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अगुवानी-सुल्तानगंज महासेतु निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार

अगुवानी-सुल्तानगंज महासेतु निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ्तार

फरडैम तकनीक से शुरू हुआ पिलर का काम, पानी निकालने के लिए युद्ध स्तर पर जारी है डी-वाटरिंग

खगड़िया. उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना अगुवानी-सुल्तानगंज गंगा फोरलेन पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का पुनर्निर्माण कार्य एक बार फिर जोर-शोर से शुरू हो गया है. वर्तमान में पिलर संख्या 10 से 12 के बीच फरडैम तकनीक के जरिए पिलर निर्माण की प्रक्रिया आरंभ की गई है. इसके तहत डी-वाटरिंग का कार्य काफी तेजी से चल रहा है. निर्माण स्थल पर दो दर्जन से अधिक मजदूर और कर्मचारी पंपसेट की मदद से पिलर के भीतर जमा पानी को बाहर निकालने में जुटे हैं.

इंजीनियरों की जांच के बाद शुरू होगी ढलाई

कार्य स्थल से मिली जानकारी के अनुसार, पिलर के अंदर से पानी पूरी तरह निकलने के बाद वहां केसिंग फिट की जाएगी. इसके बाद विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम गहन जांच करेगी. टीम से हरी झंडी मिलने के उपरांत ही ढलाई का कार्य शुरू किया जाएगा. गौरतलब है कि 4 जून 2023 को पिलर संख्या 9 से 13 के बीच पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था, जिसके बाद से काम पूरी तरह ठप पड़ा था. बीते वर्ष 13 दिसंबर 2025 को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने स्थल का निरीक्षण कर निर्माण एजेंसी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन को कार्य में तेजी लाने का कड़ा निर्देश दिया था.

मई 2027 तक पुल पूरा करने का नया लक्ष्य

करीब 1710 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस महासेतु को पूर्ण करने के लिए अब मई 2027 की नयी समय-सीमा निर्धारित की गयी है. योजना के मुताबिक, वर्ष 2026 तक भागलपुर की ओर चार किलोमीटर व खगड़िया की ओर 16 किलोमीटर लंबे फोरलेन एप्रोच पथ का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जायेगा. वहीं, मई 2027 तक पुल के सुपर स्ट्रक्चर का काम हर हाल में खत्म करने का लक्ष्य है. पिलर संख्या नौ से 13 के बीच अब आइआइटी रुड़की द्वारा तैयार नये डिजाइन के आधार पर स्टील सेगमेंट के माध्यम से संरचना विकसित की जायेगी.

श्रावणी मेला व उत्तर-दक्षिण बिहार के लिए लाइफलाइन

बिहार सरकार की यह ड्रीम प्रोजेक्ट उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच की दूरी को काफी कम कर देगी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 23 फरवरी 2014 को इसका शिलान्यास किया था. इस पुल के चालू होने से प्रति वर्ष श्रावणी मेले में देवघर जाने वाले लाखों कांवरियों को बड़ी सहूलियत होगी. साथ ही, इस पुल के माध्यम से एनएच 31 और एनएच 80 के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जायेगा, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा.

बाधाओं के कारण बार-बार बढ़ती रही डेडलाइन

इस महासेतु का निर्माण कार्य कई चुनौतियों व हादसों का गवाह रहा है. शुरुआती लक्ष्य मार्च 2020 का था, लेकिन 2019 की बाढ़, फिर कोरोना लॉकडाउन और इसके बाद 2022 व 2023 में पुल के हिस्से गिरने की घटनाओं ने इसकी रफ्तार रोक दी. बार-बार डेडलाइन बदलने के बाद अब नए तकनीकी बदलावों के साथ इसे पूरा करने की कवायद तेज की गई है. निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्र के लोगों में एक बार फिर उम्मीद जगी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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