बाढ़ के झूठे आंकड़े पेश कर फंसा प्रशासन

Updated at : 18 Aug 2017 6:05 AM (IST)
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बाढ़ के झूठे आंकड़े पेश कर फंसा प्रशासन

खुलासा. एक दिन में प्रभावित गांवों की संख्या 74 से 83 हुई, जमीन में बढ़ोतरी नहीं बाढ़ से बर्बादी व राहत वितरण के गलत आंकड़े पेश कर प्रशासनिक अधिकारी डीएम की आंखों में धूल झोंक रहे हैं. जिला प्रशासन द्वारा जारी बाढ़ से जुड़ी रिपोर्ट के कई गलत आंकड़े प्रशासनिक दावे की पोल खोलने के […]

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खुलासा. एक दिन में प्रभावित गांवों की संख्या 74 से 83 हुई, जमीन में बढ़ोतरी नहीं

बाढ़ से बर्बादी व राहत वितरण के गलत आंकड़े पेश कर प्रशासनिक अधिकारी डीएम की आंखों में धूल झोंक रहे हैं. जिला प्रशासन द्वारा जारी बाढ़ से जुड़ी रिपोर्ट के कई गलत आंकड़े प्रशासनिक दावे की पोल खोलने के लिए काफी हैं.
खगड़िया : जिले में बाढ़ के कहर के बीच प्रशासन झूठे आंकड़े पेश कर अपनी पीठ थपथपाने में लगा हुआ है. यह खुलासा खुद जिला प्रशासन द्वारा जारी बाढ़ से जुड़ी रिपोर्ट के आंकड़े कर रहे हैं. इधर, प्रशासन के गलत आंकड़े के खेल में फंस कर बाढ़ पीड़ित कराहने को विवश हैं. इस पूरे खेल को समझने के लिये प्रशासनिक रिपोर्ट के कुछ बिंदु पर गौर फरमाना होगा. जिला आपदा विभाग से जारी रिपोर्ट में 16 अगस्त को प्रभावित पंचायतों की संख्या 25 थी. अगले दिन 17 अगस्त को बढ़कर गांवों की संख्या 29 हो गयी.
इसी तरह एक दिन पहले प्रभावित लोगों की संख्या 50200 से बढ़कर 68000 तक जा पहुंची. जबकि बाढ़ से घिरे गांवों की संख्या बुधवार को 74 थी लेकिन गुरूवार को बाढ़ से प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 83 हो गया लेकिन ताज्जुब की बात है कि एक दिन में प्रभावित गांवों की संख्या 9 की बढ़ोत्तरी हो गयी लेकिन प्रभावित जमीन की संख्या में एक इंच का भी इजाफा नहीं हुआ. ऐसा कैसे हो सकता है? 16 अगस्त को प्रभावित कृषि योग्य भूमि .211 लाख हेक्टेयर तथा गैर कृषि योग्य भूमि .115 लाख हेक्टेयर होने का दावा प्रशासनिक आंकड़े में किया गया है. लेकिन अगले दिन बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या 74 से बढ़कर 83 हो जाती है लेकिन पूर्व में प्रभावित भूमि के आंकड़े में एक इंच की भी बढ़ोत्तरी नहीं होती है. ऐसे कई बिंदु हैं जो प्रशासनिक झूठ की पोल खोल रहे हैं.
आंकड़े व दावे के तिकड़म के बीच खगड़िया में बाढ़ पीड़ितों का दर्द नासूर बनता जा रहा है. बाढ़ से घिरे लोग कराह रहे हैं और जिला प्रशासन झूठी रिपोर्ट बनाने में व्यस्त है. स्थिति यह है कि हकीकत से कोसो दूर प्रशासनिक आंकड़े पेश कर प्रशासनिक अधिकारी सरकार की आंखों में धूल झोंकने के साथ ही बाढ़ पीड़ितों के जख्मों को भी कुरेदने जैसा है. इस बार खगड़िया के सदर प्रखंड सहित मानसी, बेलदौर, चौथम, गोगरी, अलौली प्रखंड में बाढ़ का कहर टूटा है.
बाढ़ प्रभावित इलाकों के लोगों का दर्द बढ़ता ही जा रहा है. इधर, बाढ़ के कहर को देखते हुए 40 सदस्यीय एनडीआरएफ की टीम पटना से खगड़िया पहुंच कर राहत व बचाव कार्य में जुट गयी है.
जिला प्रशासन के दावे पर प्रश्नचिह्न
प्रभावित पंचायतों की संख्या 29
पूर्ण प्रभावित 08
अपूर्ण प्रभावित 21
प्रभावित गांवों की संख्या 83
प्रभावित लोग 68000
पशु 2100
कृषि योग्य .211 लाख हेक्टेयर
गैर कृषि योग्य .115 लाख हेक्टेयर
क्षतिग्रस्त फसल .111 लाख हेक्टेयर
अनुमानित फसल मूल्य 4.50 लाख में
क्षतिग्रस्त झोपड़ी 112
पक्का मकान 06
चलाये गये नावों की संख्या 105
मोटरबोट 02
सहायता शिविर की संख्या 05
कैंप में विस्थापितों की संख्या 2910
वितरित अनाज 17 क्विंटल
चूड़ा 106.64 क्विंटल
गुड़ 24.23 क्विंटल
दियासलाई की संख्या 3007
पॉलीथिन शीट्स 960
बाढ़ से जुड़ी जो रिपोर्ट विभिन्न अंचलों से सीओ द्वारा भेजी गयी उसी के आधार पर रिपोर्ट बनायी गयी है. अब अगर इसमें कोई गलती है तो इसके लिए सीओ जिम्मेवार होंगे.
प्रियंका कुमारी, जिला आपदा पदाधिकारी.
आखिर जिला प्रशासन बाढ़ व राहत के फर्जी आंकड़े पेश कर क्या जताना चाहता है. दरअसल, बाढ़ पूर्व प्रशासनिक तैयारी फेल हो जाने के बाद किरकिरी से बचने के लिए गलत रिपोर्ट पेश कर प्रशासनिक अधिकारी सरकार की आंखों में धूल झोंक रहे हैं. दावे व हकीकत में अंतर बाढ़ पीड़ितों के दर्द को बयां करने के लिए काफी है. अभी भी कई इलाकों में बाढ़ पीड़ितों के राहत के नाम पर एक किलो अनाज तक नहीं मिला है. लेकिन प्रशासन झूठे आंकड़े बनाकर राहत पहुंचाने का दावा कर रहा है.
सुभाष चन्द्र जोशी, सामाजिक कार्यकर्ता.
प्रशासन के दावे पर कैसे करें भरोसा
इस तरह के गलत आंकड़े बाढ़ पीड़ितों के दर्द पर मरहम लगाने की बजाय नमक छिड़कने जैसा है. ऐसे में प्रशासनिक दावों पर आखिर कैसे भरोसा किया जाये. क्या ऐसे में धरातल पर सही व पारदर्शी तरीके से राहत वितरण के उद्देश्य सफल हो पायेगा? इस गलत आंकड़े को पेश करने में गलती चाहे सीओ की हो या आपदा विभाग की लेकिन इसका खामियाजा तो उन बाढ़ पीड़ितों को भुगतना पड़ रहा है. जिन पर प्राकृतिक आपदा का कहर पहले से टूटा हुआ है. कोसी नदी के कहर से तटबंध के भीतर बसे गांवों में पानी प्रवेश कर चुका है. जिस कारण लोग पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं. आलम यह है तटबंध के भीतर बसे गांवों के लोगों की जिंदगी अब नाव पर ही निर्भर है. वहीं किसानों के कई एकड़ में लगी फसल को भी कोसी की प्रलयकारी धारा की चपेट में आ चुका है. इधर फसलों को तबाह हो जाने के कारण बाढ़ से प्रभावित लोगों के बीच भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. साथ मवेशियों के लिए चारा का भी संकट हो गया है. घर में रखे सारी सामग्री बाढ़ में बह गये हैं. बाढ़ से बचने के लिये इन इलाकों में बसे लोग नाव के सहारे अपने माल-मवेशियों सहित पलायन करने को मजबूर हैं.
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