नये साल में मिलेगी जुगाड़ से मुक्ति, बदलेगी कोसी की तस्वीर

Updated at : 03 Jan 2017 5:21 AM (IST)
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नये साल में मिलेगी जुगाड़ से मुक्ति, बदलेगी कोसी की तस्वीर

बेलदौर : नया साल का आगमन हो चुका है. कोसी के कछार पर बसे लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं. बदलाव के बहती बयार ईलाके की तस्वीर बदलने की दस्तक दे रही है तो वहीं इसके किनारे बसे विस्थापित परिवार के लिए आने वाला नया साल महज तारीख का बदलना भर रह […]

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बेलदौर : नया साल का आगमन हो चुका है. कोसी के कछार पर बसे लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं. बदलाव के बहती बयार ईलाके की तस्वीर बदलने की दस्तक दे रही है तो वहीं इसके किनारे बसे विस्थापित परिवार के लिए आने वाला नया साल महज तारीख का बदलना भर रह जायेगा. हो भी क्यों नहीं बीते एक दशक पूर्व से समस्याओं के बीच जीवन गुजार रहे लोगों के लिए अब तक न तो कोई ठोस पहल की गयी न तो इसकी कोई उम्मीद ही नजर आ रही है. राहत की आस पुरी तरह बूझ चुकी है. खानाबदोस की जिंदगी काटना विस्थापित परिवार की नियति बन गयी है. नये साल की उम्मीद बस रोटी कपड़ा मकान ही रह गयी है.

जो वक्त गुजरने के बाद लगातार टूट रहे है. वहीं बीते पांच वर्षों से प्रखंड समेत कोसी के 50 लाख की आबादी साल दर साल वैकल्पिक पथ से आवागमन करने को विवश है. कोसी का विकास एक दशक पीछे सड़क गया लेकिन विभाग के प्रधान सचिव के सख्त आदेश से डुमरी पुल मरम्मत कार्य में आयी तेजी ने लोगो में आस जगा दी है कि नया वर्ष कोसीवासियों को जुगाड़ से मुक्ति दिलाने वाला साल साबित होगा. 15 जुलाई 2017 तक डुमरी पुल के मरम्मत कार्य पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारियों ने अंतिम डेडलाईन तय कर दिया है. वहीं कार्य एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर केके रंजन ने भी उक्त अवधि तक पुल के 90 फीसदी मरम्मत कार्य पूरा कर पांव पैदल व बाइक का परिचालन बहाल करा देने का भरोसा दिया है. कार्य को अंजाम देने के लिए एजेंसी के मजदूर दिन रात लगे हुए हैं. बेल फाउंडेशन का कार्य लगभग अंतिम चरण पर है. इसके बाद कार्यों में और अधिक तेजी लाकर इसके दूसरे चरण का कार्य पूरा करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. नये साल आगमन के साथ ही चालू वित्तीय वर्ष के महज तीन माह ही शेष रह जायेंगे.

बावजूद शुद्ध पेयजल की समस्या, आधी आबादी का आवागमन संकट, किसानों के धान क्रय समेत सिंचाई, खाद बीज की समस्या, शिक्षा में लगातार हो रही गिरावट अधिकारी समेत जनप्रतिनिधियों को झकझोरती रहेंगी. आखिर बीते एक दशक से प्रखंड मुख्यालय में लाखों की लागत से निर्मित जलमिनार से शुद्ध पेयजल कबतक मयस्सर होगा, करोड़ों की लागत से बनी नहर एवं उपनहर से किसान के खेत कबतक सिचेंगे, एमडीएम एवं छात्रवृत्ति पोषाक की राशि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को कितना साकार कर पायेंगी प्रशासन के समक्ष एक यक्ष प्रश्न रहेगा. वहीं, दूसरी ओर नाविकों के लिए बीते पांच वर्षों से कामधेनु गाय बनी जुगाड़ पुल से लोगों को मुक्ति भी मिल जायेगी.

जुगाड़ के सहारे नदी पार करते लोग .
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