स्कूल भवन तोड़ने के मामले में घिरे डीइओ

Updated at : 10 Nov 2017 6:06 AM (IST)
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स्कूल भवन तोड़ने के मामले में घिरे डीइओ

जिला लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत की गयी शिकायत की सुनवाई के दौरान खुला भेद मामला बेलदौर के मध्य विद्यालय पचौत में बिना सरकारी प्रक्रिया पूरी किये ही सरकारी भवन को तोड़ने का स्कूल भवन तोड़ने के मामले में प्रधानाध्यापक सहित शिक्षा समिति के जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई के आदेश खगड़िया : शिक्षा विभाग […]

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जिला लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत की गयी शिकायत की सुनवाई के दौरान खुला भेद

मामला बेलदौर के मध्य विद्यालय पचौत में बिना सरकारी प्रक्रिया पूरी किये ही सरकारी भवन को तोड़ने का
स्कूल भवन तोड़ने के मामले में प्रधानाध्यापक सहित शिक्षा समिति के जिम्मेवार लोगों पर कार्रवाई के आदेश
खगड़िया : शिक्षा विभाग में गोलमाल के रोज नये मामले सामने आ रहे हैं. अब मध्य विद्यालय पचौत में बने सरकारी भवन को बिना सक्षम पदाधिकारी से अनुमति के प्रधानाध्यापक द्वारा तोड़ कर हटाने का मामला सामने आया है. पूरे मामले का खुलासा जिला लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत की गयी शिकायत की सुनवाई के दौरान हुआ है. पचौत निवासी सुरेश चौधरी जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में पूरे मामले की शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की थी. सुनवाई के दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ है
कि डीइओ सुरेश कुमार साहु को सरकारी भवन तोड़ने की सरकारी प्रक्रिया के बारे में जानकारी तक नहीं है. पूरे मामले में जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने नियमों का उल्लंघन कर विद्यालय भवन तोड़ने वाले प्रधानाध्यापक एवं उनके सहयोगियों तथा शिक्षा समिति के प्रस्ताव को संपुष्ट करने वाले पदाधिकारी उक्त भवन को प्रक्रियाओं का पालन किये बगैर तोड़ने के लिये जिम्मेवार माना है.
नियम को ताक पर रख तोड़ा भवन : सुनवाई के दौरान जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने अपने फैसले में साफ साफ कहा है कि मध्य विद्यालय पचौत के सरकारी भवन के एक हिस्से को तोड़ने में सरकारी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है. जिला शिक्षा पदाधिकारी सुरेश साहु द्वारा जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में सौंपे गये प्रतिवेदन में कहा है कि मध्य विद्यालय पचौत के भवन की स्थिति जर्जर हो जाने के कारण छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए तोड़ने का निर्णय लिया गया. विद्यालय शिक्षा समिति द्वारा उक्त भवन के क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़ने का प्रस्ताव पारित करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी को वस्तुस्थिति की जानकारी दी. जिसके आधार पर डीइओ कार्यालय के ज्ञापांक 354 दिनांक 01.03.2016 के तहत विद्यालय शिक्षा समिति के निर्णय की संपुष्टि कर दिया. जिसके बाद विद्यालय भवन के कथित रूप से क्षतिग्रस्त हिस्से को तोड़ते हुए मलवे की नीलामी करवा कुल 61 हजार रुपये सरकारी खजाने में जमा करा दिये गये. जबकि नियमत: इसकी सूचना भवन निर्माण विभाग को दिया जाना चाहिये. लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी ने इसका पालन करना भी मुनासिब
नहीं समझा.
क्या है सरकारी भवन तोड़ने के नियम
भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सपेश्वर मंडल के अनुसार सरकारी भवन को तोड़ने से पहले यह देखना जरूरी है कि भवन की स्थिति क्या है? भवन रहने योग्य है या नहीं? भवन सुरक्षित है या असुरक्षित? कोई भवन तब तक ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिये जब तक कि वह खतरनाक हालत में ना हो या मरम्मत के लायक भी न रह गया हो. जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को सौंपे गये प्रतिवेदन में कार्यपालक अभियंता ने कहा है कि भवनों का रिवर्स मूल्य,औसतन मूल्य का पता करने के लिये प्राक्कलन का गठन किया जाता है. साथ ही प्राक्कलन की स्वीकृति सक्षम पदाधिकारी से प्राप्त कर नीलामी प्रेस विज्ञप्ति में निकाल कर भवन को तोड़ने एवं स्थल से हटाने की कार्रवाई की जाती है. सक्षम पदाधिकारी विभागाध्यक्ष, विभाग के उच्चाधिकारी से अनुमति प्राप्त कर नीलामी की प्रक्रिया की जाती है. तोड़ गयी सामग्री के नीलामी बाद तोड़ने की प्रक्रिया की जाती है. नीलामी से प्राप्त राशि सरकारी राजस्व में जमा कराया जाता है.
मध्य विद्यालय पचौत में बने सरकारी भवन तोड़ने के मामले में सरकारी नियम की अनदेखी की शिकायत ग्रामीण सुरेश चौधरी ने की थी. जिसकी सुनवाई के दौरान सामने आये तथ्यों के अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि मध्य विद्यालय पचौत में बने भवन को तोड़ने के मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी से लेकर प्रधानाध्यापक स्तर से नियमों की अनदेखी की गयी है. जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्र से यह जाहिर होता है कि वे सरकारी भवन तोड़ने की प्रक्रिया से अवगत नहीं हैं. ऐसी स्थिति में नियमों का उल्लंघन कर विद्यालय भवन तोड़ने वाले प्रधानाध्यापक एवं उनके सहयोगियों तथा शिक्षा समिति के प्रस्ताव को संपुष्ट करने वाले पदाधिकारी उक्त भवन को प्रक्रियाओं का पालन किये बगैर तोड़ने के लिये जिम्मेवार हैं.
विजय कुमार सिंह, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी.
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