अनदेखी: भगवान भरोसे चल रहा गोगरी अनुमंडल अस्पताल, मरीज परेशान

एक तरह जहां सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ गोगरी अनुमंडल अस्पताल बिना ड्रेसर, कंपाउंडर और ओटी असिस्टेंट के ही संचालित हो रहा है
-बिना ड्रेसर,कंपाउंडर व ओटी असिस्टेंट के ही
-50 जीएनएम की जगह मात्र 7 नर्स कर रहे काम, एक एंबुलेंस के भरोसे हजारों की आबादीगोगरी
एक तरह जहां सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ गोगरी अनुमंडल अस्पताल बिना ड्रेसर, कंपाउंडर और ओटी असिस्टेंट के ही संचालित हो रहा है. इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को सुविधा के अभाव में काफी परेशानी हो रही है. यहां कई महत्वपूर्ण बीमारियों के चिकित्सक भी नहीं है. मरीज निजी अस्पताल में इलाज कराते हैं. ऐसे में भगवान भरोसे अस्पताल चल रहा है. बताया जाता है कि दो वर्ष पूर्व अनुमंडल अस्पताल का उदघाटन किया गया. आज तक भी अस्पताल अपने दयनीय हालत पर आसू बहा रहा है. अस्पताल में 50 जीएनएम की जगह मात्र सात नर्स ही पदस्थापित हैं. जबकि आंख और इएनटी विशेषज्ञ भी नहीं है. अस्पताल में उपाधीक्षक का पद भी रिक्त पड़ा है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के सहारे अस्पताल का संचालन किया जा रहा है.एक महिला चिकित्सक के सहारे हैं मरीजों की बढ़ रही संख्या
अनुमंडल क्षेत्र के गोगरी, परबत्ता के सैकड़ों मरीज प्रतिदिन इलाज कराने पहुंचते हैं. जिसमें महिला मरीजों की संख्या अत्यधिक होती है. महिला मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. फिर भी मात्र एक ही महिला चिकित्सक डॉ. शोभा रानी तैनात हैं. बताया जाता है कि अगर महिला चिकित्सक छुट्टी पर चली जाती है तो मरीजों का इलाज कराने में परेशानी होती है. महिला चिकित्सकों की कमी के कारण प्रसव, परिवार नियोजन के साथ ही अन्य बिमारियों का इलाज कराना उचित नहीं समझते हैं. अगर, पुरूष चिकित्सक तैनात रहते हैं, उसे शर्मिंदगी महसूस होती है, उसे महिलाएं खुलकर बोल नहीं पाती है.
अस्पताल में नहीं है अल्ट्रासाउंट की व्यवस्था
बताया जाता है कि अस्पताल में एक्सरे की व्यवस्था तो है, लेकिन प्रसव पीड़िता महिलाओं के लिए अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है. जिसके लिए गर्भवती महिलाओं को बाहर से मोटी रकम देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है. निजी अल्ट्रासाउंड में गर्भवती महिलाओं का आर्थिक दोहन होता है. अस्पताल में प्रतिदिन 250 से अधिक गर्भवती महिलाएं जांच व इलाज के लिए आते हैं.दो एंबुलेंस और एक शव वाहन उपलब्ध
एक एंबुलेंस के भरोसे हजारों की आबादी
अस्पताल में दो एंबुलेंस व एक शव वाहन है. जिसमें एक एम्बुलेंस महिनों से खराब पड़ा हुआ है. एक एम्बुलेंस से ही मरीजों को अस्पताल पहुंचाया और लाया जाता है. चिकित्सकों द्वारा इलाज के दौरान गंभीर स्थिति वाले मरीजों को सदर अस्पताल में रेफर किए जाने के बाद बड़ी मशक्कत से एंबुलेंस से भेजा जाता है. बताया जाता है कि अस्पताल के आस-पास दर्जनों निजी एंबुलेंस लगे रहते हैं. जो मरीजों से हजारों रुपये का दोहन करते है.कहते हैं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि अस्पताल में ड्रेसर, कंपाउंडर, ओटी असिस्टेंट का पद वर्षों से रिक्त पड़ा है. चिकित्सकों की अभाव में जेनरल फिजिशियन से इलाज कराया जाता है. अस्पताल में मूलभूत समस्याओं की जानकारी विभाग को दी गयी है.
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