पुल का पाया धंसा, यातायात बाधित

पुल का पाया धंसा, यातायात बाधितसंकट. हजारों की आबादी को अनुमंडल मुख्यालय से जोड़ता है चिलौनी नदी के ऊपर बना पुल फोटो-04 से 11 तककैप्सन-जर्जर पुल व प्रतिक्रिया देते ग्रामीणप्रतिनिधि, त्रिवेणीगंज प्रखंड के मचहा समेत आसपास के गांव के हजारों की आबादी को अनुमंडल मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़क में चिलौनी नदी के ऊपर बना […]
पुल का पाया धंसा, यातायात बाधितसंकट. हजारों की आबादी को अनुमंडल मुख्यालय से जोड़ता है चिलौनी नदी के ऊपर बना पुल फोटो-04 से 11 तककैप्सन-जर्जर पुल व प्रतिक्रिया देते ग्रामीणप्रतिनिधि, त्रिवेणीगंज प्रखंड के मचहा समेत आसपास के गांव के हजारों की आबादी को अनुमंडल मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़क में चिलौनी नदी के ऊपर बना पुल का पाया धंसने से आवागमन बाधित हो गया है. हालांकि चिलौनी नदी पर बना यह पुल काफी जर्जर हो चुका है. छह पाया वाले इस पुल का तीन पाया काफी जर्जर हैं. वहीं एक भाग से यह पुल नीचे की ओर झुक गया है. इस वजह से इस पुल पर निकट भविष्य में आवागमन बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है. करीब दस हजार आबादी वाले इस क्षेत्र के लोगों को अनुमंडल मुख्यालय पहुंचने का एक मात्र यही रास्ता है. इस लिए लोग जान जोखिम में डाल कर इस पुल पर आवागमन करते हैं. इस समस्या के समाधान को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी व स्थानीय जनप्रतिनिधियों के उदासीन रवैये के कारण अब क्षेत्र के लोगों में आक्रोश है. पुल के पाया धंसने से हजारों की आबादी प्रभावित ज्ञात हो कि अनुमंडल क्षेत्र के मचहा, कुसहा, मयुरवा, योगियाचाठी समेत मधेपुरा जिला के बरियाही, लाही, बथान परसा, गाढ़ा आदि गांव के आवागमन का यही एक रास्ता है. लाखों की आबादी को शहरों से जोड़ने वाला इस पुल के धाराशायी हो जाने से इस क्षेत्र के लोगों के लिए आवागमन की भारी समस्या उत्पन्न हो गयी है. वाहनों का परिचालन तो दूर इस क्षेत्र के लोगों के लिए अनुमंडल मुख्यालय सहित अन्य स्थानों पर जाने के लिए अब पुराने दौर में वापस जाने की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने इस दिशा में कोई खास पहल नहीं की, तो आने वाले समय में इस क्षेत्र के लोगों की स्थिति पहले की तरह हो जायेगी. बरसात के मौसम में नदी के जल स्तर में वृद्धि के बाद पुल के शेष पाया का भी धाराशायी हो जाने की संभावना बनी रहेगी.स्थानीय लोगों ने दी प्रतिक्रिया मचहा मुख्य सड़क में चिलौनी नदी पर बना पुल के जर्जर होने पर मयुरवा निवासी शंकर कुमार ने बताया कि यह पुल एक बड़ी आबादी को जोड़ती है. साथ ही मुख्यालय पहुंचने का एक मात्र यही सहारा है. बताया कि जर्जर पुल किसी भी समय एक बड़ी घटना को जन्म दे सकती है. विभाग को चाहिए कि अविलंब पुल को दुरुस्त करवायें. मचहा निवासी पूर्व सैनिक दीप नारायण चौधरी का कहना है कि इस पुल से अनुमंडल क्षेत्र सहित मधेपुरा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों का एक मात्र आवागमन का जरिया है. उन्होंने बताया कि लोगों को अपनी जान जोखिम में डाल कर आवागमन कर रहे हैं. कपिलेश्वर यादव ने बताया कि हजारों की आबादी को मुख्यालय सहित अन्य स्थानों पर जाने हेतु इस मार्ग का उपयोग किया जा रहा है. ऐसे में इस मार्ग पर बना पुल का विभाग द्वारा रख रखाव नहीं किेया जाना समझ से परे है. हीरा यादव ने बताया कि चिलौनी नदी पर बना पुल की स्थिति काफी जर्जर है. बताया कि किसानों समेत व्यवसायियों के नजरिये यह सड़क महत्वपूर्ण मार्ग है. संबंधित विभाग को चाहिए कि समय रहते जर्जर पुल को सुदृढ़ कराया जाये. ताकि किसी प्रकार की अनहोनी का सामना यहां के लोगाें को ना करनी पड़े. लक्ष्मी नारायण यादव ने बताया कि मचहा गांव आचार्य स्वामी हरिनंदन परमहंस जी महाराज का जन्म स्थली है. इस गांव स्थित संत मत आश्रम है जहां संतमत आयोजन के समय दूर दराज क्षेत्र के हजारों लोग उपस्थित होते हैं. ऐसी स्थिति में जर्जर पुल सुलभ तरीके से आवागमन करना किसी खतरा से कम नहीं है. बोधी यादव ने बताया कि चिलौनी नदी पर बना पुल किसी समय धाराशाही हो सकता है. बताया कि इस क्षेत्र वासियों के लिए मुख्यालय आवागमन का एक मात्र सहारा है. जनार्दन सरदार ने बताया कि उन लोगों का मुख्य मार्ग मचहा स्थित सड़क ही है. बताया कि विभाग द्वारा इसे दुरुस्त नहीं किया गया तो मुख्यालय सहित अन्य स्थानों का संपर्क टूट जायेगा.
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