खगड़िया जिले में अंचल अमीन पर मनमानी का आरोप, बिना सूचना जमीन मापी कराने की शिकायत

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खगड़िया जिले में अंचल अमीन पर मनमानी का आरोप

Land Survey Controversy: जमीन मापी को लेकर नया विवाद, ग्रामीण ने कहा- नोटिस दिए बिना कराई जा रही प्रक्रिया

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धीरज सिंह बंटू, चौथम (खगड़िया)

Land Survey Controversy: खगड़िया जिले के चौथम प्रखंड में भूमि मापी को लेकर नया विवाद सामने आया है. रुपनी गांव के एक ग्रामीण ने अंचल अमीन पर बिना पूर्व सूचना दिए जमीन मापी कराने और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है. मामले को लेकर अंचलाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपकर जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है. शिकायत के बाद क्षेत्र में भूमि मापी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

क्या है पूरा मामला

चौथम थाना क्षेत्र के रुपनी निवासी अमृत रंजन भारती ने अंचलाधिकारी को दिए आवेदन में कहा है कि उनकी जमीन की मापी 30 मई 2026 को कराए जाने की बात सामने आई, जबकि उन्हें इस संबंध में कोई पूर्व सूचना या नोटिस नहीं दिया गया था.

आवेदक के अनुसार भूमि मापी से जुड़ा आवेदन 22 मई 2026 को अंचल कार्यालय में दिया गया था. इसके बावजूद नियमानुसार सूचना देने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. उनका कहना है कि भूमि विवाद से जुड़े मामलों में सभी संबंधित पक्षों को पहले सूचित करना आवश्यक होता है ताकि मापी के दौरान किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो.

निजी अमीन से मापी कराने का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि अंचल अमीन स्वयं मापी कार्य में उपस्थित नहीं रहती हैं और निजी अमीन के माध्यम से मापी कराई जाती है. उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में सरकारी प्रक्रिया का पालन नहीं होने से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है.

अमृत रंजन भारती का कहना है कि सरकारी भूमि मापी की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए. यदि सभी पक्षों को समय पर सूचना नहीं दी जाती है तो भविष्य में भूमि विवाद और अधिक बढ़ सकते हैं.

निष्पक्ष जांच की मांग

आवेदक ने अंचलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराने तथा भूमि मापी की प्रक्रिया को नियमानुसार संचालित करने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि सभी पक्षों को विधिवत सूचना देकर ही मापी कराई जाए ताकि किसी प्रकार की विवादित स्थिति उत्पन्न न हो.

वहीं समाचार लिखे जाने तक अंचल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी. अब स्थानीय लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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प्रत्युष प्रशांत

लेखक के बारे में

By प्रत्युष प्रशांत

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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