बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारी शुरू

।। अवधेश झा ।। किशनगंज : संभावित बाढ़ से निपटने को लेकर जिला प्रशासन ने बाढ़ पूर्व ही एहतिहाती तौर पर तैयारी शुरू कर दी है. ताकि बाढ़ से होनेवाली क्षति को कम किया जा सके. एडीएम आपदा अजय झा ने कहा कि बाढ़ के पूर्व, बाढ़ के दौरान व बाढ़ के बाद इन तीन […]
।। अवधेश झा ।।
किशनगंज : संभावित बाढ़ से निपटने को लेकर जिला प्रशासन ने बाढ़ पूर्व ही एहतिहाती तौर पर तैयारी शुरू कर दी है. ताकि बाढ़ से होनेवाली क्षति को कम किया जा सके. एडीएम आपदा अजय झा ने कहा कि बाढ़ के पूर्व, बाढ़ के दौरान व बाढ़ के बाद इन तीन चरणों में बाढ़ आपदा से निपटने के लिए सामुदायिक ग्राम स्तरीय आपदा प्रबंधन योजना का निर्माण व उसके महत्व पर चर्चा होनी चाहिए.
* बाढ़ से पहले की तैयारी
बाढ़ आने से पहले सुरक्षित आश्रय स्थल व मार्गो का चयन कर लेनी चाहिए. बाढ़ के समय में कम से कम एक हफ्ते भर के लिए भोजन सामग्री की व्यवस्था रखनी चाहिए. योजना सामग्रियों में सामान्यत: सत्तू, चूड़ा, गुड़, नमक, चना, बिस्कुट आदि अन्य सूखे व खाद्य पदार्थ रखनी चाहिए.
इसे बिना पकाये खाया जा सकता है. खाद्य सामग्रियों को प्लास्टिक की थैली में रखना चाहिए. जिससे वह सुरक्षित रह सके. बाढ़ की संभावना होने पर सुरक्षित स्थान पर जाने से पहले खाने के सामानों के अलावे प्राथमिक उपचार पेटी, मजबूत रस्सी, पॉलिथीन, छाता व एक डंडा अवश्य रखना चाहिएए. इसके अलावे टार्च, बैटरी, मोमबत्ती, माचिस, लालटेन व केरोसिन के साथ संभव हो तो छोटा गैस सिलिंडर, चुल्हा व एक-दो बहुपयोगी बरतन भी साथ रख लेनी चाहिए.
बाढ़ आने से पहले बहुमूल्य सामानों के साथ-साथ जमीन-जायदाद के कागजात, बैंक, डाकघर आदि के पासबुक, वोटर आइकार्ड, राशन कार्ड, बीपीएल कार्ड, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र आदि सुरक्षित कर लेनी चाहिए.
* बाढ़ के दौरान आवश्यक बातें
बाढ़ के दौरान डूबने से बचने या बचाने के लिए रबर टय़ूब, लाइफ जैकेट, प्लास्स्टिक की खाली बोतलें, रस्सी आदि तैयार व आसपास रखनी चाहिए. ढक्कनयुक्त प्लास्टिक की बोतलों को कमर में रस्सी के सहारे बांध लेने से डूबने से बचा जा सकता है. इसके अलावे एलुमीनियम के दो हांडी के उपरी हिस्से पर दो बांस बांध कर भी उसके सहारे डूबने से बचा जा सकता है.
बाढ़ के दौरान शुद्ध पानी पीने के लिए हैलोजन टेबलेट का प्रयोग करना चाहिए. उल्टी दस्त आदि होने का खतरा रहता है. ऐसे में आवश्यक हवा के साथ समय-समय पर ओआरएस का घोल पीना चाहिए. ओआरएस की अनुपलब्धत पर विकल्प के रूप में दाल का पानी, सादी चाय, गर्म पानी में नमक व चीनी के घोल व मांड आदि भी थोड़े-थोड़े समय पर दिये जा सकते हैं. डायरिया में भी यह विकल्प उतना ही लाभदायक है.
* बाढ़ समाप्ति के बाद एहतियात
बाढ़ की त्रासदी के बाद काफी जगहों पर छिटपुट जल-जमाव काफी दिनों तक रह जाता है. इसके साथ ही गंदगी, कूड़ा-कचरा, मृत पशुओं के जीवाश्म जमा हो जाते हैं.
इस कारण ऐसे क्षेत्रों में संक्रमण बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए इनसे बचने के लिए मृत पशुओं के जीवाश्म को जमीन में दफन कर देनी चाहिए. कूड़े-कचरे के ढेर को या तो जमीन में दफन कर देना चाहिए या जला देना चाहिए. लगभग 40 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर का एक लीटर पानी में घोल तैयार कर घोल का गंदगी वाले स्थान पर छिड़काव करनी चाहिए.
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