कारगिल युद्ध के वीर योद्धा नायक परमानंद सिंह का निधन, आज अगुवानी घाट पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ होगा अंतिम संस्कार

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कारगिल युद्ध के वीर योद्धा नायक परमानंद सिंह का निधन, आज अगुवानी घाट पर ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ होगा अंतिम संस्कार

कारगिल योद्धा नायक परमानंद सिंह

खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड अंतर्गत गांधीनगर पसराहा निवासी और कारगिल युद्ध के पराक्रमी योद्धा पूर्व नायक परमानंद सिंह का निधन हो गया है. वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उन्होंने लखनऊ के कमांड अस्पताल में अंतिम सांस ली. बुधवार को अगुवानी घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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परबत्ता से पलटु झा की रिपोर्ट:

कमांड हॉस्पिटल लखनऊ में ली अंतिम सांस, क्षेत्र में शोक की लहर

भारतीय सेना के जांबाज सिपाही रहे नायक परमानंद सिंह के निधन की खबर मिलते ही पूरे खगड़िया जिले और परबत्ता क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है. परिजनों, स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों ने उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर गहरी संवेदना व्यक्त की. सेना के डॉक्टरों की देखरेख में लखनऊ स्थित सैन्य कमांड अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली.

कारगिल युद्ध में दुश्मनों को चखाया था मजा, देशभक्ति का थे प्रतीक

नायक परमानंद सिंह ने भारतीय सेना में अपनी सेवा के दौरान कर्तव्यनिष्ठा की अनूठी मिसाल पेश की थी. साल 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर रहकर अदम्य साहस और बहादुरी के साथ दुश्मनों का डटकर सामना किया था. मातृभूमि की रक्षा के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्ष को याद करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि उनका पूरा जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और प्रेरणा का जीवंत प्रतीक रहेगा.

बेटे और भाइयों ने भी निभाई देश सेवा की परंपरा

स्वर्गीय परमानंद सिंह अपने पीछे देश सेवा के संस्कारों से ओत-प्रोत एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. उनके बड़े पुत्र राजीव रंजन भी पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि उनके दूसरे पुत्र धीरज कुमार एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं.

शोक व्यक्त करते हुए उनके छोटे भाई और सेना के सेवानिवृत्त सूबेदार धनिक लाल सिंह ने कहा कि उनके परिवार के रग-रग में देशभक्ति है और वे हमेशा देश की रक्षा को सर्वोपरि मानते आए हैं. वहीं उनके बड़े भाई अधिक लाल सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि परमानंद सिंह को अपनी मातृभूमि से अगाध प्रेम था और उन्होंने जीवन का हर क्षण सेना को समर्पित कर दिया.

अगुवानी घाट पर उमड़ेगी भारी भीड़, सेना देगी अंतिम सलामी

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को उनके पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक खगड़िया के सुप्रसिद्ध अगुवानी घाट लाया जाएगा. यहाँ भारतीय सेना की टुकड़ी द्वारा उन्हें पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (सलामी) दिया जाएगा. इस महान राष्ट्रभक्त के अंतिम दर्शन और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जिले के कई गणमान्य व्यक्तियों, प्रशासनिक अधिकारियों और हजारों आम लोगों के अगुवानी घाट पहुंचने की संभावना है.

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दिव्यांशु प्रशांत

लेखक के बारे में

By दिव्यांशु प्रशांत

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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