यक्ति के नाम किया गया म्यूटेशन

किशनगंज : जिले में सरकारी बाबुओं और भूमाफियाओं के बीच के गठजोड़ का एक और नया मामला प्रकाश में आते ही पूर ेजिले में सनसनी फैल गयी है. इस ताजा मामले में स्थानीय अंचल कार्यालय में तैनात बाबुओं ने भू -माफियाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मृत व्यक्ति के नाम से ही जमीन का […]
किशनगंज : जिले में सरकारी बाबुओं और भूमाफियाओं के बीच के गठजोड़ का एक और नया मामला प्रकाश में आते ही पूर ेजिले में सनसनी फैल गयी है. इस ताजा मामले में स्थानीय अंचल कार्यालय में तैनात बाबुओं ने भू -माफियाओं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मृत व्यक्ति के नाम से ही जमीन का दाखिल खारिज कर लाखों के वारे न्यारे कर लिये और भू माफियाओं के बीच इस गठजोड़ का खुलासा उस वक्त हुआ
जब एक अधिवक्ता ने सूचना के अधिकार के तहत इन संबंध में जानकारी एकत्रित कर ली. इस संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए अधिवक्ता गौतम पोद्दार ने बताया कि आरटीआई के तहत जब अंचल कार्यालय से टेउसा मौजा के दाखिल खारिज के संबंध में जानकारी मांगी गयी तो अंचलाधिकारी ने अपने ज्ञापांक 379-26.5.15 के तहत बताया कि बाबू लाल साह पिता बिहारी लाल साह, टेउसा निवासी को टेउसा मौजा के थाना संख्या 39, खास 256,खेसरा 894 रकवा 7 डिसमिल 8 कड़ी भूमि जिसका केवाला संख्या 2895 है व 5 फरवरी 1988 को यह जमीन बाबू लाल साह द्वारा खरीदी गयी है.
परंतु इस केवाला को दाखिल खारिज के लिए 18 दिसंबर 2014 तक प्रस्तुत नहीं किया गया था और इस जमीन को बाबू लाल ने यशोदा देवी को बेच दिया था. इस जमीन का नामांतरण केवाला संख्या 2251 दिनांक 5.7.93 के आधार पर दाखिल खारिज वाद संख्या 283/2003-04 से यशोदा देवी पति राम स्नेही भगत, ढेकसरा के नाम कर दी गयी थी. परंतु इस दरम्यान बाबू लाल की मौत हो जाने के बाद उनके पुत्र गोविंद साह ने 18.12.14 को खुद को बाबू लाल घोषित करते हुए
उक्त जमीन के दाखिल खारिज के लिए आरटीपीएस के तहत आवेदन दे उक्त जमीन का दाखिल खारिज बाबू लाल के नाम से करा लिया. इस संबंध में पूछे जाने पर अंचलाधिकारी भी स्वीकार करते है कि गोविंद साह द्वारा धोखाधड़ी कर जमीन का दाखिल खारिज करा लिया गया है.
हालांकि उन्होंने कहा कि केवाला के बहुत पुराना होने के कारण एवं संनिहित रकवा के छोटे होने के कारण और जमाबंदी रैयत के पुत्र द्वारा अंसरित होने के कारण भूलवश जमीन मृत व्यक्ति के नाम दाखिल खारिज हो गयी है. ऐसी स्थिति में यह सवाल उठना लाजिमी है कि किस परिस्थिति में पहले से ही मोटेशन की गयी जमीन को एक मृत व्यक्ति के नाम पुन: मोटेशन कर दी गयी.्थानीय पंकज जैन ने बताया कि 14.2.14 को पत्नी पायल जैन ने यशोदा देवी से जमीन खरीद ली थी. जिसका दाखिल खारिज 11.6.14 को जमाबंदी नंबर 705 अंचल कार्यालय से प्राप्त कर लिया था.
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