खगड़िया : पुलिस द्वारा पीड़ित सोनू कुमार के शिकायत के बावजूद प्राथमिकी दर्ज करने में चार माह का समय लगाने तथा अब तक कोई कार्रवाई नहीं किये जाने के मामले में बीते 12 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच करने को कहा था. पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सिंह ने पीड़ित के घर पहुंच कर मामले की जांच की. एसपी के जांच रिपोर्ट के बाद डीआइजी मुंगेर ने दोषी पूर्व इंस्पेक्टर सतीश चंद्र मिश्र को निलंबित कर दिया. प्राथमिकी के बावजूद वर्तमान इंस्पेक्टर की ओर से कार्रवाई नहीं किये जाने के मामले में कभी भी कार्रवाई हो सकती है.
गोगरी के शिरनियां काली स्थान निवासी कृत्यानंद झा के पुत्र सोनू कुमार झा के शिकायत के बावजूद गोगरी थानाध्यक्ष की ओर से कार्रवाई नहीं करने व सोनू के पिता को हाजत में बंद कर दस हजार रुपये घूस लेने के आरोपित इंस्पेक्टर सतीश चंद्र मिश्र को निलंबित कर दिया गया है. साथ ही प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं करनेवाले वर्तमान इंस्पेक्टर पर भी कार्रवाई की हो सकती है.
आरोपित तत्कालीन इंस्पेक्टर…
मालूम हो कि बीते 12 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लोक शिकायत केंद्र का निरीक्षण करने के दौरान सोनू की शिकायत सुनने के बाद पुलिस अधीक्षक से स्थिति स्पष्ट करने को कहा था. इस मामले में एसपी अनिल कुमार सिंह ने बीते शुक्रवार को गोगरी लोक शिकायत निवारण केंद्र पहुंच कर पीड़ित के शिकायत की जानकारी ली. साथ ही एसपी ने पीड़ित सोनू के घर पहुंच कर घटना की जानकारी ली.
क्या था मामला
सिरनियां के सोनू कुमार झा ने गोगरी के पूर्व थाना प्रभारी की ओर से किये दुर्व्यवहार की जानकारी सीएम को दी. मौके पर ही उन्होंने गोगरी डीएसपी व एसपी से कई सवाल पूछे. शिकायतकर्ता सोनू ने बताया कि गांव के ही एक व्यक्ति ने उनकी मां के साथ मारपीट की. उन्होंने दो सितंबर को गोगरी थाना में आवेदन दिया था, लेकिन प्राथमिकी दर्ज करने की जगह उलटे चार सितंबर की रात उनके पिता को ही थाना प्रभारी ने घर से उठा लिया. थाना में थाना प्रभारी ने जबरन उनके पिता से एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराया व 10 हजार रुपये रिश्वत लिया. फिर थाने से उन्हें (पिता को) जाने दिया गया.
सुनवाई के दौरान मौजूद गोगरी थाना प्रभारी व डीएसपी ने सीएम को यह जानकारी दी कि इस मामले में एफआइआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन पुलिस पदाधिकारी के जवाब से सीएम श्री कुमार संतुष्ट नहीं हुए. उन्होंने साफ शब्दों में यह सवाल पूछा कि लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी गोगरी के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया. प्राथमिकी दर्ज करने में आनाकानी करनेवाले पुलिस पदाधिकारियों के बीच इस कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है. इधर लोगों का विश्वास लोक शिकायत निवारण केंद्र के प्रति बढ़ा है.
चार माह बाद दर्ज हुआ था एफआइआर
जिला स्तर से जारी नोटिस व सीएम के इस सुनवाई होने की सूचना पर आनन-फानन में तो लगभग चार माह बाद इस मामले में दस जनवरी को आरोपितों के विरुद्ध प्राथमिकी तो दर्ज करा दी गयी.
डीआइजी ने किया निलंबित :
सीएम की ओर से जांच करने का आदेश दिये जाने के बाद पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित के घर पहुंच कर मामले की जांच की. एसपी के इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर डीआइजी ने पूर्व इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया.
गोगरी के वर्तमान इंस्पेक्टर पर भी कार्रवाई संभव
मामला : शिरनिया निवासी सोनू कुमार झा के आवेदन पर टालमटोल व घूस लेने का
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद गोगरी के पूर्व इंस्पेक्टर सतीशचंद्र मिश्र निलंबित
एसपी की अनुशंसा पर डीआइजी ने की कार्रवाई
एसपी ने पीड़ित सोनू के घर पहुंच कर की थी मामले की जांच
प्राथमिकी करने में लापरवाही बरतनेवाले पुलिस अधिकारियों
में हड़कंप
लोक शिकायत निवारण केंद्र के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने दिया था जांच का आदेश