नहीं सुधर रहे हैं भगोड़े िशक्षक

Published at :21 May 2016 3:57 AM (IST)
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नहीं सुधर रहे हैं भगोड़े िशक्षक

दुखद. एमडीएम में फर्जीवाड़े का खेल जारी, अक्सर निरीक्षण के बाद भी सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के बाद महीनों तक कार्रवाई की फाइल दबे रहने के पीछे का राज सामने आ गया है. कहा जाता है कि निरीक्षण के दौरान विद्यालय में ताला लटके रहने, गुरुजी के गायब रहने, मध्याह्न भोजन में धांधली, छात्रवृत्ति, पोशाक […]

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दुखद. एमडीएम में फर्जीवाड़े का खेल जारी, अक्सर निरीक्षण के बाद भी

सरकारी स्कूलों के निरीक्षण के बाद महीनों तक कार्रवाई की फाइल दबे रहने के पीछे का राज सामने आ गया है. कहा जाता है कि निरीक्षण के दौरान विद्यालय में ताला लटके रहने, गुरुजी के गायब रहने, मध्याह्न भोजन में धांधली, छात्रवृत्ति, पोशाक सहित दूसरी योजनाओं में गड़बड़ी से बचने-बचाने का खेल किया जा रहा है. अलौली बीइओ की निगरानी के हत्थे चढ़ने के पीछे भी यही कारण बताया जाता है. सूत्रों की मानें तो रिश्वत के खेल में शिक्षा विभाग के कई अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक शामिल हैं. हालांकि जिला शिक्षा पदाधिकारी ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं.
खगड़िया : अलौली प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय दहमा में 10 फरवरी 2016 को डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान अनिल कुमार सिंह औचक निरीक्षण करने पहुंचते हैं. बिना किसी सूचना या अवकाश स्वीकृत कराये प्रधान शिक्षक समेत आठ शिक्षक-शिक्षिका को गायब देख आश्चर्य में पड़ जाते हैं. जांच की प्रक्रिया जैसे जैसे आगे बढ़ती है तो और भी गड़बड़ी सामने आती जाती हैं. पंजी की मांग करने पर अधिकारी को नहीं है का जवाब मिलता है.
पता चला कि प्रधानाध्यापक की पत्नी सहित दो रिश्तेदार इसी विद्यालय में कार्यरत हैं जो बराबर ड्यूटी से गायब रहते हैं. 18 फरवरी को जांच रिपोर्ट तैयार कर मध्य विद्यालय दहमा के प्रधानाध्यापक सज्जन पासवान से स्पष्टीकरण किया जाता है. डीपीओ श्री सिंह बताते हैं कि स्पष्टीकरण में टालमटोल वाला जवाब दिया गया. जो संतोषजनक नहीं है. लेकिन इसके बाद नियमत : ऐसे प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई होनी चाहिये लेकिन जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है.
इसके पीछे का राज आप समझ गये होंगे. इस तरह निरीक्षण में गड़बड़ी पाये जाने के बाद कार्रवाई की फाइल ठंडे बस्ते में डाले गये कई विद्यालयों की जांच रिपोर्ट सड़ रहे हैं. बताया जाता है कि निरीक्षण के बाद अवैध उगाही का बाजार सजता है. कार्रवाई की धमकी की बदौलत महीनों तक मोल-भाव होता है. जेब गरम होने के बाद कार्रवाई पर ब्रेक लग जाता है. ऐसे मामलों की लिस्ट लंबी है.
एक सौ से अधिक विद्यालयों में लटक रहा ताला
बताया जाता है कि नदी पार दूर-दराज के इलाकों में संचालित एक सौ से अधिक स्कूलों में अधिकांश दिनों में ताला लटका रहता है. कागज पर निरीक्षण का खेल जोरों पर है. भूले-बिसरे अगर कोई अधिकारी पहुंचते हैं, गड़बड़ी पकड़ी जाती है. फिर कार्रवाई की बजाय रिश्वत का खेल किया जाता है. बीते दिनों परबत्ता, अलौली, मानसी के करीब 250 स्कूलों के औचक निरीक्षण में दर्जनों विद्यालयों में ताला लटका मिला.
गायब रहने वाले शिक्षकों की संख्या 50 के पार है. छात्रवृत्ति से लेकर पोशाक राशि में फर्जीवाड़ा का मामला भी सामने आया है. मध्याह्न भोजन से लेकर परिभ्रमण तक में गोलमाल का खुलासा हुआ है. जांच रिपोर्ट कई दिनों में फाइल में धूल फांकने का मामला मीडिया में तूल पकड़ने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद खुली. डीपीओ स्थापना सुरेश कुमार साहू ने बताया कि 118 स्कूलों के प्रधान शिक्षकों से स्पष्टीकरण तलब किया गया है.
सरकारी विद्यालयों में निरीक्षण के बाद कार्रवाई रोकने के लिये शुरू होता है रिश्वत की रकम का मोल-भाव
विद्यालयों में जांच के दौरान पकड़ी गयी गड़बड़ी की गहराई के हिसाब से तय हो रही रिश्वत की रकम
निरीक्षण के बाद महीनों तक चलता है अवैध मोल-भाव का दौर, सौदा तय होते ही ठंडे बस्ते में जा रही रिपोर्ट
सौदा नहीं पटने पर महीनों बाद जारी हो रही कार्रवाई की चिठ्ठी,
शिक्षा विभाग की कार्यशैली कटघरे में
मध्य विद्यालय दहमा में प्रधानाध्यापक के स्पष्टीकरण का जवाब असंतोषजनक रहने के बाद भी दबा दी फाइल
250 विद्यालयों के निरीक्षण के एक महीना बीतने के बाद मीडिया में मामला तूल पकड़ने के बाद पूछा गया स्पष्टीकरण
अलौली के एक दर्जन से अधिक स्कूलों में अधिकांश दिनों में लटका रहता है ताला, बेखबर बना है शिक्षा विभाग
रिश्वत के मोल-भाव में पढ़ाई चौपट
हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आये हैं जो शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार की कहानी कह रहे हैं. बीते दिनों मध्य विद्यालय सोनिहार के निरीक्षण बाद तत्कालीन अलौली बीइओ भी निलंबन की कार्रवाई की धमकी देकर ही शिक्षिका से एक लाख रिश्वत रकम लेते हुए निगरानी के जाल में फंस गये हैं.
बताया जाता है कि पहले बीइओ ने प्रधान शिक्षिका साधना सिन्हा से डेढ़ लाख रुपये रिश्वत की मांग की. मोल-भाव का दौर चला तो एक लाख में सौदा तय हुआ था. सूत्रों की मानें तो विद्यालय के निरीक्षण के बाद रिश्वत का रेट सुनाया जाता है. मोल-भाव के बाद तय रकम चुकाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में वरना कार्रवाई की चिठ्ठी निकाल दी जाती है. गुरुवार को डीएम के जनता दरबार में भी एमडीएम विभाग के अधिकारी के द्वारा निरीक्षण के बाद रिश्वत के खेल की शिकायत की गयी है.
मध्य विद्यालय दहमा के निरीक्षण के दौरान निरीक्षण में कई गड़बड़ी सामने आने के बाद पूरी जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपि जिला शिक्षा पदाधिकारी सहित अन्य उच्चाधिकारियों को भेज दी गयी. प्रधानाध्यापक द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण का जवाब असंतोषजनक पाया गया. अब कार्रवाई क्यों नहीं हुई यह संबंधित अधिकारी ही बतायेंगे.
अनिल कुमार सिंह, डीपीओ सर्व शिक्षा अभियान.
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिये कई कदम उठाये जा रहे हैं. जल्द ही स्पेशल टीम बना कर सरकारी विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया जायेगा. बीते दिनों परबत्ता व अलौली के करीब 200 विद्यालयों की जांच रिपोर्ट डीइओ को सौंपने का निर्देश दिया गया है. गड़बड़ी करने वाले अधिकारी हो या गुरुजी, किसी को बख्शा नहीं जायेगा.
जय सिंह, जिलाधिकारी.
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