अब हाई स्कूल व प्लस टू विद्यालयों में भी होगा ग्रेडिंग सिस्टम

Updated at : 13 Mar 2026 8:29 PM (IST)
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अब हाई स्कूल व प्लस टू विद्यालयों में भी होगा ग्रेडिंग सिस्टम

अनुमंडल क्षेत्र सहित जिले के सरकारी हाई स्कूल और प्लस टू स्कूलों में अब पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए नयी व्यवस्था लागू की जा रही है.

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वार्षिक परीक्षा के आधार पर पहुंच कैटेगरी में बांटा जाएगा ग्रेड

गोगरी. अनुमंडल क्षेत्र सहित जिले के सरकारी हाई स्कूल और प्लस टू स्कूलों में अब पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए नयी व्यवस्था लागू की जा रही है. आगामी वार्षिक परीक्षा से पहली बार इन स्कूलों में ग्रेडिंग सिस्टम लागू होगा. इसके तहत परीक्षा परिणाम के आधार पर विद्यार्थियों को पांच अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा, ताकि पढ़ाई में पिछड़ रहे छात्रों की पहचान कर उनके स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में विशेष प्रयास किए जा सके. अब तक हाई स्कूलों में विद्यार्थियों को केवल अंक और डिविजन के आधार पर परिणाम दिया जाता था, लेकिन नयी व्यवस्था में ग्रेडिंग के आधार पर छात्रों का मूल्यांकन किया जाएगा. इस प्रणाली के तहत 81 से 100 प्रतिशत अंक लाने वाले छात्रों को ए ग्रेड, 61 से 80 प्रतिशत अंक पाने वालों को बी ग्रेड, 41 से 60 प्रतिशत अंक पाने वालों को सी ग्रेड, 33 से 40 प्रतिशत अंक पाने वालों को डी ग्रेड और 0 से 32 प्रतिशत अंक लाने वालों को ई ग्रेड में रखा जाएगा.

विभाग की पहल से कमजोर बच्चे होंगे चिह्नित

शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य पढ़ाई में कमजोर बच्चों को चिन्हित कर उनके लिए अलग से पढ़ाई की व्यवस्था करना है. ए और बी ग्रेड वाले छात्रों के अलावा सी, डी और ई ग्रेड में आने वाले विद्यार्थियों के लिए स्कूलों में विशेष रिमेडियल कक्षाएं संचालित की जाएंगी. इन कक्षाओं में विषयवार कमजोरियों को दूर करने के लिए संबंधित विषय के शिक्षक विशेष रूप से पढ़ाई कराएंगे.

स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था हुई मजबूत

डीईओ अमरेंद्र कुमार गोंड ने बताया कि सरकारी स्कूलों में अब विषयवार शिक्षकों की कमी लगभग समाप्त हो चुकी है. बीपीएससी के माध्यम से बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति होने से स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था मजबूत हुई है. उन्होंने कहा कि हाई स्कूलों में अक्सर बच्चों की उपस्थिति प्राइमरी और मध्य विद्यालय की तुलना में कम रहती है. ऐसे में यह शैक्षणिक स्तर को सुधारने में मददगार साबित होगी. उन्होंने कहा कि ग्रेडिंग सिस्टम लागू होने के बाद शिक्षकों की भी जिम्मेदारी तय होगी. कमजोर छात्रों की पढ़ाई में सुधार लाने के लिए संबंधित शिक्षकों को जवाबदेह बनाया जाएगा और उनके कार्य का मूल्यांकन भी इसी आधार पर किया जाएगा.

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