बच्चों के काम नहीं आ रहा खेल का मैदान

Published at :18 Jan 2016 10:09 PM (IST)
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बच्चों के काम नहीं आ रहा खेल का मैदान

बच्चों के काम नहीं आ रहा खेल का मैदान फोटो है 2 मेंकैप्सन- खेल मैदान में गड़ा बांस बल्ला (फाइल फोटो)प्रतिनिधि, खगड़ियाखेलकूद से बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास होता है. इसी धारणा को ले सरकार द्वारा भी स्कूलों में विभिन्न तरह के खेलकूद का आयोजन किया जाता है. लेकिन जिले के कई विद्यालय आज […]

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बच्चों के काम नहीं आ रहा खेल का मैदान फोटो है 2 मेंकैप्सन- खेल मैदान में गड़ा बांस बल्ला (फाइल फोटो)प्रतिनिधि, खगड़ियाखेलकूद से बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास होता है. इसी धारणा को ले सरकार द्वारा भी स्कूलों में विभिन्न तरह के खेलकूद का आयोजन किया जाता है. लेकिन जिले के कई विद्यालय आज भी मैदान विहीन बने हुए हैं. जिस विद्यालय को मैदान है भी तो वह रखरखाव के अभाव में बेकार ही बना है. शहर की परिकल्पना के साथ ही जेहन में सभी तरह की सुविधाएं आती हैं. सड़क, पानी, बिजली, नाला आदि के अलावा शहरों में बच्चों के खेलने के लिए मैदान, पार्क बने होते हैं. इन्हीं मैदान व पार्क में बच्चे खेलते हैं. स्मार्ट सिटी में तो बच्चों के खेलने-कूदने की व्यवस्था भी स्मार्ट ही होती है. लेकिन अपने शहर में ऐसा कुछ भी नहीं. बच्चों के खेलने-कूदने के नाम पर बस शहर में चिल्ड्रेन पार्क व गांधी पार्क है. जिसकी भी सूरत-सीरत अच्छी नहीं. पार्क का आलम यह है कि यह बच्चों के खेलने के लिए कम माल-मवेशी के चरने के लिए ज्यादा उपयुक्त बना हुआ है. वहीं शहर में खेलने के लिए तो कई मैदान हैं. लेकिन समुचित व्यवस्था किसी में नहीं की गयी है. जेएनकेटी स्टेडियम की बात करें तो बारिश के मौसम में मैदान में घूटने भर से अधिक पानी भर जाता है. वहीं बाजार समिति मैदान में एसएफसी के गोदाम बन जाने से वहां भी युवाओं को खेलने में कठिनाई हो रही है. मैदान का आकार भी दिनों दिन सिकुड़ता जा रहा है. वहीं अक्सर मैदान में पानी लगा रहता है. कुल मिला कर कहा जा सकता है कि शहर में एक भी ऐसा स्टेडियम नहीं है. जहां से खिलाडि़यों के प्रतिभा को निखारा जा सके. और वे बेहतर अभ्यास से राज्य से लेकर देश का नाम रोशन कर सके. खिलाडि़यों ने किया था विरोधजेएनकेटी के मैदान में लगने वाले नियोजन मेला, कृषि मेला, सत्संग, नेताओं की रैली को लेकर बीते दिनों कई खिलाडि़यों ने इसका विरोध किया था. खिलाड़ी पवन कुमार, संतोष, जितेंद्र , इंद्रजीत, मुकेश, चंदन, राजीव, किशन आदि ने बताया कि जब से जेएनकेटी स्टेडियम का निर्माण कराया गया. उसके बाद से जिले में होने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम इसी मैदान में आयोजित किये जाते हैं. इस कारण स्टेडियम का मैदान गंदा हो जाता है. खिलाड़ियों ने बताया कि बांस बल्ले के गाड़ने-उखाड़ने के कारण मैदान उबड़-खाबड़ हो गयी है. इससे प्राय: खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा बना रहता है. अगर इस प्रकार के कार्यक्रम को नहीं रोका गया, तो खिलाड़ी आंदोलन को बाध्य होंगे.

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