होली मनाने अपनों के बीच पहुंचने लगे लोग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Mar 2018 5:13 AM (IST)
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होली का बाजार सज गया है. लोगों ने जम कर की खरीदारी. किशनगंज : रंगों का त्योहार होली में अब मात्र एक दिन शेष बचा है. रंग, अबीर, पिचकारी, गार्मेंट्स व अन्य सामग्रियों की बिक्री के लिए बाजार सज-धज कर तैयार हो गए हैं. बाहर रहने वाले नौकरी पेशा लोगों का घर आने का सिलसिला […]
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होली का बाजार सज गया है. लोगों ने जम कर की खरीदारी.
किशनगंज : रंगों का त्योहार होली में अब मात्र एक दिन शेष बचा है. रंग, अबीर, पिचकारी, गार्मेंट्स व अन्य सामग्रियों की बिक्री के लिए बाजार सज-धज कर तैयार हो गए हैं. बाहर रहने वाले नौकरी पेशा लोगों का घर आने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है, जिससे बाजारों में चहलकदमी भी बढ़ गयी है. बाजार गरमाने के साथ-साथ प्रशासन की लापरवाही से हमेशा की तरह मिलावटखोर भी सक्रिय हो गये हैं. प्राय: हर साल रंग से लेकर खान-पान की चीजों में बड़े पैमाने पर मिलावट की जाती है, जिससे लोगों को डर सताने लगा है कि यदि प्रशासन इस बार भी नहीं चेता तो लोगों को मिलावटी चीजों की बदौलत ही होली मनानी पड़ेगी.
रंग भी उड़ा सकता है चेहरे का नूर
मिलावटी रंग भी चेहरे का नूर उड़ा सकता है. होली के लिए जितने प्रकार के रंग बाजार में मौजूद हैं, उनमें से अधिकतर में रसायन मिले होते हैं, जो त्वचा के लिए नुकसानदायक होते हैं. इसके साथ-साथ अधिकतर गुलालों में भी हानिकारक रसायन, अरारोट व मैदा मिले रहने की शिकायतें मिल रही है. लाल व हरे गुलाल में तो इसकी मात्रा ज्यादा पाई जाती है, जिसके ज्यादा प्रयोग से त्वचा फटने का खतरा रहता है. इससे एलर्जी की समस्या भी आ सकती है. हाल के दिनों में स्प्रे का रिवाज भी बढ़ गया है. कई युवा होली में रंग डालने के लिए स्प्रे का इस्तेमाल करते हैं, जो आंखों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है.
प्राकृतिक रंगों से खेलें होली
आजकल केमिकल युक्त रंगों का प्रचलन बढ़ गया है, जिससे त्वचा सहित आंख को भी हानि पहुंचने का खतरा रहता है. प्राकृतिक रंगों में पलाश के फूलों से बनाए गए रंग का शरीर पर स्पर्श मात्र से ही हानिकारक तत्वों का शमन होता है. इससे मन में उमंग की उत्पत्ति होती है. इसलिए प्राकृतिक रंगों से होली को हसीन बनाना चाहिए. प्राकृतिक रंगों में सर्वाधिक बेहतर पलाश के फूल से निर्मित रंग होता है. होली आने से पूर्व ही टेसू अर्थात पलाश के पेड़ फूलों से लद जाते हैं, साथ ही रंग के रूप में अपने गुणकारी प्रभाव के साथ लोगों को होली खेलने का संदेश देने लगते हैं.
कहते हैं स्कीन विशेषज्ञ
एमजीएम मेडिकल कालेज के स्कीन विशेषज्ञ ड\\ इच्छित भारत कहते हैं कि केमिकल युक्त रंग स्वास्थ्य एवं त्वचा दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं और चर्म रोग में वृद्धि होती है. इससे लोगों को बचना चाहिए.
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