जमीन का ब्योरा अपलोड करने की गति धीमी

Published at :16 Jan 2016 8:37 AM (IST)
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जमीन का ब्योरा अपलोड करने की गति धीमी

खगड़िया : भू अभिलेख कंप्यूटराइजेशन किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण एवं उपयोगी कार्यक्रम है. जिले में तीन वर्षों से अधिक समय से किसानों के जमीन के ब्योरा का कंप्यूटर पर अपलोड करने का कार्य किया जा रहा है. लेकिन अब तक जो प्रगति सामने आयी है वह निराशाजनक है. जिले में भू अभिलेख कंप्यूटर का […]

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खगड़िया : भू अभिलेख कंप्यूटराइजेशन किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण एवं उपयोगी कार्यक्रम है. जिले में तीन वर्षों से अधिक समय से किसानों के जमीन के ब्योरा का कंप्यूटर पर अपलोड करने का कार्य किया जा रहा है. लेकिन अब तक जो प्रगति सामने आयी है वह निराशाजनक है.
जिले में भू अभिलेख कंप्यूटर का प्रतिशत मात्र 46 है. यानी आधे से भी कम कार्य हुए हैं. यह कार्य वर्ष 2012 में ही आरंभ किये गये थे. तीन वर्ष से अधिक समय बीते चुके हैं. लेकिन कार्य आधे से भी कम हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार जिले के 305 राजस्व ग्राम में जमाबंदी रैयतों के जमीन के ब्योरे को कंप्यूटर पर अपलोड किया जाना है. अगर कार्य पूर्ण होने की बात की जाये तो 305 के विरुद्ध मात्र 14 राजस्व ग्राम में ही किसानों द्वारा दिये गये ब्योरे को पूर्ण रूपेण कंप्यूटराइज्ड किया गया है. हैरानी की बात तो यह है कि अलौली, बेलदौर तथा सबसे छोटे अंचल मानसी में तो एक भी राजस्व ग्राम में डाटा इंट्री का कार्य पूरा नहीं हो पाया है.
कहां हुआ कि कितना कार्य : चौथम अंचल की स्थिति अन्य अंचलों से अच्छी है. इस अंचल में 71.46 प्रतिशत खेसरा को कंप्यूटर पर अपलोड किया जा चुका है. जबकि परबत्ता अंचल में 46.80 प्रतिशत, गोगरी अंचल में 39.52 , बेलदौर अंचल में 39, मानसी अंचल में 38, सदर अंचल में लगभग 35 प्रतिशत खेसरा का इंट्री हुआ है. बताते चले कि जिले के 305 राजस्व ग्राम में जमावंदी रैयतों की संख्या 4 लाख 64 हजार 590 है. जिसमें कुल खेसरा की संख्या 2 लाख 96 हजार 814 हैं. जिसके विरुद्ध एक लाख 38 हजार 922 खेसरा का डाटा इंट्री हुआ है.
काफी उपयोगी है कार्यक्रम : भू अभिलेख का कंप्यूटराइजेशन कार्य किसानों के लिए काफी उपयोगी है. अगर किसानों के जमीन के ब्योरे को कंप्यूटर पर अपलोड कर दिये जाते हैं. तो किसानों को जमीन संबंधी जानकारी के लिए चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. घर बैठे बैठे किसान इंटरनेट के जरिये मोबाइल एवं कंप्यूटर पर जमीन की जानकारी ले सकेंगे. किसानों के जमीन भी सुरक्षित हो जायेंगे. क्योंकि कंप्यूटर पर ब्योरे अपलोड हो जाने से फर्जीवाड़ा भी समाप्त हो जायेगा.
किसान व कर्मी है उदासीन : भू अभिलेख कंप्यूटराइजेशन की धीमी गति के लिए किसान तथा राजस्व कर्मचारी दोनों ही जिम्मेदार है. क्योंकि शत प्रतिशत किसानों के द्वारा प्रपत्र दो में जमीन के ब्योरे से संबंधित प्रतिवेदन नहीं जमा किया जा रहा है. वहीं दूसरी ओर राजस्व कर्मचारी भी सभी किसानों से प्रपत्र दो स्व घोषणा पत्र लेने में नाकाम रहे हैं. जिस कारण भू कंप्यूटराइजेशन की स्थिति धीमी है.
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