जल के नाम पर जहर पी रहे हैं लोग

Published at :11 Dec 2015 9:26 PM (IST)
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जल के नाम पर जहर पी रहे हैं लोग

जल के नाम पर जहर पी रहे हैं लोग स्वच्छ पेयजल के अभाव में लोग पीने से अयोग्य करार दिये गये चापाकल का पानी पीने को विवशफोटो है 1 मेंकैप्सन- अनुमंडल कार्यालय में लाल निशान से चिह्नित चापाकल का पानी पीते लोग.प्रतिनिधि, गोगरीगंगा, गंडक, कोसी व बागमती आदि नदियों से घिरे गोगरी अनुमंडल में जल […]

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जल के नाम पर जहर पी रहे हैं लोग स्वच्छ पेयजल के अभाव में लोग पीने से अयोग्य करार दिये गये चापाकल का पानी पीने को विवशफोटो है 1 मेंकैप्सन- अनुमंडल कार्यालय में लाल निशान से चिह्नित चापाकल का पानी पीते लोग.प्रतिनिधि, गोगरीगंगा, गंडक, कोसी व बागमती आदि नदियों से घिरे गोगरी अनुमंडल में जल की कमी नहीं है, पर बात पेय जल की करें, तो यहां स्वच्छ पेयजल का घोर अभाव है. लोग दूषित जल पीने को मजबूर हो रहे हैं. यहां के अधिकांश जलस्रोतों में आयरन, आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट आदि हानिकारक तत्वों की मात्रा मानक से अधिक है. इसका सेवन यहां के लोग कर रहे हैं. यह कहना गलत नहीं, कि यहां के लोग जल के नाम पर जहर पी रहे हैं. कैसे पी रहे दूषित जलस्वच्छ जल के व्यवस्था नहीं होने से लोग मजबूरी में अयोग्य करार दिये गये चिह्नित चापाकलों के पानी का उपयोग भी पीने में कर रहे हैं. विभागीय स्तर पर जांच के बाद आयरन व आर्सेनिक आदि हानिकारक तत्व पाये जाने के बाद उक्त चापाकलों को लाल रंग से रंग कर चिह्नित किया गया है. इसका अर्थ है उस चापाकल का पानी पीने योग्य नहीं है. इसके बावजूद जानकारी व स्वच्छ जल के भाव में लोग बेधड़क इन चापाकलों का भी पानी पी रहे हैं. वहीं विभागीय स्तर पर अधिकांश चापाकलों की जांच भी नहीं की गयी है और न ही उसे चिह्नित किया गया है.व्यवस्था का हालविभागीय स्तर पर एक तरफ जहां लोगों को स्वच्छ जल मुहैया कराये जाने की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागीय स्तर पर क्षेत्र के जल स्रोतों की समुचित जांच तक नहीं की गयी है. जांच के नाम पर खानापूर्ति कर छोड़ दिया गया है. जिन क्षेत्रों में जांच की गयी, तो जांच के बाद किस चापाकल का पानी पीने योग्य है किस चापाकल का पानी पीने योग्य नहीं है. इसकी जानकारी के लिए वैसे चापाकलों का सही ढंग से चिह्नित भी नहीं किया गया है. पीने योग्य जल वाले चापाकलों को हरे रंग से चिह्नित किया जाना है. पीने से अयोग्य जल वाले चापाकल को लाल रंग से चिह्नित किया जाना है. हां कुछ जगहों पर ऐसे चिह्नित चापाकल अवश्य नजर आते हैं. बात जांच के हाल की करें, तो गंगा किनारे गांव के गोगरी नगर के अलावा गोरैयाबथान, रामपुर, मुश्कीपुर, महेशखूंट आदि जगहों की सैकड़ों के चापाकलों की जांच में आयरन की प्रचुरता के साथ आर्सेनिक, फ्लोराइड, नाइट्रेट आदि हानिकारक तत्व पाये गये थे. पर, सड़क किनारे वाले कुछ ही चापाकलों को ही चिह्नित किया गया. बीते वर्ष विभागीय स्तर पर क्षेत्र के विद्यालयों से जल के नमूने जांच के लिए लिये गये थे, लेकिन जांच का परिणाम अब तक नहीं मिल सका है. विद्यालयों में भी बच्चे चापाकल के पानी का सेवन बिना जांच के कर रहे हैं.

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