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श्रेष्ठ नागरिक गढ़ने का एक मात्र विकल्प है बालकों को संस्कारवान बनाना : मुजाहिद

Updated at : 10 Dec 2019 9:05 AM (IST)
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श्रेष्ठ नागरिक गढ़ने का एक मात्र विकल्प है बालकों को संस्कारवान बनाना : मुजाहिद

किशनगंज : अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम रविवार को कोचाधामन प्रखंड के नजरपुर पंचायत के शिशाबाड़ी गांव में मुख्य अतिथि जदयू विधायक मास्टर मुजाहिद आलम ने दीप प्रज्वलित कर बाल संस्कार शाला का विधिवत उद्घाटन किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुजाहिद आलम ने कहा कि वर्तमान समस्याओं का एक मुश्त समाधान तथा […]

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किशनगंज : अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम रविवार को कोचाधामन प्रखंड के नजरपुर पंचायत के शिशाबाड़ी गांव में मुख्य अतिथि जदयू विधायक मास्टर मुजाहिद आलम ने दीप प्रज्वलित कर बाल संस्कार शाला का विधिवत उद्घाटन किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुजाहिद आलम ने कहा कि वर्तमान समस्याओं का एक मुश्त समाधान तथा श्रेष्ठ नागरिक गढ़ने का एक मात्र विकल्प है बालकों को संस्कारवान बनाना.बाल संस्कार शाला इसी महती आवश्यकता को पूर्ण करता है.
शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास की इस योजना में उन्हें मानवीय मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत से परिचित करायेगा. बच्चों के माध्यम से सांस्कृतिक सामाजिक परिवर्तन सरल है. बालक एक गीली मिट्टी के सामान है जिसे किसी भी सांचे में ढाला जा सकता है. बाल संस्कार शाला संचालन के माध्यम से अनेक विभूतियों से परिपूर्ण परिवार, समाज व राष्ट्र के इस उज्जवल भविष्य को गढ़ने का गौरव हम पायेंगे.
वरिष्ठ प्रज्ञा पुत्र श्यामनंद झा ने कहा कि प्रातः जागरण से लेकर शयन तक की दिनचर्या में मानवीय मूल्यों के अभ्यास का समावेश इस पाठ में किया गया है. नियमित अभ्यास व आचरण में उतर जाने पर ये छोटे छोटे संस्कार बच्चे को महानता के राजमार्ग का अनुगामी बना देते हैं तथा उनके भीतर छिपी दिव्यता को प्रकट कर देते हैं. बालक हजार मानकों में हीरे की तरह पृथक चमकने लगता है.
खेल प्रेरक एवं मनोरंजक अभ्यास मन के साथ-साथ तन को भी पुष्ट करते हैं. वहीं सहयोग सहकार दया करुणा धैर्य अनुशासन साहस जैसे गुणों को उभरते हैं. पूर्व मुखिया अध्यक्ष दानिस इकबाल ने कहा कि हम सब जानते हैं कि हमारे व्यक्तित्व का विकास 5-7 वर्ष की उम्र तक हो जाता है, जिसे ध्यान में रखते हुए संस्कार परिपाटी का प्रचलन आरंभ से ही होना चाहिये.
उत्कृष्ट वातावरण से बच्चों के दिव्य संस्कारों का रोपड़ सहज हो जाता है बालक के बहुआयामी व्यक्तित्व के गढ़ने में माता पिता गुरु होते थे. वही समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है. गायत्री परिवार शुरू से ही समाज व व्यक्ति निर्माण के क्षेत्र में कार्य करता आ रहा है. नशा मुक्ति अभियान व वृक्षारोपण जैसे कार्य को जन जन तक क्रांति की अलख को जगाया है.
इनके द्वार किये गये कार्य को सरकार ने अपने कार्य योजना में शामिल किया है. युवा प्रकोष्ठ सौरभ कुमार ने कहा कि बाल संस्कार शाला में 70 बच्चों को संस्कार देने के साथ उसे मानव से महामानव बनाने का कार्य गायत्री परिवार के युवा करेगा. आगे भी इसकी शाखाएं अन्य पंचायत व प्रखंड स्तर तक यह अभियान चलाया जायेगा.
इस अवसर पर जिला संयोजक राकेश कुमार, भवानंद सिंह, हरिश्चंद्र सिंह, ब्रजमोहन सिंह, हरिमोहन सिंह, पंचानंद सिंह, इंदर कर्मकार, भानु लाल सिंह, राजेंद्र प्रसाद सिंह, दीपक कुमार सिंह, चन्द्रमोहन सिंह, सोहन लाल, कुसुमलाल सिंह, सीता देवी सभी गायत्री परिजन उपस्थित थे.
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