गोरखधंधा. प्राथमिक विद्यालय बलुआही में चल रहा खेल

Published at :20 Mar 2016 6:19 AM (IST)
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गोरखधंधा. प्राथमिक विद्यालय बलुआही में चल रहा खेल

शिक्षकों के प्रतिनियोजन के लिए लगती है बोली शिक्षा विभाग के अधिकारी व विद्यालय के प्रधानाध्यापक की मिलीभगत से प्राथमिक विद्यालय बलुआही में प्रतिनियोजन के लिये नजराना की बोली लगती है. जितनी मोटी थैली होगी उतनी जल्दी प्रतिनियोजन हो जाने की तर्ज पर चल रहे इस गोरखधंधे की कमाई से कई अधिकारी व कर्मचारी लाल […]

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शिक्षकों के प्रतिनियोजन के लिए लगती है बोली

शिक्षा विभाग के अधिकारी व विद्यालय के प्रधानाध्यापक की मिलीभगत से प्राथमिक विद्यालय बलुआही में प्रतिनियोजन के लिये नजराना की बोली लगती है. जितनी मोटी थैली होगी उतनी जल्दी प्रतिनियोजन हो जाने की तर्ज पर चल रहे इस गोरखधंधे की कमाई से कई अधिकारी व कर्मचारी लाल हो गये हैं.
खगड़िया : शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सरकारी नियम कायदे से कोई लेना देना नहीं हैं. प्रतिनियोजन के अवैध कारोबार में डूबे शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि स्कूल का ताला खुलता है या नहीं. कहा जाता है कि नजराना की बदौलत शिक्षा विभाग में अधिकांश अवैध काम करवाये जा सकते हैं. चाहे फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी का खेल हो या फिर प्रतिनियोजन करवा कर घर बैठे ड‍्यूटी कर मजे से वेतन उठाने का मामला.
फर्जी हाजिरी की बदौलत मध्याह‍्न भोजन में गोलमाल कर सरकार को प्रत्येक माह लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है. बताया जाता है कि प्रतिनियोजन बाद विद्यालय से गैर हाजिर रहने के लिये प्रत्येक महीने मोटी रकम अधिकारियों को चढावा देकर मजे से वेतन निकासी कर लिया जाता है. इधर, सरकारी विद्यालयों में फर्जी हाजिरी की बदौलत मध्याह‍्न भोजन में फर्जीवाड़ा कर हर महीने लाखों रुपये जेब में जा रहे हैं.
प्रतिनियोजन के खेल के सहारे कई विद्यालयों में घर बैठे ड‍्यूटी कर सरकार को हर माह लाखों का चूना लगाया जा रहा है. इसका खुलासा शुक्रवार को एसडीओ द्वारा प्राथमिक विद्यालय बलुआही में हुआ है. एमडीएम से लेकर पठन-पाठन में घोर लापरवाही सामने आने के बाद अब प्राथमिकी सहित अन्य कार्रवाई से बचने के लिये अधिकारियों के यहां दौड़ लगाने का दौर शुरू हो गया है.
प्रतिनियोजन करवाना है,
कितना लेकर आये हो…: शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के निर्देशानुसार कुछ मामलों को छोड़कर शिक्षकों के प्रतिनियोजन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी है. लेकिन खगड़िया में प्रधान सचिव के पत्र को रद‍्दी की टोकड़ी में डाल कर पिछले दरवाजे से मनपसंद विद्यालयों में शिक्षकों का प्रतिनियोजन किया जा रहा है.
नियमत: शिक्षकों के किसी भी प्रकार के प्रतिनियोजन के लिये डीपीओ स्थापना की राय लेना जरूरी है. लेकिन खगड़िया में ये सारे नियम कोई मायने नहीं रखते हैं. प्राथमिक विद्यालय बलुआही में मात्र 60 बच्चे नामांकित हैं. लेकिन यहां पर पहले से तीन शिक्षक पदस्थापित रहने के बाद भी पांच शिक्षिकाओं का प्रतिनियोजन इस विद्यालय में कर दिया गया. इसका खुलासा एसडीओ के निरीक्षण के दौरान हुआ. बताया जाता है
कि प्रतिनियोजन के खेल में कराहने वाले एक प्राथमिक विद्यालय बलुआही नहीं. ऐसे दर्जनों विद्यालय हैं जहां छात्रों-शिक्षक अनुपात से ज्यादा शिक्षकों का प्रतिनियोजन करके विभाग की आंखों में धूल झोंका गया है. स्थिति यह है कि एक शिक्षक को तीन-तीन विद्यालयों का भार दे दिया जाता है. सूत्रों की मानें तो प्रतिनियोजन के इस खेल में बड़े पैमाने पर पैसों की उगाही किये जाने की आशंका है.
इतना ही नहीं प्रतिनियोजन बाद शिक्षकों को विद्यालय से गैरहाजिर रह कर वेतन उठाने के लिये भी खेल किये जाने की संभावना है. स्कूल के प्रधानाध्यापक की मिलीभगत से एक सादा आवेदन विद्यालय में रख कर नजराना के बल पर विद्यालय से गायब रहने की कोई रिपोर्ट नहीं की जाती है.
एक वर्ष से जारी था एमडीएम में गोलमाल का खेल
खास बातें
बिना प्रधानाध्यापक व शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से प्रतिनियोजित शिक्षकों की घर बैठे हो रही ड‍्यूटी
अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिये किये जाते हैं तरह-तरह के तिकड़म, पैसे का होता है खेल
आखिर 60 बच्चों वाले प्राथमिक विद्यालय बलुआही में आठ शिक्षकों की तैनाती के पीछे क्या है राज
निरीक्षण के दौरान एक वर्ष एमडीएम बंद होने का खुलासा, लेकिन हर महीने जेब में जा रही सरकारी राशि
एसडीओ व एसडीपीओ के निरीक्षण के दौरान खुली शिक्षक व शिक्षा विभाग के अधिकारियों की पोल
एक साल से एमडीएम बंद पर सरकारी फाइल में चालू
मध्याह्न भोजन कार्यालय के समीप स्थित प्राथमिक विद्यालय बलुआही में एक वर्ष से एमडीएम बंद था लेकिन सरकारी फाइलों में हर महीने फर्जी उपस्थिति के सहारे सरकारी राशि की निकासी कर जेब भरी जा रही थी. सूत्रों की मानें तो एमडीएम कार्यालय की रिपोर्ट में इस विद्यालय में एमडीएम का संचालन हर महीने दिखाया गया है. जिसके आधार पर लाखों की राशि का भुगतान कर दिया गया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस विद्यालय की जांच में सच को क्यों छुपाया गया? एमडीएम संचालन बंद रहने के बाद वरीय अधिकारियों को क्यों नहीं सूचना दी गयी? सूत्रों की मानें तो हर महीने नजराना की बदौलत बिल पास कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया जाता है.
जल्द ही रद्द होगा प्रतिनियोजन
जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ ब्रज किशोर सिंह ने कहा कि विभिन्न विद्यालयों में प्रतिनियोजित शिक्षकों की सूची सौंपने का निर्देश सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया है. जल्द ही प्रतिनियोजन रद कर सभी शिक्षकों को मूल विद्यालय में भेजने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. प्रतिनियोजन सहित दूसरे कार्यों में अवैध उगाही के आरोप सरासर बेबुनियाद हैं. एमडीएम सहित अन्य गड़बड़ी के बारे रिपोर्ट मंगाया जा रहा है. जिसके आधार पर राशि वसूली की प्रक्रिया अपनायी जायेगी.
खास बातें
एमडीएम कार्यालय की जांच रिपोर्ट में प्राथमिक विद्यालय बलुआही में एमडीएम संचालन सुचारू रुप से होने का दावा
हर महीने कागज पर बच्चों को एमडीएम वितरण दिखाकर लाखों रुपये फर्जी निकासी
शिक्षा विभाग के अधिकारियों खासकर एमडीएम विभाग की जांच में क्यों नहीं दिखी स्कूल की गड़बड़ी
विद्यालय में 60 बच्चों के एवज में तीन शिक्षक पहले से रहने के बाद भी पांच और शिक्षिकाओं के प्रतिनियोजन की कोई जरूरत नहीं थी. लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सारे नियम कायदे को ताक पर रख कर प्रतिनियोजन कर दिया. निरीक्षण के दौरान प्रतिनियोजित चार शिक्षिकाएं व दो पदस्थापित शिक्षक गायब मिले.
इतना हीं नहीं बिना बच्चे के ही स्कूल चल रहा था. पूरे खेल में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के भूमिका संदेह के घेरे में है. ऐसे लापरवाही के लिये शिक्षा विभाग के अधिकारी भी काफी हद तक जिम्मेवार हैं. पूरी रिपोर्ट डीएम को सौंप कर प्राथमिकी सहित अन्य कार्रवाई की अनुशंसा की जा रही है.
शिव कुमार शैव,डीपीओ स्थापना
प्रतिनियोजन पर रोक लगाने सहित पूर्व से प्रतिनियोजित शिक्षकों को मूल विद्यालय में वापस भेजने के लिये कई बार जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेजा गया लेकिन कोई असर नहीं पड़ा है. कई मामलों में तो प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी द्वारा शिक्षकों को मनपंसद विद्यालय में प्रतिनियोजन कर दिया जाता है. जबकि शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव ने पहले ही प्रतिनियोजन पर रोक लगा दिया है. फिर भी जिले में धड़ल्ले से प्रतिनियोजन का खेल किया जा रहा है
सुरेश कुमार साहू,सदर एसडीओ
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