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उदासीनता: ब्रिटिश काल के डाकघर केशवनगर में एक दशक से नहीं है कर्मी

Updated at : 08 Jun 2025 10:48 PM (IST)
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उदासीनता: ब्रिटिश काल के डाकघर केशवनगर में एक दशक से नहीं है कर्मी

चौथम प्रखंड के पिपरा पंचायत के केशवनगर डाकघर का किया गया जीर्णोद्धार

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-केशव नगर स्टेट के अनुरोध पर ब्रिटिश सरकार ने 1935 ई में डाकघर का किया था स्थापना

-चौथम प्रखंड के पिपरा पंचायत के केशवनगर डाकघर का किया गया जीर्णोद्धार

-केशवनगर डाकघर में नहीं है सुविधा, चार किलोमीटर दूर चौथम पोस्टऑफिस जाना होता

धीरज कुमार सिंह/

चौथम. प्रखंड के केशव नगर गांव में ब्रिटिश सरकार ने 1935 ई में डाकघर का स्थापना किया था. लेकिन, एक दशक से डाकघर में कर्मी नहीं है. डाकघर में ना ही किसी प्रकार की सुविधाएं है. लेकिन, डाकघर का जीर्णोद्धार किया गया है. केशवनगर डाकघर संचालन नहीं होने से लोगों को परेशानी होती है. क्षेत्र के लोगों को चार किलोमीटर दूर चौथम उपडाकघर जाना होता है. पदाधिकारियों की लापरवाही की वजह से डाकघर का अस्तित्व पर खतरा है. केशवर नारायण सिंह के बंसज डॉ आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि डाकघर में कर्मी नहीं है. डाकघर में किसी प्रकार का सुविधा उपलब्ध नहीं है. डाकघर सिर्फ नाम का डाकघर रह गया है. काम चौथम डाकघर में होता है. बताया कि यह डाकघर ब्रिटिश काल में केशव नगर डाकघर के रूप में जाना जाता था, जो जिले में प्रचलित था. यहां से डाक का आदान-प्रदान चौथम और बेलदौर तक होता था. पिपरा ग्राम निवासी कारो महतो ने बताया कि इस डाकघर में तीन कमरों के साथ एक हॉल और एक हटकारा रेस्ट रूम भी था. केशव नगर डाकघर के भवन के जीर्णोद्धार के बाद बाबू केश्वर नारायण सिंह के वंशज प्रभात सिंह, जीवन कुमार सिंह, विमल कुमार सिंह, मनोज कुमार सिंह, राजीव कुमार सिंह, पंकज कुमार सिंह ने पोस्ट अधिकारियों से मांग की है कि इस डाकघर के महत्व को देखते हुए डाकघर को उपडाकघर में अपग्रेड किया जाए. क्योंकि इस डाकघर का रखरखाव भवन जमीन के साथ बिना किसी शुल्क के केशव नगर ग्रामवासी द्वारा किया जाता था.

मुंगेर जिले के गजेटियर 1960 के संस्करण में उल्लेख है केशव नगर डाकघर

डॉ आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि मुंगेर जिले के गजेटियर 1960 के संस्करण में केशव नगर डाकघर का उल्लेख है. फरकिया क्षेत्र का पहला डाकघर था जो कि बाबू केशवर नारायण सिंह तत्कालीन केशव नगर स्टेट के अनुरोध पर ब्रिटिश सरकार ने 1935 ई. में डाकघर का स्थापना किया था. इसके लिए जगह एवं भवन बाबू केशवर नारायण सिंह द्वारा उपलब्ध कराया गया. 1940 ई में बाबू केशवर नारायण सिंह के पुत्र बाबू शीतल प्रसाद सिंह, राय साहब, पीएन सिंह एवं जंग बहादुर सिंह ने भवन के रख रखा के लिए तत्कालीन ब्रिटिश डाक अधीक्षक के साथ समझौता किया था. तभी से डाकघर का रखरखाव बाबू केशवर नारायण सिंह के वंशजों द्वारा किया जा रहा है.

फरकिया में 19वीं शताब्दी में संचार विकास था चुनौतीपूर्ण

बताया जाता है कि 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में डाक व्यवस्था के प्रसार के बाद फरकिया में संचार का विकास चुनौतीपूर्ण था. क्योंकि पूरा इलाका सात नदियों से घिरा था. साथ ही बाढ़ग्रस्त एवं जंगलों से भरा था. यही कारण था कि भारत डाक व्यवस्था के विकसित होने के बाद भी यह क्षेत्र संचार व्यवस्था के मामले में अपेक्षित रहा. मुगल काल में टोडरमल ने पूरे इलाके के दुर्गम क्षेत्र मानते हुए पैमाइश किया था. इसके बाद उपयुक्त माना तथा अपने टिप्पणी में लिखा फरक. तब से इस क्षेत्र को फरकिया कहा जाने लगा.

कहते हैं ग्रामीण

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कैप्सन-मनोज कुमार सिंह.

ग्रामीण मनोज कुमार सिंह ने जिला प्रशासन से मांग किया है कि डाकघर में कर्मी की तैनाती की जाय. केशवनगर डाकघर गांव व जिले की पहचान है. इसे सुरक्षित रखना सभी का दायित्व है. भले ही आज तकनीकी क्षेत्र में डाकघर का उपयोग कम हो गया. लेकिन, अभी भी सरकारी डाक के माध्यम से ही आते हैं. लोगों को चार किलोमीटर दूर चौथम डाक लेने जाना होता है.

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कहते हैं केशवर के वंशज

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कैप्सन-डॉ. आनंद प्रताप सिंह.

केशवर नारायण सिंह के वंशज डॉ आनंद प्रताप सिंह ने बताया कि मुंगेर जिले के गजेटियर 1960 के संस्करण में केशव नगर डाकघर का उल्लेख है. फरकिया क्षेत्र का पहला डाकघर स्थापित हुआ था. फरकिया में संचार का विकास चुनौतीपूर्ण था. उस समय केशवनगर डाकघर का स्थापना किया गया था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAJKISHORE SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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