गंगा कटाव के कहर से आधे दर्जन से अधिक पंचायतों के 70 हजार आबादी पर मंडरा रहा खतरा

Updated at : 25 Mar 2026 8:50 PM (IST)
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गंगा कटाव के कहर से आधे दर्जन से अधिक पंचायतों के 70 हजार आबादी पर मंडरा रहा खतरा

गंगा कटाव के कहर से आधे दर्जन से अधिक पंचायतों के 70 हजार आबादी पर मंडरा रहा खतरा

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वर्ष 2018 में सरकार द्वारा लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये की लागत से कटाव रोकने के लिए कार्य कराया गया

गंगा कटाव के कारण हजारों लोग हो जायेंगे बेघर, डीएम को सौंपा ज्ञापन

खगड़िया. दियारा क्षेत्र में लगातार गंगा कटाव जारी है. सैकड़ों एकड़ जमीन गंगा की भेंट चढ़ गयी है. खगड़िया, बेगूसराय और मुंगेर जिले के सीमावर्ती दियारा क्षेत्रों में गंगा नदी का कटाव लगातार विकराल रूप धारण करता जा रहा है. कटाव के कारण लगभग 70 हजार की आबादी पर खतरा मंडरा रहा है. लगभग 20 से 25 हजार एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि भी धीरे-धीरे गंगा में विलीन होने की कगार पर है. यह केवल जमीन का नुकसान नहीं बल्कि हजारों परिवारों के जीवन, आजीविका और अस्तित्व का संकट है. खगड़िया जिले के दक्षिणी रहीमपुर, मध्य रहीमपुर व उत्तरी रहीमपुर पंचायत, बेगूसराय जिले के रघुनाथपुर बरारी पंचायत तथा मुंगेर जिले के टीकारामपुर पंचायत अत्यधिक प्रभावित हो रहा है. उपरोक्त पंचायतों के लोगों का जीवन आज अनिश्चितता के साये में गुजर रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि हर साल बाढ़ और कटाव के डर के बीच जीना उनकी मजबूरी बन गयी है.

डीएम को जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने समस्याओं से कराया अवगत

दियारा इलाके की भयावह स्थिति को लेकर बुधवार को कटाव प्रभावित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों का एक शिष्टमंडल जिलाधिकारी से मिलकर समस्याओं से अवगत कराया. अविलंब ठोस एवं स्थायी समाधान की मांग की. शिष्टमंडल में शामिल जनप्रतिनिधियों ने कहा कि वर्ष 2018 में सरकार द्वारा लगभग 70 से 80 करोड़ रुपये की लागत से कटाव रोकने के लिए कार्य कराया गया था. उस समय यह पहल क्षेत्र के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आयी थी. हालांकि, विभागीय लापरवाही, निगरानी की कमी और कुछ असामाजिक तत्वों की संवेदनहीनता के कारण यह योजना स्थायी समाधान नहीं बन सकी. इसके बावजूद उसी प्रयास का परिणाम है कि आज तक कई पंचायतें पूरी तरह से समाप्त होने से बची हुई हैं. डीएम को बताया गया कि इस क्षेत्र में सरकार द्वारा निर्मित कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियां जैसे प्राथमिक, मध्य एवं इंटर स्तरीय विद्यालय, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी केंद्र और शुद्ध पेयजल की टंकियां भी कटाव की जद में आ चुकी है. यदि शीघ्र उपाय नहीं किए गए तो ये सभी संरचनाएं गंगा में समा जायेगी. जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि इस समस्या को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा. संबंधित विभागों से समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि प्रशासन इस मुद्दे की गंभीरता को समझता है. हर संभव प्रयास किया जायेगा. ताकि लोगों की सुरक्षा और उनके जीवन-यापन को बचाया जा सके.

समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो हजारों लोग हो जायेंगे बेघर

शिष्टमंडल के सदस्यों ने कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो हजारों परिवारों का भविष्य अंधकारमय हो जायेगा. गंगा कटाव केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि एक सामाजिक और मानवीय संकट बन चुका है. शिष्टमंडल में सामाजिक कार्यकर्ता इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, नागेंद्र सिंह त्यागी, पूर्व जिला परिषद सदस्य कृष्ण कुमार, जितेंद्र यादव, पैक्स अध्यक्ष संजय यादव, पूर्व मुखिया मक्खन साह, प्रद्युमन सिंह, सुमित चौधरी, मुकेश यादव, राजद नेता मौसम कुमार गोलू, अरुण यादव, मनोज यादव, उमेश यादव, आमोद यादव, घनश्याम कुमार, नागेश्वर यादव, रमाकांत दास, विजय कुमार, राकेश पासवान शास्त्री, बबलू यादव, संजय यादव, वीर प्रकाश यादव, सदानंद यादव आदि मौजूद थे.

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