रमज़ान, आज अकीदत के साथ अदा होगी अलविदा की नमाज

रमज़ान, आज अकीदत के साथ अदा होगी अलविदा की नमाज
कोढ़ा माहे रमज़ान की रूहानी फिज़ा अपने आख़िरी मुकाम की ओर बढ़ रही है. आज जुमे के दिन रमज़ान के पांचवें और आख़िरी जुमे (अलविदा) की नमाज़ पूरे अकीदत व एहतराम के साथ अदा की जाएगी. कोढ़ा प्रखंड के मूसापुर, बाहरखाल, उत्तरी सिमरिया, दक्षिणी सिमरिया, बिशनपुर, मखदूमपुर और पवई समेत तमाम मुस्लिम बाहुल्य इलाक़ों की मसाजिदों में नमाज़ को लेकर खास तैयारियां पूरी कर ली गई है. मस्जिदों की सफाई, वुज़ूख़ाने की व्यवस्था और नमाज़ियों के लिए सहूलियत का खास ख्याल रखा गया है. अलविदा जुमे को लेकर लोगों में जबरदस्त जज़्बा और रूहानी जोश देखने को मिल रहा है. मौलाना मुफ्ती रिज़वान अहमद क़ासमी ने रमज़ान की फज़ीलत बयान करते हुए फरमाया कि जो शख्स ईमान और सवाब की नियत से रोज़ा रखता है, उसके तमाम गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं. उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि “रोज़ा खास तौर पर अल्लाह तआला के लिए होता है और इसका अज्र भी वही अता फरमाता है.” उन्होंने आगे ज़कात की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि ज़कात इस्लाम का अहम रुक्न है, जिसे अल्लाह तआला ने मालदारों पर फर्ज़ किया है। ज़कात अदा न करने वालों के लिए आख़िरत में सख्त अज़ाब की वईद आई है. हाफ़िज़ सद्दाम ने बताया कि ज़कात में माल का चालीसवां हिस्सा यानी ढाई फ़ीसदी गरीबों, मिस्कीनों और यतीमों में तक़सीम करना जरूरी है. उन्होंने सदक़ा-ए-फ़ित्र के बारे में कहा कि यह हर साहिब-ए-निसाब पर वाजिब है और घर के तमाम अफ़राद की तरफ से अदा करना लाज़िमी है. फितरा अदा किए बगैर रोज़ा मुकम्मल नहीं माना जाता. इधर रमज़ान के संपन्न होने के साथ ही ईद-उल-फ़ित्र की तैयारियां भी ज़ोर पकड़ने लगी हैं. कोढ़ा प्रखंड के बाज़ारों और चौक-चौराहों पर कपड़ों, इत्र, टोपी, रुमाल और लच्छा सेवई की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है. खासकर शाम के वक्त बाज़ारों में अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिल रही है. बहरहाल, रमज़ान के इस मुबारक महीने की रुख्सती के साथ ही अलविदा जुमे की नमाज़ को लेकर पूरे इलाके में इबादत, मोहब्बत और भाईचारे का माहौल कायम है.
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