परबत्ता: महाराष्ट्र में सड़क हादसे के शिकार भरसो निवासी मुकेश चौधरी की मौत, पटना में चल रहा था इलाज

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शव के समीप रोते बिलखते परिजन | Prabhat Khabar Network

भरसो गांव के मुकेश चौधरी की महाराष्ट्र में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई. परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य के चले जाने से पत्नी, छह बच्चों के सामने गहरा संकट खड़ा हो गया है.

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खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत भरसो गांव निवासी मुकेश चौधरी (पिता स्वर्गीय दरोगा चौधरी) की महाराष्ट्र में एक भीषण सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद मौत हो गई. हादसे के बाद उनका इलाज पटना में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. गुरुवार देर रात उनका शव जैसे ही पैतृक गांव भरसो पहुंचा, पूरे इलाके में मातम पसर गया और परिजनों के चीत्कार से कोहराम मच गया.

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महाराष्ट्र में हुए थे हादसे का शिकार, पटना में टूटा दम

मुकेश चौधरी अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए महाराष्ट्र में रहकर चालक (ड्राइवर) के रूप में कार्य करते थे. मिली जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में ही वे ड्यूटी के दौरान एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए. हादसे के बाद बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए उन्हें वहां से लाकर पटना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों के काफी प्रयास और सघन इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और इलाज के क्रम में ही उनकी मौत हो गई.

शव पहुंचते ही गांव का माहौल हुआ गमगीन

गुरुवार की देर रात जब मुकेश चौधरी का शव उनके पैतृक गांव भरसो लाया गया, तो वहां का दृश्य अत्यंत हृदयविदारक हो गया. घर के आंगन में शव पहुंचते ही उनकी धर्मपत्नी सहित परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया. परिजनों की चीख-पुकार और करुण क्रंदन सुनकर वहां मौजूद ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गईं. घटना के बाद से पूरे गांव का माहौल शोक में डूबा हुआ है. आस-पड़ोस के लोग शोकाकुल परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे हैं.

परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे मुकेश

मुकेश के आकस्मिक निधन से उनके परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. स्थानीय लोगों ने बताया कि मुकेश अपने पूरे परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे और उनकी कमाई से ही पूरे घर का भरण-पोषण होता था. इस असामयिक मौत के बाद उनकी पत्नी, चार बेटियां और दो छोटे बेटे पूरी तरह से बेसहारा हो गए हैं. परिवार का एकमात्र सहारा छिन जाने से अब इस बड़े परिवार के सामने रोजी-रोटी और बच्चों के भविष्य को लेकर एक गहरा संकट खड़ा हो गया है.


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पलटू झा

लेखक के बारे में

By पलटू झा

पलटू झा प्रिंट माध्यम में 11 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. परबत्ता (खगड़िया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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