श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न हुई मधुश्रवणी पूजा

Published at :18 Aug 2015 7:41 AM (IST)
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श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न हुई मधुश्रवणी पूजा

नवविवाहिताओं ने की पति के दीर्घायु की कामना खगड़िया : चलू बहिना हकार पूरय लेय टनी दाय के वर एलय टेमी दागय लय गीत के साथ मधुश्रवणी पर्व का समापन हुआ. श्रवण मास के कृष्ण पक्ष पंचमी को प्रारंभ तथा शुक्ल पक्ष तृतीया को संपन्न होने वाले मिथिला संस्कृति के महान पर्व मधुश्रवणी सोमवार को […]

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नवविवाहिताओं ने की पति के दीर्घायु की कामना
खगड़िया : चलू बहिना हकार पूरय लेय टनी दाय के वर एलय टेमी दागय लय गीत के साथ मधुश्रवणी पर्व का समापन हुआ. श्रवण मास के कृष्ण पक्ष पंचमी को प्रारंभ तथा शुक्ल पक्ष तृतीया को संपन्न होने वाले मिथिला संस्कृति के महान पर्व मधुश्रवणी सोमवार को परंपरागत श्रद्धा एवं उल्लास के साथ संपन्न हो गया.
खास तौर पर ब्राह्मण समाज की नवविवाहिताएं इस पर्व को मनाती हैं. नवविवाहिताएं 15 दिनों तक अपने ससुराल से भेजा गया अरवा भोजन करने के बाद वस्त्र आभूषण से सुसज्जित होकर नाग देवता एवं मां गौरी की पूजा-अर्चना कर पति के दीर्घायु होने की कामना करती हैं. इन 15 दिनों तक नवविवाहिताएं झुंड बना कर सुबह शाम बांस की डलिया में फूल तोड़ कर नाग देवता एवं मां गौरी की पूजा करती हैं.
सोमवार को समापन के दिन पूजा देखने के लिए महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी. बिशौनी गांव में आधा दर्जन से अधिक नवविवाहिताओं ने पूजा की. प्रत्येक दिन बुजुर्ग कथा वाचिका से इस पूजन की कथा का समूह में श्रवण किया जाता है.
आसान नहीं है पूजा की विधि
सोमवार को समापन के दिन नवविवाहिताओं को कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ा. अचल सुहाग के लिए नवविवाहिता को शरीर के छह स्थान पर रुई की टेमी के साथ पान-सुपारी रख कर टेमी जला कर दागा गया.
वहीं 14 सुहागिनों के बीच पकवानों से भरी डाली का वितरण किया गया. नवविवाहिताओं ने ससुराल वालों से आशीर्वाद प्राप्त किया. लगातार 15 दिनों तक इस पूजन के दौरान भक्ति का माहौल बना रहा. इस पर्व में नवविवाहिताओं के भाइयों का भी योगदान रहता है.
प्रत्येक दिन पूजा समाप्ति के समय भाई द्वारा अपनी बहन को हाथ पकड़ कर उठाया जाता है. इसके लिए भाई को दूध एवं फल नवविवाहिताएं देती हैं. संसारपुर निवासी पंडित अजय कांत ठाकुर बताते हैं कि पति के दीर्घायु के लिए नवविवाहिताएं मधुश्रवणी पूजा करती हैं.
यह मिथिला संस्कृति का महान पर्व है. पूजन के समय मैना गौरी, मंगला गौरी, पृथ्वी जन्म, महादेव कथा, गौरी तपस्या, शिव विवाह, गंगा कथा, बिहुला विषहरी, बाल बसंत सहित चौदह खंडों की कथा नवविवाहिताओं को श्रवण करनी पड़ती है. सुबह शाम महिलाएं सुहाग एवं कोहवर गीत गाकर भोले शंकर को प्रसन्न करने का प्रयास करती हैं. मंगलवार को व्रत के निस्तार पर नवविवाहिताएं नमक ग्रहण करेंगी.
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