एएनएम छेड़छाड़ प्रकरण पर मंत्री ने मांगी रिपोर्ट

Updated at : 02 Sep 2017 6:29 AM (IST)
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एएनएम छेड़छाड़ प्रकरण पर मंत्री ने मांगी रिपोर्ट

खगड़िया : जिले के प्रभारी मंत्री कपिलदेव कामत ने भरतखंड एपीएचसी में तैनात एएनएम-चिकित्सक पर छेड़छाड़ प्रकरण के जांच के आदेश दिये हैं. पूरे मामले की खबर प्रभात खबर में प्रकाशित होने के बाद प्रभारी मंत्री ने पूरे मामले में रिपोर्ट तलब करते हुए दोषी पर हर हाल में कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. इधर, […]

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खगड़िया : जिले के प्रभारी मंत्री कपिलदेव कामत ने भरतखंड एपीएचसी में तैनात एएनएम-चिकित्सक पर छेड़छाड़ प्रकरण के जांच के आदेश दिये हैं. पूरे मामले की खबर प्रभात खबर में प्रकाशित होने के बाद प्रभारी मंत्री ने पूरे मामले में रिपोर्ट तलब करते हुए दोषी पर हर हाल में कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.

इधर, पूरे मामले में सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार सिंह द्वारा आरोप के घेरे में आये चिकित्सक डॉ पीके सिन्हा का प्रतिनियोजन फिर से भरतखंड एपीएचसी में करने का फैसले पर परबत्ता पीएचसी प्रभारी ने सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. इतना ही नहीं परबत्ता पीएचसी प्रभारी ने सवालिया लहजे में पूछा है कि आखिर जब परबत्ता प्रखंड में कहीं बाढ नहीं है तो फिर सचिव के आदेश की अनदेखी कर फिर से प्रतिनियोजन करना कहां तक मुनासिब है. ऐसी स्थिति में काम करना मुश्किल हो रहा था. सो पीएचसी प्रभारी पद से इस्तीफा देते हुए पत्र सिविल सर्जन को भेज दिया गया है.
सीएस के भाई होने का धौंस देते हैं चिकित्सक : इधर, पीड़ित एएनएम ने बताया कि डॉ पीके सिन्हा सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार सिंह के भाई होने का धौंस देते हुए कहते हैं कि तुम्हारे आवेदन देने के बाद भी मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा. उल्टे 20 दिनों के अंदर फिर से भरतखंड एपीएचसी में प्रतिनियोजन भी हो गया. इधर, डॉ सिन्हा की धमकी से एएनएम का पूरा परिवार सहमा हुआ है. मई महीने में सीएस को आवेदन देकर कार्रवाई की गुहार के बावजूद अब तक विभाग जांच तक पूरा नहीं कर पाया है.
बताया जाता है कि पूरा मामला हाइप्रोफाइल होने के कारण विभाग कार्रवाई करने से बच रहा है. बताया जाता है कि मामला तूल पकड़ने के बाद डीपीएम, डॉ मंजू कुमारी आदि ने पूरे मामले की जांच भी की है. जांच के दौरान पीड़ित एएनएम ने आरोप को दोहराते हुए पूरा वाक्या टीम को लिखित रूप से दर्ज कराया है. हालांकि पूरे मामले को दबाने के लिये विभाग ने पीड़ित एएनएम का तबादला भरतखंड से पसराहा जरूर कर दिया है.
मीडिया से बात करने से कतरा रहे सीएस : मई 2017 में भरतखंड में तैनात पीड़ित एएनएम द्वारा चिकित्सक पर छेड़छाड़ से संबंधित दिये गये आवेदन पर अब तक जांच कर कार्रवाई नहीं किया जा सका है. इससे विभाग के कटघरे में खड़ा होने के बाद सिविल सर्जन डॉ अरुण कुमार सिंह मीडिया से बात करने से कतरा रहे हैं. शुक्रवार को उनके सरकारी मोबाइल पर कई बार रिंग किया गया लेकिन रिसीव नहीं किया गया. बताया जाता है कि बाढ़ व महमारी रोकने का झूठा बहाना बना कर डॉ पीके सिन्हा को फिर से भरतखंड एपीएचसी में प्रतिनियोजन प्रकरण में सीएस कार्यालय की भूमिका सवालों के घेरे में है.
भरतखंड एपीएचसी में चिकित्सक पर एएनएम द्वारा छेड़छाड़ सहित प्रताड़ना के आरोप की जांच कर उचित कार्रवाई की जायेगी. मई महीने में ही सिविल सर्जन को पीड़ित एएनएम द्वारा पूरे घटना की जानकारी देते हुए आवेदन देने के बाद भी अब तक जांच कर कार्रवाई नहीं किया जाना गंभीर मामला है. पूरे मामले में डीएम व सीएस से रिपोर्ट तलब की जा रही है. जरुरत पड़ी तो स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा जायेगा. सूबे की नीतीश सरकार के रहते महिलाओं के साथ गलत हरकत बरदाश्त नहीं की जा सकती है. पूरे मामले को प्रकाश में लाने के लिये प्रभात खबर का शुक्रिया.
कपिलदेव कामत, प्रभारी मंत्री, खगड़िया.
जब 8 अगस्त को सचिव के आदेश का हवाला देते हुए डॉ पीके मिश्रा का भरतखंड एपीएचसी से प्रतिनियोजन तोड़ा गया था. तो फिर 20 दिनों के अंदर सचिव के आदेश को ताक पर रख कर डॉ सिन्हा का प्रतिनियोजन फिर से भरतखंड एपीएचसी में कर दिया गया. जब प्रखंड में कहीं बाढ है ही नहीं तो फिर बाढ व महमारी रोकने का झूठा कारण बता कर प्रतिनियोजन कर दिया गया है. मई 2017 में इसी अस्पताल के एक एएनएम ने डॉ पीके सिन्हा पर छेड़छाड़ सहित गलत आचरण का आरोप लगाते हुए सीएस को भी आवेदन दिया था. इससे पहले भी डॉ पीके सिन्हा की मनमानी की शिकायत मौखिक रुप से की गयी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं किये जाने से परबत्ता प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था चला पाना मुश्किल हो रहा था.
डॉ एनपी मेहरा, परबत्ता पीएचसी प्रभारी.
भरतखंड एपीएचसी में तैनात एक एएनएम द्वारा लगाये गये आरोपों की उच्चस्तरीय जांच के लिये मैंने खुद ही सीएस सहित मंत्री से अनुरोध किया है. मेरे उपर लगाये गये गलत आचरण सहित छेड़छाड़ के आरोप में तनिक भी सच्चाई नहीं है. समय पर ड्यूटी नहीं आना, काम में लापरवाही में कड़ाई करने पर तत्कालीन एएनएम ने ड्यूटी से बचने के लिये मेरे उपर छेड़छाड़ सहित कई मनगढंत आरोप लगाये हैं. सारे आरोप बेबुनियाद हैं.
डॉ. पीके सिन्हा, चिकित्सक.
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