लापरवाही. जिला वासियों को आर्सेनिक वाला पानी पिला रहा पीएचइडी विभाग

Published at :11 Apr 2016 5:37 AM (IST)
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लापरवाही. जिला वासियों को आर्सेनिक वाला पानी पिला रहा पीएचइडी विभाग

करोड़ों खर्च, शुद्ध पानी नसीब नहीं शुद्ध पानी के लिए खगड़िया के लोग तरस रहे हैं, जिनके पास पैसा है वे वाटर प्यूरीफायर सहित दूसरे उपकरण खरीद कर शुद्ध पानी पी रहे हैं लेकिन अधिकांश आबादी को दूषित पानी ही पीना पड़ रहा है. पीएचइडी विभाग के तमाम दावे की जमीनी हकीकत यह है कि […]

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करोड़ों खर्च, शुद्ध पानी नसीब नहीं

शुद्ध पानी के लिए खगड़िया के लोग तरस रहे हैं, जिनके पास पैसा है वे वाटर प्यूरीफायर सहित दूसरे उपकरण खरीद कर शुद्ध पानी पी रहे हैं लेकिन अधिकांश आबादी को दूषित पानी ही पीना पड़ रहा है. पीएचइडी विभाग के तमाम दावे की जमीनी हकीकत यह है कि पानी टंकी तक की सफाई तक नहीं हो पायी है. गंगा के करीब होने के कारण आर्सेनिक का दंश झेल रहे खगड़िया में सरकारी राशि पानी की तरह बहाये तो गये लेकिन शुद्ध पानी से प्यास नहीं बुझ पायी.
खगड़िया : करोड़ों खर्च के बाद भी खगड़िया की अधिकांश आबादी दूषित जल पीने को विवश है. गंगा के करीब होने के कारण आर्सेनिक का दंश झेल रहे खगड़िया में सरकारी राशि पानी की तरह बहाये तो गये लेकिन शुद्ध पानी से प्यास नहीं बुझ पायी. पेट सहित विकलांग हो रहे लोगों की दशा देख कर पीएचईडी विभाग के दावे झूठे लगने लगे हैं. जनता कराह रही है लेकिन विभागीय अधिकारी आंकड़ा बनाने में व्यस्त हैं. ताकि बैठक में वाहवाही लूटी जा सके.
सप्लाई पानी ऐसा कि जानवर भी नहीं पिये : सरकारी राशि को पानी की तरह बहा कर भले ही पीएचईडी विभाग अपनी पीठ थपथपा रहा हो लेकिन जमीनी हकीकत बहुत डरावनी है. करोड़ों खर्च करने के बाद शहर व ग्रामीण इलाके में पाइप लाइन तो बिछाये गये लेकिन उससे निकलने वाले
गंदे पानी को लोग पीना तो दूर जानवर को भी देना मुनासिब नहीं समझते हैं. हर वर्ष करोड़ों खर्च करने के बाद भी खगड़िया में आर्सेनिक युक्त पानी पीकर अधिकांश आबादी की प्यार बुझ रही है. शहर में भी हालात कुछ अच्छे नहीं हैं. जगह जगह चापाकल तो गाड़े गये लेकिन उससे निकलने वाली पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है. मजबूरन लोग दूषित जल पीकर की प्यास बुझाने को विवश हैं.
आर्सेनिक वाला पानी बना रहा बीमार : गंगा के करीब वाला इलाका होने के कारण खगड़िया के जल में आर्सेनिक पाये जाते हैं. जिसका सेवन कर लोग कई बीमारियों का शिकार हो रहे हैं. दूषित पानी लोगों को पेट की बीमारी से लेकर विकलांग तक बना रही है. लेकिन मामला सामने आने के बाद पीएचईडी विभाग सहित सरकारी अमला दौरा कर लंबे चौड़े दावे कर सो जा रहे हैं. नतीजतन जिले की अधिकांश आबादी आयरन व आर्सेनिक युक्त पानी पीकर बीमार बनते जा रहे हैं.
कहां कहां है मिनी जलापूर्ति
जिले के 22 पंचायत में मिनी जलापूर्ति फिल्टर आयरण रिमूवल प्लांट संचालित है. उक्त आशय की जानकारी पीएचईडी विभाग के सहायक कार्यपालक अभियंता अली हैदर ने देते हुए बताया कि परबत्ता प्रखंड में 3, रामपुर में 1, पितौसिया में 1, मलीया में 1, समसपुर में 1, बेलदौर प्रखंड के डुमरी गांव, बलहा सकरोहर, चुकती, कासीमपुर, मेघौना, दूर्गापुर, पनसलवा, लाभ गांव, भदास, गौड़ा शक्ति सहित 22 पंचायतों में रिमुवल प्लांट संचालित है.
शुद्ध पानी के लिये खगड़िया के लोग तरस रहे हैं. जिनके पास पैसा है वह वाटर प्यूरीफायर सहित दूसरे उपकरण खरीद कर शुद्ध पानी पी रहे हैं लेकिन अधिकांश आबादी को दूषित पानी का ही सहारा है. पीएचईडी विभाग के तमाम दावे की जमीनी हकीकत यह है कि पानी टंकी तक की सफाई तक नहीं हो पायी है.
आर्सेनिक युक्त पानी पीकर लोग विकलांग होने के साथ कई बीमारी का शिकार हो रहे हैं लेकिन सरकारी अमला झूठे दावे कर खुद की पीठ थपथपा रहा है. स्थिति यह है कि शहर में जगह जगह चापाकल तो गाड़े गये लेकिन उससे निकलने पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है. करोड़ों खर्च शहर में पीएचईडी विभाग वाले पानी इतनी दूषित है कि पीना तो दूर जानवर को नहला भी नहीं सकते हैं.
खास बातें
चापाकल गाड़ने भर रहा पीएचईडी विभाग का काम, घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना अधर में
शहर में भी जगह जगह चापाकल गाड़े तो लेकिन इससे निकलने वाले पानी की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं
लोगों को शुद्ध पेयजल पिलाने में पानी पानी हुआ पीएचईडी विभाग, कागज पर दौड़ रही विभाग की गाड़ी
पीएचईडी के पाइप सप्लाई से निकलने वाला पानी जानवरों के पीने लायक भी नहीं, झूठे हैं विभाग दावे
करोड़ों खर्च करने के बाद भी आम जनता के हलक तक नहीं पहुंचा शुद्ध सरकारी पानी
जिले के 22 शुद्ध पेयजल आपूर्ति प्लांट मेंटेनेंस के बगैर खराब, पानी टंकी की सफाई तक की फुरसत नहीं
सात नदियों से घिरे जिला रहने के बाद भी खगड़िया शहर में पांच करोड़ तक पहुंचा पानी का कारोबार
कई गांवों में लोग हो रहे विकलांग, कागजी खानापूर्ति कर सो जा रहा पीएचईडी विभाग
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