तमाशा बन कर रह गये बाढ़ पीड़ित, राहत में भी भेदभाव

Published at :24 Aug 2016 4:40 AM (IST)
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तमाशा बन कर रह गये बाढ़ पीड़ित, राहत में भी भेदभाव

जीएन बांध पर कुछ ऐसे रह रहे हैं बाढ़ पीड़ित. राहत देने वाला कोई नहीं, देखने जरूर अा रहे परबत्ता : प्रखंड के माधवपु, कवेला, जोरावरपुर, दरियापुर भेलवा, सियादतपुर अगुवानी, तेमथा करारी, लगार, भरसो, सौढ दक्षिणी तथा सौढ उत्तरी पंचायत के कई गांवों की स्थिति भयावह स्थिति बनी हुई है. हजारों घरों में पानी घुस […]

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जीएन बांध पर कुछ ऐसे रह रहे हैं बाढ़ पीड़ित.

राहत देने वाला कोई नहीं, देखने जरूर अा रहे
परबत्ता : प्रखंड के माधवपु, कवेला, जोरावरपुर, दरियापुर भेलवा, सियादतपुर अगुवानी, तेमथा करारी, लगार, भरसो, सौढ दक्षिणी तथा सौढ उत्तरी पंचायत के कई गांवों की स्थिति भयावह स्थिति बनी हुई है. हजारों घरों में पानी घुस जाने के कारण लोग अपने घरों को छोड़ कर पलायन करने को विवश हो गये हैं. इनमें से अधिकतर गोगरी नारायणपुर बांध पर शरण लिये हुए हैं. इतना ही नहीं इन बाढ प्रभावित लोगों के जानवरों का भी बुरा हाल है.
शिविर है, लेकिन राहत नहीं
बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रशासन द्वारा राहत शिविर खोला गया है, लेकिन इन शिविरों में राहत सामग्री नदारद है. स्थिति यह है कि मध्य विद्यालय उदयपुर में राहत शिविर में प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों को भोजन कराने के लिए सिलिंडर उपलब्ध कराया, लेकिन चूल्हा नदारद था.
किसी प्रकार गांव के लोगों से मांगकर दिन में भोजन बनाया गया. वह भी कम पड़ गया व्यवस्थापकों ने बताया कि प्रशासन का निर्देश है कि जो बाढ़ पीड़ित इन राहत शिविरों में निवास करे उन्हें ही भोजन कराना है. लेकिन पीड़ितों का कहना है कि वे अपने डूबे घरों में फंसे हुए सामान को निकालने,घर की सुरक्षा आदि के कारण लगातार शिविर में नहीं रह सकते हैं. बहरहाल मध्य विद्यालय उदयपुर के शिविर में कुल 58 पीड़ितों की संख्या गिनी गयी.जो भोजन करने के समय 100 के करीब पहुंच गयी. वहीं करीब 50 लोग भोजन का इंतजार करते रह गये.
जुगाड़ के नाव का सहारा
प्रखंड में प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को नाव उपलब्ध कराने के लाख दावे करें, लेकिन यह कहीं भी दिखायी नहीं दे रहा है. आमतौर पर लोग टिन के बने जुगाड़ या केले के थम्भ को आने जाने के लिये उपयोग करने को विवश हैं. एक सच यह भी है कि प्रखंड में जितने बड़े क्षेत्र में बाढ का प्रकोप है उसमें कोई भी व्यवस्था नाकाफी साबित होगा, लेकिन राहत शिविरों के संचालन के साथ साथ नाव संचालन के मामले में कागजी घोड़े ज्यादा दौड़ाये जा रहे हैं.
मांगकर खाने को विवश हैं 80 लोग
गंगा नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी से आयी बाढ़ के प्रकोप से बचने के लिये भागलपुर जिला के नारायणपुर प्रखंड के 80 लोग विगत तीन दिनों से अपने सामान तथा पशुओं के साथ मध्य विद्यालय थेभाय में आकर रुके हुए हैं. इस स्कूल को भी राहत शिविर घोषित किया गया है. इस शिविर के संचालन के लिये चार शिक्षकों को प्रतिनियुक्त किया गया है. लेकिन इस कागजी प्रतिनियुक्ति आदेश के अलावा कोई राहत या भोजन सामग्री उपलब्ध नहीं है.
इन प्रतिनियुक्त कर्मियों को यह जानकारी देने वाला कोई नहीं है कि दूसरे जिले के निवासी को राहत भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है या नहीं. भागलपुर जिले के फुलवरिया, गंगापुर गौरा,मोजमा तथा दुधेला दियारा गांव के रहने वाले सुरेन्द्र मंडल,डब्लू कुमार,ज्ञानी मंडल,रेखा देवी,विलास मंडल,मीरा देवी,रिंकू देवी, सलिता देवी, रीता कुमारी, झूना देवी, रविता देवी आदि ने बताया कि पिछले तीन दिनों से थेभाय गांव के लोगों से मांगकर उनका काम चल रहा है. लेकिन यह कब तक चलेगा. सरकार की तरफ से अब तक कोई देखने नहीं आया है.
दियारा इलाके से पलायन जारी
गंगा के जलस्तर में रुक रुक कर हो रही बढोतरी के कारण दियारा क्षेत्र से लोगों का पलायन जारी है. दियारा क्षेत्र में ऊंचे स्थानों पर अस्थायी निवास बनाकर रहने वाले लोग भी अब वहां से पलायन कर अपने घर के सामानों के साथ जी एन बांध के अंदर आ रहे हैं. पूर्व के वर्षों में बाढ़ में डूबने से बचे हुए स्थान भी इस बार डूब गये हैं.
जीएन बांध में कई जगह रिसाव जारी
गोगरी नारायणपुर तटबंध पर गंगा नदी के जल के दवाब के कारण कई जगहों पर रिसाव शुरू हो गया है. हालांकि जल संसाधन विभाग के इंजीनियर दिन रात इसे ठीक करने में अपनी ताकत झोंके हुए हैं. मंगलवार को भरसो तथा लगार के निकट जी एन बांध से रिसाव शुरु हो गया. पहले सड़क निर्माण विभाग के लोगों ने रोड एम्बुलेंस के माध्यम से इसे ठीक करने का प्रयास किया. विफल रहने पर जल संसाधन विभाग के लोग इसमें लगे हुए हैं. वहीं वर्ष 2013 में उदयपुर ढाला के निकट जहां बांध टूटा था वहां जल संसाधन विभाग के लोग जी एन बांध को मजबूत करने में लगे हुए हैं. इसमें दिन रात जियो बैग में मिट्टी भर कर क्रेटिंग का काम किया जा रहा है.
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